शनिवार, मई 23, 2020

आदि शंकराचार्य - १: वास्तविक शंकराचार्य कौन हैं?

हिन्दू धर्म के महान प्रवर्तक जगतगुरु आदि शंकराचार्य को कौन नहीं जनता? किन्तु अगर मैं कहूँ कि हममें से अधिकतर लोग उनके विषय में सत्य नहीं जानते तो आपको आश्चर्य होगा। किन्तु सत्य यही है कि आदि शंकराचार्य के विषय में जो मिथ्या और भ्रामक जानकारी उपलब्ध है उसे ही अधिकतर हिन्दू जानते और मानते हैं। सबसे अधिक मिथक तो इनके जन्म का समय है जो इन्हे ८वीं सदी का विद्वान बताता है किन्तु सत्य ये नहीं है। तो आइये आदि शंकराचार्य के विषय में कुछ जानने से पहले अपने मन पर जमी अज्ञानता की धूल हम हटा लें।

रविवार, मई 17, 2020

पौराणिक द्वीप - ४: शाल्मल द्वीप

पिछले लेख में आपने प्लक्ष द्वीप के विषय में पढ़ा। अब हम शाल्मल द्वीप के विषय में कुछ जानते हैं।
  • शाल्मल द्वीप विस्तार में प्लक्ष द्वीप से दुगना है।
  • इस द्वीप के स्वामी पवुष्मान हैं जिनके सात पुत्र इस द्वीप के सातों वर्षों पर राज्य करते हैं। 

सोमवार, मई 11, 2020

पौराणिक द्वीप - ३: प्लक्ष द्वीप

पिछले लेख में आपने जम्बू द्वीप के बारे में विस्तार से पढ़ा। इस लेख में हम प्लक्ष द्वीप के विषय में विस्तार से चर्चा करेंगे। आइये प्लक्ष द्वीप के बारे में कुछ अद्भुत तथ्य जानते हैं: 
  • प्लक्ष द्वीप का विस्तार जम्बू द्वीप से दूना है जो जम्बू द्वीप को चारो ओर से घेरे है और स्वयं चारो ओर से इक्षुरस (गन्ने के रस) सागर से घिरा हुआ है। 
  • विष्णु पुराण के अनुसार प्लक्ष द्वीप का विस्तार २००००० (दो लाख) योजन है। 

मंगलवार, मई 05, 2020

महर्षि व्यास के अनुसार पृथ्वी की संरचना

अगर हम पृथ्वी की संरचना और नक़्शे की बात करें तो अलग-अलग देशों में अपने-अपने मत हैं। रोम के वासियों का मानना था कि पृथ्वी का पहला नक्शा उन्होंने ही बनाया था। ऐसा ही कुछ प्राचीन ग्रीक और इजिप्ट के निवासी कहा करते थे। फ्रेंच और पुर्तगाली वासी आधुनिक विश्व के नक़्शे को अपना बताने का कोई मौका नहीं चूकते। पर क्या आपको ज्ञात है कि जिस विश्व की परिकल्पना हमने कुछ सौ वर्षों पहले की है उसके बारे में हमारे धर्मग्रंथों में पहले से ही बता दिया गया था।

शुक्रवार, मई 01, 2020

सीता लेखनी

हम सबने ब्राह्मी एवं देवनागरी लिपि के बारे में बहुत पढ़ा है किन्तु क्या आपने कभी "शंख लिपि" के विषय में सुना है? ऐसी मान्यता है कि शंख लिपि देवनागरी से भी प्राचीन लिपि थी जिसका ज्ञान दुर्भाग्य से आगे आने वाली पीढ़ियों को नहीं मिल पाया और इसी कारण ये लिपि पूर्णतः लुप्त हो गयी। इस लिपि का काल त्रेतायुग के अंत समय का बताया जाता है। वैसे तो ब्राह्मी लिपि को शंख लिपि से भी प्राचीन माना जाता है किन्तु सौभाग्य से ब्राह्मी लिपि का देवनागरी लिपि में अनुवाद कर लिया गया है। तो ब्राह्मी दुर्लभ तो है किन्तु लुप्त नहीं। पर कदाचित शंख लिपि उतनी भाग्यशाली नहीं रह पायी।

रविवार, अप्रैल 26, 2020

पौराणिक द्वीप - २: जम्बू द्वीप

पिछले लेख में आपने पौराणिक पृथ्वी की संरचना और ७ द्वीपों के विषय में पढ़ा था। इनमे से श्रेष्ठ है जम्बू द्वीप जिसके बारे में पुराणों में बहुत लिखा गया है। ब्रह्मपुराण में अध्याय १८ के श्लोक २१, २२ और २३ में जम्बुद्वीप की महत्ता का वर्णन है।

तपस्तप्यन्ति यताये जुह्वते चात्र याज्विन।
दानाभि चात्र दीयन्ते परलोकार्थ मादरात्।। (२१)

मंगलवार, अप्रैल 21, 2020

पौराणिक द्वीप - १: परिचय

आज आधुनिक विज्ञान ने बहुत उन्नति कर ली है और पृथ्वी के बारे में विस्तृत जानकारी हमारे पास है। हम सभी को पता है कि आज के युग में पृथ्वी को ७ महाद्वीपों में बंटा गया है। लेकिन क्या आपको पता है कि उसका आधार कैसे पड़ा? क्यों हम पृथ्वी को केवल ७ महाद्वीपों में ही बांटते हैं? उसका कारण ये है कि सप्तद्वीपों की विचारधारा आधुनिक नहीं है बल्कि हमारे हिन्दू धर्म में इसकी अवधारणा प्राचीन काल से चली आ रही है। आपको कदाचित ये पता नहीं होगा कि जो विश्व का नक्शा आज हमारे पास है वो भी महर्षि वेदव्यास की ही देन है। खैर उसके बारे में कभी और चर्चा करेंगे।