अद्भुत रामायण - एक अजीब रामायण

अद्भुत रामायण - एक अजीब रामायण
वैसे तो वाल्मीकि रामायण के कई संस्करण हैं जिनमें से सबसे प्रमुख है गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री रामचरितमानस। इसके अतिरिक्त भी आनंद रामायण, कम्ब रामायण, अध्यात्म रामायण आदि अनेक संस्करण हैं। इन्ही संस्करणों में से जो सबसे अलग संस्करण है वो है अद्भुत रामायण। जैसा कि इसका नाम है, इस रामायण में ऐसी ऐसी अद्भुत घटनाएं हैं जिसपर विश्वास करना बहुत कठिन है।

महर्षि रुरु और प्रमद्वरा की कथा

महर्षि रुरु और प्रमद्वरा की कथा
आज वट सावित्री का पर्व है। सावित्री के पात्रिव्रत के विषय में हमने एक लेख पहले ही प्रकाशित किया है जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। सावित्री और उन जैसे अनेकों पतिव्रताओं की कथा से हमारे ग्रन्थ भरे पड़े हैं पर आज हम आपको एक ऐसे पुरुष की कथा सुनाते हैं जिन्होंने अपने मृत पत्नी के प्राण यमराज की कृपा से वापस प्राप्त किये।

भरत किस मार्ग से अयोध्या से कैकेय गए और किस मार्ग से वापस आये?

भरत किस मार्ग से अयोध्या से कैकेय गए और किस मार्ग से वापस आये?
ये तो हम सभी जानते हैं कि रामायण में श्रीराम के राज्याभिषेक से पहले ही भरत और शत्रुघ्न अपने ननिहाल कैकेय देश चले गए थे। बाद में जब महाराज दशरथ की मृत्यु हुई तो गुरु वशिष्ठ ने दूतों को कैकेय देश भेजा ताकि वे भरत और शत्रुघ्न को वापस ले कर आ सकें। जिस मार्ग से दूत कैकेय पहुंचे और जिस मार्ग से भरत और शत्रुघ्न सेना सहित वापस आये, उसका विस्तृत वर्णन रामायण में दिया गया है।

श्रीराम द्वारा किया गया अद्भुत दान

श्रीराम द्वारा किया गया अद्भुत दान
वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड में जब श्रीराम के वनवास जाने का प्रसग आता है तो वन जाने से पहले वो पाना समस्त व्यक्तिगत धन ब्राह्मणों और अन्य जनता में बाँट देते हैं। यहाँ पर श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि "हे लक्ष्मण! मेरा ये जो धन है इसे मैं तुम्हारे साथ रहकर तपस्वी ब्राह्मणों में बाँटना चाहता हूँ। इसलिए जो भी श्रेष्ठ ब्राह्मण यहाँ हैं, उनको तथा उनके आश्रितों को मेरे पास लेकर आओ।

क्या लक्ष्मण वास्तव में १४ वर्षों तक नहीं सोये थे

क्या लक्ष्मण वास्तव में १४ वर्षों तक नहीं सोये थे
आज कल एक कथा बड़ी प्रचलित है कि मेघनाद को केवल वही व्यक्ति मार सकता था जो १४ वर्षों से ना सोया हो। कुछ लोग इसे एक कदम और आगे बढ़ा देते हैं और कहते हैं कि ना सिर्फ १४ वर्षों तक सोया ना हो बल्कि १४ वर्षों से भोजन भी ना किया हो।

कांजीरोट्टु यक्षिणी

कांजीरोट्टु यक्षिणी
कुछ समय पहले हमने यक्षिणियों एवं पद्मनाभ स्वामी मंदिर के रहस्य पर एक लेख प्रकाशित किया था। इन दोनों में हमने कांजीरोट्टू नामक एक यक्षिणी के विषय में बताया था। इस यक्षिणी की मान्यता दक्षिण भारत, विशेषकर केरल और तमिलनाडु में बहुत है और वहाँ इसकी कई लोक कथाएं भी प्रचलित हैं।

वानरराज वाली कितने शक्तिशाली थे?

वानरराज वाली कितने शक्तिशाली थे?
वानरराज वाली के विषय में तो हम सभी जानते ही हैं। उनका बल सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध था। रामायण के किष्किन्धा काण्ड सर्ग ११ में महर्षि वाल्मीकि ने वाली के बल का विस्तार से वर्णन किया है। इस सर्ग में श्रीराम के पूछने पर सुग्रीव वाली के बल के बारे में बताते हैं।