गुरुवार, अप्रैल 15, 2021

गांधार राज सुबल

महाराज सुबल गांधार के राजा थे और शकुनि एवं गांधारी के पिता थे। उन्हें गांधार के सबसे प्रसिद्ध एवं न्याय प्रिय राजाओं में से एक माना जाता है। सुबल का विवाह सुधर्मा नामक राजकुमारी से हुआ जिनसे उन्हें पाँच पुत्र एवं एक पुत्री की प्राप्ति हुई। हालाँकि इन पुत्र-पुत्रियों का वर्णन महाभारत और अन्य ग्रंथों में अलग-अलग है। महाभारत में सुबल का बहुत अधिक वर्णन नहीं दिया गया है किन्तु महाभारत पर आधारित कुछ अन्य ग्रंथों में सुबल के जीवन का कुछ विस्तार देखने को मिलता है।

गुरुवार, अप्रैल 08, 2021

श्री कष्टभंजन हनुमान

गुजरात के बोटाद जिले में भावनगर के पास एक गाँव सारंगपुर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ पर स्थति श्री कष्टभंजन हनुमान का मंदिर है। इन्हे सारंगपुर का सम्राट माना जाता है और लोग इन्हे "बड़े हनुमानजी" एवं "महाराजाधिराज" के नाम से भी जानते हैं। इस सुन्दर मंदिर में हनुमान जी एक स्वर्ण सिंहासन पर विद्यमान रहते हैं। हालाँकि उनका ये रूप उनके आम साधारण रूप से थोड़ा अलग है। स्वर्ण मंदिर में, स्वर्ण गदा धारण किये हुए कष्टभंजन हनुमान प्रत्येक दिन श्रृंगार के बाद बहुत मनोहारी लगते हैं।

गुरुवार, अप्रैल 01, 2021

युवनाश्व - श्रीराम के वो पूर्वज जिन्होंने पुरुष होते हुए भी गर्भ धारण किया

आज के आधुनिक युग में हम नए नए अविष्कार कर रहे हैं। विगत कुछ वर्षों से ये बात सिद्ध हो चुकी है कि ऐसी कई/अधिकतर चीजें जो आज हम बना रहे हैं, उसका वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में पहले ही दे दिया गया था। ये इस बात को सिद्ध करता है कि सनातन हिन्दू धर्म ना केवल अति-प्राचीन है अपितु बहुत वैज्ञानिक भी। आज हम जो सेरोगेसी की बात करते हैं वो सदियों पहले महाभारत में वर्णित था। उसी प्रकर आज के वैज्ञानिक इस बात पर भी शोध कर रहे हैं कि क्या पुरुष कृत्रिम रूप से गर्भ धारण कर सकते हैं? आज की ये कथा इसी बात का उत्तर है।

बुधवार, मार्च 24, 2021

महाकुंभ

हम सभी जानते हैं कि वर्तमान में हरिद्वार में कुंभ पर्व मनाया जा रहा है।सत्य सनातन धर्म में कुंभ पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। पुराणों के अनुसार हिमालय के उत्तर में क्षीरसागर है, जहां देवासुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। मंथन दंड था- मंदर पर्वत, रज्जु था वासुकि तथा स्वयं विष्णु ने कूर्म रूप में मंदर को पीठ पर धारण किया था। समुद्र मंथन के समय क्रमश: पुष्पक रथ, ऐरावत, परिजात पुष्प, कौस्तुभ, सुरभि, अंत में अमृत कुंभ को लेकर स्वयं धन्वंतरि प्रकट हुए थे।

गुरुवार, मार्च 18, 2021

श्री कुक्के सुब्रमण्य

जब आप कर्णाटक के मैंगलोर जिले के सुल्लिया तालुका में पहुँचते हैं तो जो सबसे प्रसिद्ध नाम आपको सुनाई देता है वो है सुब्रमण्यम नामक गाँव का। वो इस कारण कि इस गाँव में श्री कुक्के सुब्रमण्य का दर्शनीय मंदिर स्थित है। ना केवल आस पास के इलाकों में अपितु पूरे कर्णाटक में ये स्थान सर्प दोषों के निवारण हेतु सबसे उत्तम स्थान माना जाता है। नाग वैसे ही हिन्दू धर्म में अपना अलग स्थान रखते हैं और उनके प्रति समर्पित होने के कारण ही इस मंदिर की अपनी एक अलग विशेषता है।