गुरुवार, नवंबर 26, 2020

अस्त्र एवं शस्त्र में अंतर


आज से हम अस्त्र-शस्त्रों पर एक श्रृंखला आरम्भ कर रहे हैं। आम तौर पर हम अस्त्र एवं शस्त्र का उपयोग एक ही पर्यायवाची के रूप में करते हैं जैसा कि हमने पहले वाक्य में किया, किन्तु वास्तव में इन दोनों में अंतर होता है। दोनों ही आयुध हैं और दोनों का ही प्रयोग शत्रु को हताहत करने के लिए किया जाता है, किन्तु इनके उपयोग की विधि अलग-अलग है। इससे पहले कि हम विभिन्न प्रकार के अस्त्र एवं शस्त्रों के विषय में जानें, हमें ये ज्ञान होना आवश्यक है कि वास्तव में ये दोनों होते क्या हैं। इस लेख में हम इन दोनों के बीच का मूल अंतर समझेंगे।

गुरुवार, नवंबर 19, 2020

नवगुंजर अवतार


वैसे तो भगवान विष्णु के मुख्य १० (दशावतार) एवं कुल २४ अवतार माने गए हैं किन्तु उनका एक ऐसा अवतार भी है जिसके विषय में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है और वो है नवगुंजर अवतार। ऐसा इसलिए है क्यूंकि इस अवतार के विषय में महाभारत या किसी भी पुराण में कोई वर्णन नहीं है। केवल उड़ीसा के लोक कथाओं में श्रीहरि के इस विचित्र अवतार का वर्णन मिलता है। वहाँ नवगुंजर को श्रीकृष्ण का अवतार भी माना जाता है। आइये इस विशिष्ट अवतार के विषय में कुछ जानते हैं।

शुक्रवार, नवंबर 13, 2020

धन्वन्तरि


आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनायें। धनतेरस पर एक लेख पहले ही धर्मसंसार पर प्रकाशित हो चुका है जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। ये पर्व देव धन्वन्तरि के सम्मान में मनाया जाता है। इस दिन स्वर्ण खरीदने की प्रथा है और ऐसी मान्यता है कि आज के दिन खरीदे गए स्वर्ण में १३ गुणी वृद्धि हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन ही धन्वन्तरि की उत्पत्ति हुई थी। विष्णु पुराण एवं आयुर्वेद में इनका बड़ा महत्त्व बताया गया है। आइये हम धन्वन्तरि देव के विषय में कुछ जानें:

सोमवार, नवंबर 02, 2020

भगवान विष्णु के सभी अवतार भारत में ही क्यों होते हैं?


हम सभी भगवान विष्णु के दशावतार के विषय में जानते हैं। उस विषय में एक प्रश्न हमेशा आता है कि ऐसा क्या कारण है कि भगवान विष्णु के सभी अवतार भारत में ही क्यों होते हैं? श्रीहरि तो समस्त विश्व के स्वामी हैं फिर किसी अन्य भूभाग में वे वतरित क्यों नहीं होते? इस प्रश्न का उत्तर श्री विष्णु पुराण में दिया गया है। किन्तु इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे के वंश वर्णन को देखना होगा। आइये इसे समझते हैं।

शनिवार, अक्तूबर 24, 2020

नवदुर्गा


आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें। वैसे तो धर्म संसार पर माता दुर्गा, अष्टमातृका एवं दश महाविद्या पर लेख पहले से लिखा जा चुका है किन्तु इस नवरात्रि सोचा कि एक लेख माता के उन ९ रूपों पर भी लिखा जाये जिस कारण नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस लेख में सभी ९ देवियों का संक्षिप्त विवरण विवरण दिया जायेगा। उन सभी पर विस्तृत लेख बाद में प्रकाशित किया जाएगा।

शनिवार, अक्तूबर 17, 2020

भक्तराज ध्रुव


इस संसार में भगवान श्रीहरि के जितने अनन्य भक्त हुए हैं, ध्रुव उनमें से अग्रगणी हैं। विष्णु पुराण एवं भागवत पुराण में इनके विषय में विस्तार से लिखा गया है। ब्रह्मा के पुत्र स्वयंभू मनु हुए जिन्होंने माता शतरूपा से विवाह किया। दोनों की ५ संतानें हुई। २ पुत्र - प्रियव्रत एवं उत्तानपाद और तीन पुत्रियां - आकूति, देवहुति एवं प्रसूति। महाराज मनु ने अपना राज्य अपने दोनों पुत्रों में बाँट दिया। उत्तानपाद ने दो कन्याओं से विवाह किया - सुनीति एवं सुरुचि। बड़ी रानी सुनीति के गर्भ से ही ध्रुव का जन्म हुआ। छोटी रानी सुरुचि को उत्तम नामक एक पुत्र प्राप्त हुआ।

मंगलवार, अक्तूबर 13, 2020

१६ कलाएं


आप सब ने प्रायः भगवान विष्णु की १६ कलाओं के विषय में सुना होगा। रामायण और महाभारत में ये वर्णित है कि भगवान श्रीराम भगवान विष्णु की १२ कलाओं के साथ जन्में थे और श्रीकृष्ण १६ कलाओं के साथ। वैसे तो श्रीहरि अनंत हैं किन्तु मनुष्य रूप में उनकी कुल १६ कलाएं मानी गयी हैं। उनका जो कोई भी अवतार उनकी जितनी भी कलाओं के साथ जन्मता है वो उनके उतने ही समकक्ष माना जाता है। यही कारण है कि श्रीकृष्ण को पूर्णावतार कहते हैं क्यूंकि वे श्रीहरि की सभी १६ कलाओं के साथ जन्में थे। श्रीहरि के अंतिम अवतार भगवान कल्कि उनकी ४ कलाओं के साथ अवतरित होंगे।