गुरुवार, सितंबर 23, 2021

संस्कृत भाषा का चमत्कार

कुछ समय पहले मुझे एक जानकारी प्राप्त हुई थी जिसमें संस्कृत भाषा का अद्भुत प्रयोग किया गया था। इसमें एक शब्द को विस्तारित कर विभिन्न चरित्रों के साथ जोड़ा गया था। मैंने सोचा कि इसे आप सभी के साथ साझा करना आवश्यक है ताकि हम सभी संस्कृत भाषा के अद्भुत उपयोग को देख सकें। ऐसा प्रयोग संसार की किसी भी अन्य भाषा के साथ करना असंभव है। आप स्वयं देखिये।

गुरुवार, सितंबर 09, 2021

केवल भगवान विष्णु के साथ ही "श्री" क्यों लगाया जाता है?

आप सभी ने ये ध्यान दिया होगा कि जब भी हम भगवान विष्णु और उनके अवतारों के विषय में बात करते हैं तो हम उनके आगे "श्री" शब्द लगाते हैं, जैसे श्रीहरि, श्रीराम, श्रीकृष्ण इत्यादि। किन्तु ऐसा हम भगवान ब्रह्मा, महादेव अथवा अन्य देवताओं के साथ नहीं करते। तो क्या इसका अर्थ ये है कि श्री बोल कर भगवान विष्णु को सम्मान दिया जाता है और अन्य देवताओं को नहीं? ऐसा बिलकुल भी नहीं है। आइये इसे समझते हैं।

गुरुवार, सितंबर 02, 2021

रावण का परिवार

रावण के विषय में तो हम सभी जानते ही हैं, किन्तु रावण के परिवार के विषय में बहुत लोगों को अधिक जानकारी नहीं है। आज इस लेख में हम संक्षेप में रावण के परिवार के विषय में जानेंगे। ध्यान दें कि यहाँ केवल रावण के व्यक्तिगत परिवार का विवरण दिया जा रहा है। सम्पूर्ण राक्षस वंश के विषय में एक लेख हमने पहले ही प्रकाशित किया है जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

गुरुवार, अगस्त 26, 2021

हिन्दू धर्म के कुछ महान दानवीर

हिन्दू धर्म में दान का बहुत अधिक महत्त्व बताया गया है। जब भी हम दानवीरता की बात करते हैं तो हमारे मष्तिष्क में सहसा अंगराज कर्ण की तस्वीर बनती है। वे निःसंदेह दानवीर थे किन्तु हमारा हिन्दू धर्म तो दानवीरों से भरा पड़ा है। वैसे तो इतिहास में एक से बढ़ कर एक दानवीर हुए हैं किंतु कुछ दानवीर ऐसे हैं जिन्होंने दान की हर सीमा को पार कर दिया इसीलिए इनकी श्रेणी अन्य दानवीरों की अपेक्षा अलग ही बन गयी। आइये ऐसे ही कुछ दानवीरों के विषय में जानते हैं:

गुरुवार, अगस्त 19, 2021

कौरवों और पांडवों की आयु कितनी थी?

कौरवों और पांडवों की आयु के विषय मे बहुत संशय है। इसका कारण ये है कि मूल व्यास महाभारत में पांडवों या कौरवों की आयु का कोई सटीक विवरण नही दिया गया है। यदि अन्य ग्रंथों की बात की जाए तो भी उनमें दी गयी जानकारियों में बहुत असमानता दिखती है। कही कहा गया है कि युद्ध के समय युधिष्ठिर ९१ वर्ष के थे, कही ये आयु ४९ वर्ष की बताई गई है तो कहीं कुछ और। कहने का अर्थ ये है कि कोई भी सटीक रूप से इनकी आयु के बारे में नहीं बता सकता। यदि कोई ये कहता है कि उसे पांडवों अथवा कौरवों की सटीक आयु के विषय में पता है तो वो निश्चय ही असत्य कह रहा है।

गुरुवार, अगस्त 12, 2021

ऐसे कौन से पात्र हैं जो रामायण और महाभारत दोनों में पाए जाते हैं?

