सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

February, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एकश्लोकी रामायण

। आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनं 
वैदेही हरणं, जटायु मरणं, सुग्रीव संभाषणं 
बालि निर्दलं, समुन्द्र तरणं, लंकापुरी दाहनं 
पश्चाद्रावण-कुम्भकरण हननं, एतद्धि रामायणं ।।