गुरुवार, जून 10, 2021

सम्पाती

रामायण में हमें सम्पाती एवं जटायु नाम दो पक्षियों का वर्णन मिलता है, जो गिद्ध जाति से सम्बंधित थे। रामायण में इन दोनों का बहुत अधिक वर्णन तो नहीं है किन्तु फिर भी जटायु का वर्णन हमें बहुत प्रमुखता से मिलता है। सम्पाती का वर्णन हमें केवल सीता संधान के समय ही मिलता है, किन्तु फिर भी उनकी कथा बहुत प्रेरणादायक है। आज हम इन दोनों भाइयों में से ज्येष्ठ, सम्पाती के विषय में जानेंगे। अगले लेख में हम उनके छोटे भाई जटायु के विषय में चर्चा करेंगे।

गुरुवार, जून 03, 2021

क्या महाराज दशरथ की ३५० रानियाँ थी?

भारतीय संस्कृति में महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण के जिस रचना ने सर्वाधिक असर छोड़ा है वो गोस्वामी तुलसीदास रचित श्री रामचरितमानस है। हालाँकि तुलसीदास ने अपने ग्रन्थ मानस में कुछ ऐसी घटनाओं को भी जोड़ा है जो मूल वाल्मीकि रामायण में नहीं है। साथ ही कई अन्य घटनाओं को मानस में स्थान नहीं दिया गया है। ऐसी ही एक जानकारी महाराज दशरथ की पत्नियों के विषय में है।

गुरुवार, मई 27, 2021

द्रौपदी

पूर्व काल में एक ऋषि थे मुद्गल। उनका विवाह इन्द्रसेना नामक कन्या से हुआ जो बाद में अपने पति के नाम से मुद्गलनी भी कहलायी। दुर्भाग्य से मुद्गल की मृत्यु विवाह के तुरंत बाद हो गयी। तब इंद्रसेना को अपने पति के जाने का अपार दुःख हुआ किन्तु उसे इस बात का भी दुःख हुआ कि वो अपने वैवाहिक जीवन का भोग नहीं कर सकी। इसी कारण उसने भगवान शंकर की घोर आराधना की। जब महादेव प्रसन्न हुए तो इन्द्रसेना ने उनसे ये वर माँगा कि अगले जन्म में उसे एक ऐसा पति चाहिए जो धर्म का ज्ञाता हो, अपार बलशाली हो, सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हो, संसार में सर्वाधिक सुन्दर हो एवं जिसके सहनशीलता की कोई सीमा ना हो।

गुरुवार, मई 20, 2021

कुंती

ये पंचकन्या श्रृंखला का चौथा लेख है। इससे पहले मंदोदरी, अहिल्या एवं तारा पर लेख प्रकाशित हो चुके हैं। इस लेख में हम चौथी पंचकन्या कुंती के बारे में जानेंगे। यदुकुल में एक प्रतापी राजा हुए शूरसेन। उनकी पत्नी का नाम था मरिषा जो नाग कुल की थी। शूरसेन के एक फुफेरे भाई थे कुन्तिभोज जो कुंती प्रदेश के स्वामी थे। वे निःसंतान थे इसी कारण शूरसेन ने ये प्रतिज्ञा की कि अपनी पहली संतान को वो कुन्तिभोज को प्रदान करेंगे। शूरसेन की पहली संतान एक पुत्री हुए जिनका नाम था "पृथा"। प्रण के अनुसार शूरसेन ने पृथा को कुन्तिभोज को दे दिया। इस प्रकार पृथा कुन्तिभोज की दत्तक पुत्री कहलाई और आगे चल कर उन्ही के नाम पर उनका नाम "कुंती" पड़ा।

गुरुवार, मई 13, 2021

तारा

ये पञ्चसती श्रृंखला का तीसरा लेख है। इससे पहले हमने मंदोदरी एवं अहिल्या पर लेख प्रकाशित किया था, आशा है आपको पसंद आया होगा। आज इस लेख में हम वानरराज बाली की पत्नी तारा के विषय में जानेंगे। तारा के जन्म के विषय में हमें दो अलग जानकारियां प्राप्त होती है। एक कथा के अनुसार तारा देवगुरु बृहस्पति की पुत्री थी। ये बहुत बड़ा संयोग है कि बृहस्पति की पत्नी का नाम भी तारा ही था। हालाँकि ये मान्यता अधिक प्रसिद्ध नहीं है।