बुधवार, नवंबर 14, 2012

श्रीकृष्ण की पत्नियाँ और पुत्र

श्रीकृष्ण के जीवन में स्त्रियों का बड़ा महत्त्व रहा है, चाहे वो राधा और अथवा रुक्मिणी। श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम विदर्भ देश की कन्या रुक्मिणी से विवाह किया जो उनकी पटरानी बनी। इसके अतिरिक्त उनकी दो और प्रमुख पत्नियाँ थी - जांबवंती एवं सत्यभामा। श्रीकृष्ण की मुख्य रानियों की संख्या ८ बताई गयी है। जब उन्होंने नरकासुर का वध किया तो उसके कैद में १६१०० स्त्रियाँ थी। उन अपहृत स्त्रियों का ना कोई परिवार था और ना ही कोई ठिकाना। तब उनके उद्धार के लिए उन्होंने उन सभी १६१०० स्त्रियों को भी अपनी पत्नियों का पद प्रदान किया।

सोमवार, अक्तूबर 01, 2012

शरभ अवतार

भगवान विष्णु के वराह अवतार द्वारा अपने भाई हिरण्याक्ष के वध के पश्चात ब्रह्मा से वरदान पा उसके बड़े भाई हिरण्यकशिपु के अत्याचार हद से अधिक बढ़ गए। सारी सृष्टि त्राहि-त्राहि करने लगी। जहाँ एक ओर हिरण्यकशिपु संसार से धर्म का नाश करने पर तुला हुआ था, वही उसका अपना पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन था। हिरण्यकश्यप जब किसी भी तरह प्रह्लाद को नहीं समझा सका तो उसने उसे कई बार मारने का प्रयत्त्न किया किन्तु प्रह्लाद हर बार भगवान विष्णु की कृपा से बच गया। यहाँ तक कि इस प्रयास में उसकी बहन होलिका भी मृत्यु को प्राप्त हो गयी। अंत में जब वो स्वयं प्रह्लाद को मारने को तत्पर हुआ तो अपने भक्त की रक्षा के लिए भगवान विष्णु स्वयं नृसिंह अवतार में प्रकट हुए।

शुक्रवार, सितंबर 07, 2012

प्रमुख नाग कुल

पुराणों के अनुसार महर्षि कश्यप ने प्रजापति दक्ष की १७ कन्याओं से विवाह किया और उनसे ही सभी जातियों की उत्पत्ति हुई। इसके बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ें। कश्यप एवं उनकी की पत्नी क्रुदु से नाग जाति (नाग और सर्प जाति अलग-अलग है) की उत्पत्ति हुई जिसमे नागों के आठ प्रमुख कुल चले। इनका वर्णन नीचे दिया गया है:

सोमवार, जुलाई 30, 2012

विभिन्न व्यूह रचना

२१ जुलाई २०१२, ठीक अपने जन्मदिन के दिन मैं अपने एक मित्र प्रशांत साहू के साथ हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भ्रमण के लिए गया था। वहाँ विज्ञान भवन में एक पूरा हिस्सा महाभारत को समर्पित था। वही मैंने महाभारत में प्रयोग किये गए इन व्यूहों का चित्र देखा। वैसे तो इसका चित्र लेना प्रतिबंधित था किन्तु फिर मैंने जब सुरक्षा अधिकारीयों को धर्मसंसार के बारे में बताया तब उन्होंने इन चित्रों को लेने की अनुमति दे दी। दुर्भाग्य से उस समय मेरा मोबाइल कैमरा बहुत अच्छा नहीं था और अँधेरा भी बहुत था, इसी लिए चित्र बहुत साफ़ नहीं आये हैं किन्तु काम चलाने लायक तो हैं। मैं कुरुक्षेत्र विज्ञान भवन प्रबंधन का हार्दिक धन्यवाद करता हूँ। उसी जगह अति प्राचीन विश्व के नक्शों पर भारत की स्थिति का चित्र मिला था जिसे आप यहाँ देख सकते हैं।

