सोमवार, जनवरी 11, 2021

नटराज के पैरों के नीचे कौन दबा रहता है?


हम सभी ने भगवान शिव के नटराज रूप को कई बार देखा है। किन्तु क्या आपने ध्यान दिया है कि नटराज की प्रतिमा के पैरों के नीचे एक दानव भी दबा रहता है? आम तौर पर देखने से हमारा ध्यान उस राक्षस की ओर नहीं जाता किन्तु नटराज की मूर्ति के दाहिने पैर के नीचे आपको वो दिख जाएगा। क्या आपको पता है कि वास्तव में वो है कौन? आइये आज इस लेख में हम उस रहस्य्मयी दानव के विषय में जानते हैं।

मंगलवार, जनवरी 05, 2021

श्रुति एवं स्मृति क्या है?


हिन्दू धर्म में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक है कि अति प्राचीन होने के बाद भी हिन्दू धर्म के धर्मग्रंथों में लिखे ज्ञान को सुरक्षित कैसे रखा गया। यदि हम आधुनिक काल गणना की भी बात करें तो महाभारत का कालखंड ७००० वर्ष एवं रामायण का कालखंड १४००० वर्ष पूर्व का बताया गया है। हिन्दू धर्म के सबसे प्राचीन ग्रंथ वेदों को लगभग २८००० वर्ष प्राचीन बताया जाता है। अब प्रश्न ये है कि ये सारे धर्मग्रन्थ तो आज भी हमारे पास हैं। फिर इस अथाह ज्ञान को इतने लम्बे समय तक किस प्रकार संचित किया गया? आइये इसे समझते हैं।

सोमवार, दिसंबर 28, 2020

"ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी" - तुलसीदास जी के इस दोहे का वास्तविक अर्थ


ढोल, गंवार, शूद्र, पशु नारी।
सकल ताड़ना के अधिकारी।।

गोस्वामी तुलसीदास रचित महान ग्रन्थ श्रीरामचरितमानस में वर्णित इस एक दोहे को लेकर बहुत प्रश्न उठाये जाते है। विशेषकर "शूद्र" एवं "नारी" शब्द को लेकर वामपंथियों और छद्म नारीवादियों ने इसे तुलसीदास और मानस के विरुद्ध एक शस्त्र बना रखा है। प्रश्न ये है कि क्या वास्तव में गोस्वामी तुलसीदास जैसा श्रेष्ठ व्यक्ति शूद्रों एवं नारियों के विषय में ऐसा लिख सकता है? आइये इसे समझते हैं।

रविवार, दिसंबर 20, 2020

क्यों दिया माता सीता ने गौ माता को श्राप?


मूल वाल्मीकि रामायण की कथाओं के अतिरिक्त भी कई ऐसी कथाएं हैं जो जनमानस में लोक कथाओं के रूप में प्रसिद्ध हैं। ऐसी ही एक कथा में ऐसा वर्णन है जब माता सीता ने गौ माता, फल्गू नदी एवं केतकी के पुष्प को श्राप दिया था। देश के कई राज्य, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश में ये कथा बहुत प्रसिद्ध है।

सोमवार, दिसंबर 14, 2020

महास्त्र


पिछले लेख
  में आपने प्रमुख दिव्यास्त्रों के विषय में पढ़ा था। इस लेख में हम उन कुछ विशेष दिव्यास्त्रों के विषय में बात करेंगे जो त्रिदेवों से सम्बंधित हैं और सबसे अधिक शक्तिशाली माने जाते हैं, जिन्हे हम महास्त्र कहते हैं। आम तौर पर हम त्रिदेवों के दिव्यास्त्रों में ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र एवं पाशुपतास्त्र के बारे में जानते हैं किन्तु वास्तव में त्रिदेवों के महान अस्त्र भी तीन स्तरों/श्रेणियों में बंटे हैं और इनसे भी शक्तिशाली हैं। आइये त्रिदेवों के उन महान अस्त्रों के विषय में जानते हैं।

सोमवार, दिसंबर 07, 2020

दिव्यास्त्र


हमारे पिछले लेख में आपने साधारण अस्त्र-शस्त्रों के विषय में पढ़ा था। इस लेख में हम प्रमुख दिव्यास्त्रों के विषय में चर्चा करेंगे। दिव्यास्त्र अर्थात दिव्य अस्त्र। ऐसे अस्त्र जो देवताओं द्वारा उपयोग में लाये जाते हों एवं उनसे ही प्राप्त किये जाते हों। रामायण एवं महाभारत में असंख्य दिव्यास्त्रों का वर्णन मिलता है। कुछ अति-श्रेष्ठ योद्धा ही ऐसे होते थे जो देवताओं को प्रसन्न कर उनसे वरदान स्वरूप दिव्यास्त्र प्राप्त कर पाते थे। रामायण में अनेक योद्धा थे जिनके पास अनेक दिव्यास्त्र थे किन्तु मेघनाद ऐसा योद्धा था जिसके पास लगभग सारे दिव्यास्त्र थे। उसी प्रकार महाभारत में भी सभी योद्धाओं में से अर्जुन के पास लगभग सारे दिव्यास्त्र थे जो उसने देवराज इंद्र से प्राप्त किये थे।

मंगलवार, दिसंबर 01, 2020

प्रसिद्ध अस्त्र एवं शस्त्र


पिछले लेख
में आपने अस्त्र एवं शस्त्र के बीच के मूल अंतर के  बारे में पढ़ा। इस लेख में हम साधारण अस्त्रों एवं शस्त्रों के विषय में पढ़ेंगे। इस लेख में हम किसी दिव्यास्त्र को सम्मलित नहीं करेंगे। हालाँकि हमारे पौराणिक ग्रंथों में अधिकतर अस्त्रों का वर्णन किसी दिव्यास्त्र के सन्दर्भ में ही आता है इसीलिए इस सूची में अधिक अस्त्रों का समावेश नहीं किया गया है और मूलतः शस्त्रों के विषय में ही जानकारी दी गयी है।