रामायण और महाभारत के बीच का कालखंड कितना कितना बड़ा है ये हम सभी जानते हैं। रामायण त्रेतायुग में और महाभारत द्वापर युग में हुआ बताया जाता है। पुराणों के अनुसार त्रेतायुग ३६०० दिव्य वर्षों एवं द्वापर युग २४०० दिव्य वर्षों का होता है। पौराणिक काल गणना और चतुर्युगी व्यवस्था के बारे में जानने के लिए यहाँ जाएँ। किन्तु कई पौराणिक चरित्र ऐसे हैं जिन्होंने बहुत लम्बी आयु प्राप्त की और रामायण और महाभारत, दोनों काल में उपस्थित रहे। आज हम ऐसे ही कुछ महापुरुषों के विषय में जानेंगे।

गुरुवार, अगस्त 05, 2021

क्या आप शूर्पणखा के पुत्र के विषय में जानते हैं?

लंकाधिपति रावण की बहन सूर्पणखा के विषय में तो हम जानते ही हैं। वो स्वेच्छिचारिणी थी जिसका विवाह विद्युज्जिह्व नामक दैत्य के साथ हुआ था। विद्युज्जिह्व कालकेयों के कुल से संबंधित था, जिसका वध रावण ने ही किया था। अलग-अलग पुराणों में उसके वध की अलग-अलग कथाएं मिलती हैं।

गुरुवार, जुलाई 29, 2021

क्या पांडवों के अतिरिक्त कर्ण का कोई और भाई था?

महारथी कर्ण के विषय में तो हम सभी जानते हैं। महाभारत में कदाचित सबसे संघर्षपूर्ण जीवन उन्ही का रहा है। स्वयं भगवान सूर्य नारायण के पुत्र होते हुए भी उन्हें सदैव सूतपुत्र की भांति जीना पड़ा। जहाँ एक ओर उनकी माता कुंती के पांचों पुत्र सम्मान और सुविधा के साथ जी रहे थे, कर्ण, कुंती के ज्येष्ठ पुत्र होते हुए भी उपेक्षित ही रहे। बचपन में कुंती द्वारा त्यागे जाने के बाद धृतराष्ट्र के सारथि अधिरथ और उनकी पत्नी राधा ने उन्हें गोद ले लिया और वे "राधेय" के नाम से प्रसिद्ध हुए।

गुरुवार, जुलाई 15, 2021

महावीर हनुमान को "बजरंग" क्यों बोलते हैं?

"बजरंग बली की जय"
- ये जयकारा आपको किसी भी हनुमान मंदिर में सबसे अधिक सुनने को मिल जाता है। जितना प्रसिद्ध उनका "हनुमान" नाम है, उतना ही प्रसिद्ध उनका एक नाम बजरंग बली भी है। उनके नाम "हनुमान का इतिहास तो हम जानते हैं, किन्तु क्या आप ये जानते हैं कि उन्हें "बजरंग" क्यों बुलाते हैं? मजेदार बात ये है कि आज शब्द "बजरंग", जो हमारी संस्कृति में घुल मिल गया है, वास्तव में मूल संस्कृत शब्द का अपभ्रंश है।

गुरुवार, जुलाई 01, 2021

क्या श्रीराम का पिनाक को भंग करना उचित था?

माता सीता के स्वयंवर के विषय में हम सभी जानते हैं। इसी स्वयंवर में श्रीराम ने उस पिनाक को सहज ही उठा कर तोड़ डाला जिसे वहाँ उपस्थित समस्त योद्धा मिल कर हिला भी ना सके। हालाँकि कई लोग ये पूछते हैं कि श्रीराम ने धनुष उठा कर स्वयंवर की शर्त तो पूरी कर ही दी थी, फिर उस धनुष को भंग करने की क्या आवश्यकता थी?