बुधवार, जुलाई 25, 2012

अति प्राचीन विश्व के नक्शों पर भारत

२१ जुलाई २०१२, ठीक अपने जन्मदिन के दिन मैं अपने एक मित्र प्रशांत साहू के साथ हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भ्रमण के लिए गया था। वहाँ विज्ञान भवन में एक पूरा हिस्सा महाभारत को समर्पित था। वही मैंने इन दुर्लभ नक्शों को देखा। वैसे तो इसका चित्र लेना प्रतिबंधित था किन्तु फिर मैंने जब सुरक्षा अधिकारीयों को धर्मसंसार के बारे में बताया तब उन्होंने इन चित्रों को लेने की अनुमति दे दी। दुर्भाग्य से उस समय मेरा मोबाइल कैमरा बहुत अच्छा नहीं था और अँधेरा भी बहुत था, इसी लिए चित्र बहुत साफ़ नहीं आये हैं किन्तु काम चलाने लायक तो हैं। मैं कुरुक्षेत्र विज्ञान भवन प्रबंधन का हार्दिक धन्यवाद करता हूँ। इसी जगह मैंने महाभारत में प्रयोग किये गए व्यूहों का चित्र भी देखा जिसे आप यहाँ देख सकते हैं।

शनिवार, अप्रैल 28, 2012

युधिष्ठिर के बाद के राजाओं की सूची

महाभारत युद्ध के पश्चात् राजा युधिष्ठिर की ३० पीढ़ियों ने १७७० वर्ष ११ माह १० दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। परमपिता ब्रह्मा से युधिष्ठिर तक का वंश वर्णन पहले ही धर्मसंसार पर प्रकाशित किया जा चुका है। इसके बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ। 
  1. युधिष्ठिर: ३६ वर्ष
  2. परीक्षित: ६० वर्ष
  3. जनमेजय: ८४ वर्ष
  4. अश्वमेध: ८२ वर्ष
  5. द्वैतीयरम: ८८ वर्ष

रविवार, अप्रैल 22, 2012

जब दो ब्रह्मास्त्रों का सामना हुआ

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। कौरवों की ओर से केवल तीन महारथी हीं जीवित बचे थे - अश्वत्थमा, कृपाचार्य और कृतवर्मा। दुर्योधन की मृत्यु से दुखी अश्वत्थामा ने पांडवों को छल से मारने की प्रतिज्ञा की। उसने दुर्योधन को मरते हुए वचन दिया था कि जैसे भी हो वो पांचों पांडवों को अवश्य मार डालेगा। कृपाचार्य ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की पर अंततः उन्होंने भी उसका साथ देने की स्वीकृति भर दी।

मंगलवार, अप्रैल 10, 2012

जब शिव ने सती का त्याग किया

सभी लोग जानते हैं कि सती ने अपने पिता द्वारा शिव को यज्ञ में आमंत्रित न करने और उनका अपमान करने पर उसी यज्ञशाला में आत्मदाह कर लिया था लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इसकी भूमिका बहुत पहले हीं लिखी जा चुकी थी।

शुक्रवार, मार्च 23, 2012

महर्षि कश्यप से सम्पूर्ण जाति की उत्पत्ति

महर्षि कश्यप परमपिता ब्रह्मा के मानस पुत्र मरीचि के पुत्र थे, इस प्रकार वे ब्रह्मा के पोते हुए। महर्षि कश्यप ने ब्रह्मापुत्र प्रजापति दक्ष की १७ कन्याओं से विवाह किया। संसार की सारी जातियां महर्षि कश्यप की इन्ही १७ पत्नियों की संतानें मानी जाति हैं। इसी कारण महर्षि कश्यप की पत्नियों को लोकमाता भी कहा जाता है। प्रजापति दक्ष की सभी पुत्रियों और उनके पति के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ जाएँ। उनकी पत्नियों और उनसे उत्पन्न संतानों का वर्णन नीचे है:

मंगलवार, मार्च 06, 2012

महाभारत में १८ संख्या का महत्त्व

महाभारत कथा में १८ (अठारह) संख्या का बड़ा महत्त्व है। महाभारत की कई घटनाएँ १८ संख्या से सम्बंधित है। कुछ उदाहरण देखें: 
  • महाभारत का युद्ध कुल १८ दिनों तक हुआ था। 
  • कौरवों (११ अक्षौहिणी) और पांडवों (७ अक्षौहिणी) की सेना भी कुल १८ अक्षौहिणी थी।

महापुराण

महाभारत के बाद महर्षि व्यास की सबसे प्रमुख कृति पुराण ही मानी जाती है। महर्षि व्यास ने कुल १८ पुराण लिखे जिन्हे महापुराण भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य ऋषियों द्वारा लिखी गयी कृतियों को उप पुराण भी कहा जाता है। इन पुराणों में समाहित ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। जो भी ज्ञान पृथ्वी पर है वो सभी इन पुराणों में वर्णित है। मूलतः पुराणों को दो भागों में विभक्त किया जाता है:
  1. महापुराण: महर्षि व्यास द्वारा लिखित 
  2. उप पुराण: अन्य ऋषियों द्वारा लिखित