रविवार, अप्रैल 26, 2020

पौराणिक द्वीप - २: जम्बू द्वीप

पिछले लेख में आपने पौराणिक पृथ्वी की संरचना और ७ द्वीपों के विषय में पढ़ा था। इनमे से श्रेष्ठ है जम्बू द्वीप जिसके बारे में पुराणों में बहुत लिखा गया है। ब्रह्मपुराण में अध्याय १८ के श्लोक २१, २२ और २३ में जम्बुद्वीप की महत्ता का वर्णन है।

तपस्तप्यन्ति यताये जुह्वते चात्र याज्विन।
दानाभि चात्र दीयन्ते परलोकार्थ मादरात्।। (२१)

मंगलवार, अप्रैल 21, 2020

पौराणिक द्वीप - १: परिचय

आज आधुनिक विज्ञान ने बहुत उन्नति कर ली है और पृथ्वी के बारे में विस्तृत जानकारी हमारे पास है। हम सभी को पता है कि आज के युग में पृथ्वी को ७ महाद्वीपों में बंटा गया है। लेकिन क्या आपको पता है कि उसका आधार कैसे पड़ा? क्यों हम पृथ्वी को केवल ७ महाद्वीपों में ही बांटते हैं? उसका कारण ये है कि सप्तद्वीपों की विचारधारा आधुनिक नहीं है बल्कि हमारे हिन्दू धर्म में इसकी अवधारणा प्राचीन काल से चली आ रही है। आपको कदाचित ये पता नहीं होगा कि जो विश्व का नक्शा आज हमारे पास है वो भी महर्षि वेदव्यास की ही देन है। खैर उसके बारे में कभी और चर्चा करेंगे।

शुक्रवार, अप्रैल 17, 2020

मंदोदरी - २: सतीत्व

पिछले लेख में आपने मंदोदरी के पिछले जन्म की कथा पढ़ी और किस प्रकार उसका विवाह रावण के साथ हुआ। रावण से विवाह के बाद मंदोदरी लंका की महारानी बनी जो रावण ने अपने सौतेले भाई कुबेर से युद्ध में छीना था। मंदोदरी स्वयं विदुषी थी और कहा जाता है कि वो प्रायः राज-काज चलाने में रावण की सहायता करती थी। रावण को मंदोदरी से मेघनाद, प्रहस्त और अक्षयकुमार नामक तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुए।

सोमवार, अप्रैल 13, 2020

मंदोदरी - १: पूर्वजन्म

मंदोदरी मय दानव और हेमा नामक अप्सरा की पुत्री और रावण की पट्टमहिषी थी। इन्हे पञ्चसतियों में से एक माना जाता है। कई ग्रंथों का कहना है कि मय दानव केवल इनके दत्तक पिता थे और मय और हेमा ने केवल मंदोदरी का पालन पोषण किया। इस विषय में भी विद्वानों में मतभेद है। इस कथा के पीछे मंदोदरी के पूर्वजन्म की एक बड़ी अनोखी कथा है।

गुरुवार, अप्रैल 09, 2020

रावण का मानमर्दन - ४: वानरराज बाली

रावण के मानमर्दन श्रृंखला की ये चौथी कथा है। इसे पहले आप दैत्यराज बलि, असुरराज शंभर और कर्त्यवीर्य अर्जुन (सहस्त्रार्जुन) के हाथों रावण की पराजय का लेख पढ़ चुके हैं। इस लेख में हम उस चौथे योद्धा का वर्णन करेंगे जिसके हाथों रावण को अपमानजनक पराजय का स्वाद चखना पड़ा था। वो योद्धा था इंद्रपुत्र और किष्किंधा का राजा वानरराज बाली। कथा तब की है जब बाली के बल और शौर्य का डंका पूरे विश्व में बज रहा था। उस पर बाली ने उस दुदुम्भी, जिससे लड़ने को स्वयं समुद्र और हिमवान ने भी मना कर दिया था, केवल एक प्रहार में ही वध कर दिया था और उसके विशाल शव को अपने हाथों में उठा कर १ योजन दूर फेक दिया था। यही कारण था कि विश्व का कोई भी योद्धा उससे लड़ने का साहस नहीं जुटा पाता था।

शनिवार, अप्रैल 04, 2020

ययाति पुत्री माधवी - ३: शोषण

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस प्रकार गरुड़ और ऋषि गालव श्यामकर्ण अश्व को ढूंढते हुए एक योगिनी शाण्डिली के पास पहुँचे। शाण्डिली ने उनकी सहायता की और उन्हें चक्रवर्ती सम्राट ययाति के पास जाने का सुझाव दिया। दोनों ययाति के पास पहुँचे और उनसे सहायता की मांग की। तब ययाति ने अपनी अद्वितीय सुंदरी कन्या माधवी उन दोनों को प्रदान की ताकि वे उसका विवाह करवा कर श्यामकर्ण अश्व प्राप्त कर सकें। 

माधवी को लेकर गालव और गरुड़ सर्वप्रथम अयोध्या के राजा हर्यश्व के पास पहुँचे। उन्होंने उनसे कहा कि "हे राजन! किसी कार्यवश हमें ८०० श्यामकर्ण अश्व की आवश्यकता है। इसके बदले महाराज ययाति की ये सुन्दर कन्या आपका वरण करेगी। आज संसार में इससे सुन्दर और शीलवती कन्या नहीं है। अतः आप इस श्रेष्ठ कन्या को पत्नी के रूप में वरण करें और हमें ८०० श्यामकर्ण अश्व प्रदान करें।"