बुधवार, दिसंबर 21, 2011

युगों का वर्णन

हिन्दू धर्म में चतुर्युगी व्यवस्था है जिनमे चार युग होते हैं - सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। हिन्दू धर्म की काल गणना हमारे ग्रंथों की सबसे रोचक जानकारियों में से एक है। इसके विषय में जितना भी जाना जाये वो कम है। इसके अतिरिक्त आश्चर्यजनक रूप से हमारी सहस्त्रों वर्षों पुरानी गणना वैज्ञानिक रूप से बिलकुल सटीक बैठती है। आइये इस महत्वपूर्ण विषय को जानते हैं।
  • श्वास से एक विनाड़ी बनती है।
  • १० विनाडियों से एक नाड़ी बनती है।

बुधवार, सितंबर 21, 2011

महाजनपद

हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथों में १६ मुख्य साम्राज्यों का वर्णन मिलता है जिन्हे महाजनपद के नाम से जाना जाता था। इससे मिलते जुलते विवरण बौद्ध और जैन ग्रंथों में भी मिलते हैं। महाजनपद वास्तव में कई साम्राज्यों का समूह होता था जिसके अंतर्गत राज्यों के राजा महाजनपद के प्रमुख राजा के अधीन रहते थे। इनका राजनितिक महत्त्व बहुत अधिक था। आइये इसके बारे में कुछ जानते हैं:

सोमवार, सितंबर 05, 2011

अक्षौहिणी सेना

अक्षौहिणी प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था जिसका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है। किसी भी अक्षौहिणी सेना के चार विभाग होते थे:
  1. गज (हाँथी सवार)
  2. रथ (रथी)
  3. घोड़े (घुड़सवार)
  4. सैनिक (पैदल सिपाही)

प्राचीन भारत का नक्शा

मंगलवार, फ़रवरी 08, 2011

एकश्लोकी रामायण

।। आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनं
वैदेही हरणं, जटायु मरणं, सुग्रीव संभाषणं
बालि निर्दलं, समुन्द्र तरणं, लंकापुरी दाहनं
पश्चाद्रावण-कुम्भकरण हननं, एतद्धि रामायणं ।।