बुधवार, मार्च 03, 2021

परमपिता ब्रह्मा के मानस पुत्र

ये तो हम सभी जानते हैं कि परमपिता ब्रह्मा से ही इस सारी सृष्टि का आरम्भ हुआ। सर्वप्रथम ब्रह्मा ने पृथ्वी सहित सारी सृष्टि की रचना की। तत्पश्चात उन्होंने जीव रचना के विषय में सोचा और तब उन्होंने अपने शरीर से कुल ५९ पुत्र उत्पन्न किये। इन ५९ पुत्रों में उन्होंने सर्वप्रथम जो १६ पुत्र अपनी इच्छा से उत्पन्न किये वे सभी "मानस पुत्र" कहलाये। इन १६ मानस पुत्रों में १० "प्रजापति" एवं उनमें से ७ "सप्तर्षि" के पद पर आसीन हुए। ये सभी मानस पुत्र ब्रह्मा के अन्य पुत्रों से अधिक प्रसिद्ध हैं। पुराणों में इन्हे "साम ब्रह्मा", अर्थात ब्रह्मा के सामान कहा गया है।

सोमवार, फ़रवरी 22, 2021

रामायण का प्रथम श्लोक

रामायण के रचनाकार प्रचेता पुत्र महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि भी कहा जाता है। वो इस कारण कि काव्य का जैसा प्रस्फुटन रामायण में देखने को मिला, वैसा उससे पहले कभी देखने को नहीं मिला था। इसी कारण रामायण को पहला महाकाव्य कहा जाता है। रामायण के बाद महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत ही उस स्तर का महाकाव्य बना किन्तु फिर भी रामायण जितना भावनात्मक है, कदाचित महभारत में भी वैसा भाव देखने को नहीं मिलता।

शनिवार, फ़रवरी 13, 2021

जाति एवं वर्ण में अंतर

"समाज से जाति भेद को मिटाना आवश्यक है" या "हिन्दू समाज कई जातियों में बटा है" - इस प्रकार की बातें हमें प्रतिदिन सुनने को मिल ही जाती है। आपमें से यदि कोई सोच रहा हो कि आज अचानक धर्म संसार पर राजनितिक बातें कैसे होने लगी, तो आप गलत समझ रहे हैं। आज हम कुछ ऐसा समझने का प्रयास करने वाले हैं जो शुद्ध रूप से सनातन हिन्दू धर्म का आधार है, किन्तु दुर्भाग्यवश उसे तोड़-मरोड़ कर ऐसा रूप दे दिया गया है जिससे समाज में मतभेद उत्पन्न हो गए हैं।

रविवार, फ़रवरी 07, 2021

वाल्मीकि रामायण एवं रामचरितमानस में अंतर

महर्षि वाल्मीकि ने युगों पहले मूल रामायण की रचना की थी जिसमें भगवान विष्णु के ७वें अवतार श्रीराम की लीलाओं का वर्णन है। कालांतर में वाल्मीकि रामायण के अनेक भाषाओं में कई संस्करणों (३०० से भी अधिक) की रचना की गयी किन्तु जो प्रसिद्धि एवं सम्मान १६ सदी में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री रामचरितमानस को प्राप्त है, उसकी कोई अन्य तुलना नहीं है। आज भी ९०% घरों में वास्तव में रामचरितमानस ही होता है। मानस की तुलना में मूल वाल्मीकि रामायण का प्रसार उतना नहीं है।

शुक्रवार, जनवरी 29, 2021

चारों युगों के लक्षण

चारों युगों के वर्णन और ब्रह्मा जी की आयु के विषय में आपने पहले ही इस लेख में पढ़ा है। आज हम चतुर्युगी व्यवस्था की प्रकृति के विषय में थोड़ा और विस्तार से जानेंगे। हर युग का अपना कुछ स्वभाव होता है जिसका प्रभाव मनुष्य से लेकर वस्तुओं, प्रत्येक चीज पर पड़ता है। आइये इसके विषय में कुछ जानते हैं।

सतयुग
  • कुल समय: ४८०० दिव्य वर्ष या १७२८००० मानव वर्ष।
  • पाप: ० भाग

बुधवार, जनवरी 20, 2021

मंदार पर्वत - वो स्थान जहाँ समुद्र मंथन हुआ था

विगत मकर संक्रांति को मुझे मंदार पर्वत जाने का अवसर मिला। मैं स्वयं भागलपुर (बिहार) का रहने वाला हूँ और बचपन से कई बार यहाँ जा चुका हूँ। ये वही पर्वत है जिससे प्राचीन काल में समुद्र मंथन किया गया था। ये वही मंदराचल पर्वत है जिसे समुद्र मंथन में मथनी के रूप में उपयोग में लाया गया था। इस स्थान का नाम "बौंसी" है जो "वासुकि" का अपभ्रंश है। नागराज वासुकि को ही मंदराचल पर्वत की रस्सी के रूप में उपयोग किया गया था। उन्ही के नाम पर इस स्थान का नाम पड़ा जो अब अपभ्रंश होकर बौंसी हो गया है।

सोमवार, जनवरी 11, 2021

नटराज के पैरों के नीचे कौन दबा रहता है?

हम सभी ने भगवान शिव के नटराज रूप को कई बार देखा है। किन्तु क्या आपने ध्यान दिया है कि नटराज की प्रतिमा के पैरों के नीचे एक दानव भी दबा रहता है? आम तौर पर देखने से हमारा ध्यान उस राक्षस की ओर नहीं जाता किन्तु नटराज की मूर्ति के दाहिने पैर के नीचे आपको वो दिख जाएगा। क्या आपको पता है कि वास्तव में वो है कौन? आइये आज इस लेख में हम उस रहस्य्मयी दानव के विषय में जानते हैं।

मंगलवार, जनवरी 05, 2021

श्रुति एवं स्मृति क्या है?

हिन्दू धर्म में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक है कि अति प्राचीन होने के बाद भी हिन्दू धर्म के धर्मग्रंथों में लिखे ज्ञान को सुरक्षित कैसे रखा गया। यदि हम आधुनिक काल गणना की भी बात करें तो महाभारत का कालखंड ७००० वर्ष एवं रामायण का कालखंड १४००० वर्ष पूर्व का बताया गया है। हिन्दू धर्म के सबसे प्राचीन ग्रंथ वेदों को लगभग २८००० वर्ष प्राचीन बताया जाता है। अब प्रश्न ये है कि ये सारे धर्मग्रन्थ तो आज भी हमारे पास हैं। फिर इस अथाह ज्ञान को इतने लम्बे समय तक किस प्रकार संचित किया गया? आइये इसे समझते हैं।