रावण का पुत्र मेघनाद हिन्दू धर्म के सबसे दुर्धुष एवं प्रसिद्ध योद्धाओं में से एक है। इतिहास में कदाचित वही एक योद्धा है जिसे अतिमहारथी होने का गौरव प्राप्त है। आम तौर पर लोगों को ऐसा लगता है कि मेघनाद ही एकमात्र ऐसा योद्धा है जो कभी पराजित नहीं हुआ। हालाँकि ये बात सच है कि मेघनाद निःसंदेह एक अभूतपूर्व योद्धा था किन्तु फिर भी वो अपराजेय नहीं था।
कौन हैं वास्तु पुरुष?
बरसों से जब भी हम अपने घर का निर्माण करना चाहते हैं तो जो सबसे पहले जो एक चीज हमारे ध्यान में रहती है वो है वास्तु। वास्तु शास्त्र को कई लोग आधुनिक विज्ञान मानते हैं किन्तु इसका इतिहास बहुत पुराना है। वास्तु जो शब्द है वो हिन्दू धर्म के एक देवता "वास्तु देव" के ऊपर पड़ा है। वास्तु शास्त्र का पूरा विज्ञान वास्तु देव की स्थिति को ध्यान में रख कर ही गढ़ा गया है। किन्तु आखिर ये वास्तु देव हैं कौन हैं?
वनवास के समय द्रौपदी के पुत्र कहाँ थे?
महाभारत में द्युत के खेल के पश्चात पांडवों को १२वर्ष का वनवास और १ वर्ष का अज्ञातवास मिला। वनवास के लिए पांचों पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ निकले। उन्होंने अपनी वृद्ध माता को वन ले जाना उचित नहीं समझा इसीलिए कुंती हस्तिनापुर में ही रुकी। इसके अतिरिक्त पांडवों के पुत्र भी छोटी अवस्था में होने के कारण वन को नहीं गए।
क्या कभी माता सीता का स्वयंवर हुआ था?
भगवान श्रीराम और माता सीता का स्वयंवर हिन्दू धर्म के सबसे प्रसिद्ध स्वयंवरों में से एक है। श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने सीता स्वयंवर का बहुत विस्तृत और सुन्दर वर्णन किया है। मानस के अनुसार संक्षेप में कथा ये है कि महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण जनकपुरी में आते हैं। पुष्प वाटिका में श्रीराम और सीताजी एक दूसरे का दर्शन करते हैं। फिर माता सीता के स्वयंवर का आयोजन होता है।
क्या शकुनि ने जुए में छल किया था?
द्यूत क्रीड़ा महाभारत के सबसे दारुण घटनाओं में से एक है। इसी सभा में द्रौपदी का अपमान किया गया था और यही वो घटना थी जिसने महाभारत के युद्ध को निश्चित कर दिया था। जब भी द्यूत क्रीड़ा की बात होती है तो शकुनि का नाम सबसे पहले आता है। ये बात जनमानस में प्रसिद्ध है कि उस खेल को जीतने के लिए शकुनि ने छल किया था। किन्तु क्या ये बात सही है? आइये जानते हैं।
महर्षि अंगिरा का वंश
महर्षि अंगिरा (अंगिरस) परमपिता ब्रह्मा के पुत्र एवं प्रथम स्वयंभू मन्वन्तर में सप्तर्षियों में से एक हैं। इन्ही के पुत्र देवगुरु बृहस्पति हुए। हालाँकि इनके वंश का बहुत विस्तार से वर्णन हमें महाभारत के वनपर्व में मिलता है जब महर्षि मार्कण्डेय युधिष्ठिर को महर्षि अंगिरा और उनके वंश के विषय में बताते हैं। ये वंश मुख्यतः महर्षि अंगिरा और अग्नि से सम्बंधित है।
वाल्मीकि रामायण की पूरी संरचना (सम्पूर्ण कांड, सर्ग और श्लोक)
- कुल कांड: ७
- कुल मूल सर्ग: ६४२
- कुल प्रक्षिप्त सर्ग: ३
- कुल सर्ग: ६४५
- कुल मूल श्लोक: २३६४४
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