गुरुवार, मार्च 26, 2020

ययाति पुत्री माधवी - १: ऋषि गालव का हठ

हमारे धर्मग्रंथों में ऐसी कई स्त्रियाँ हैं जिन्हे अपने जीवन में बड़े कष्ट झेलने पड़े किन्तु कुछ स्त्रियाँ ऐसी हैं जिन्हे इतना कुछ झेलना पड़ा जिसे सुनकर हम विश्वास भी नहीं कर सकते कि ऐसा कुछ हो सकता है। ऐसी ही एक कथा चक्रवर्ती सम्राट ययाति की पुत्री माधवी की है। कई जगह उसका नाम वृषदवती बताया गया है। उसके साथ जो हुआ वो कदाचित हम सोच भी नहीं सकते किन्तु अपने पिता के मान के लिए उसने सब सहा।

शुक्रवार, मार्च 20, 2020

कुब्जा

गोकुल वृंदावन में जब श्रीकृष्ण १६ वर्ष के हुए, कंस के निमंत्रण पर अक्रूर उन्हें और बलराम को लेकर मथुरा आ गए। कंस से मिलने से पहले उन्हें कुछ दिन अतिथिशाला में ठहराया गया जहाँ उन्होंने नगर भ्रमण का सोचा। वे दोनों भाई मथुरा की गलियों में भ्रमण करने लगे। वे जिधर भी निकल जाते, लोग उन्हें देखते ही रह जाते। नगर में पहले ही समाचार फ़ैल चुका था कि ये दोनों भाई ही उन्हें कंस के अत्याचारों से मुक्त करवाएंगे।

सोमवार, मार्च 16, 2020

रावण की ७ अपूर्ण इच्छाएं

हमारे कई पौराणिक ग्रंथों में ऐसा वर्णन है कि रावण की कई ऐसी इच्छाएं थी जो वो पूरा नहीं कर पाया। उसकी अपूर्ण इच्छाएं तो बहुत थी किन्तु उनमे से ७ सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं। रावण सप्तद्वीपाधिपति था, नवग्रह उसके अधीन रहते थे और स्वयं भगवान रूद्र की उसपर कृपा थी। किन्तु उसके बाद भी, अपने हर प्रयासों के बाद भी उसकी ये ७ इच्छाएं पूरी नहीं हो सकी। आइये इनके बारे में कुछ जानते हैं। 
  1. स्वर्ग तक सोपान का निर्माण: लंका का अधिपति बनने के बाद रावण ने स्वर्ग पर आक्रमण करने की ठानी। अपने पुत्र मेघनाद और राक्षस सेना के साथ इंद्र पर आक्रमण किया जहाँ मेघनाद ने इंद्र को परास्त कर इंद्रजीत की उपाधि प्राप्त की। देवताओं को पराभूत कर और नवग्रह को अपने अधीन कर रावण वापस लंका लौट आया। इसके बाद उसके मन में एक इच्छा जागी कि वो पृथ्वी से स्वर्ग तक सीढ़ी का निर्माण करेगा ताकि वो जब चाहे स्वर्ग जा सके। वो ऐसा कर ईश्वर की सत्ता को चुनौती देना चाहता था ताकि लोग ईश्वर को छोड़ को उसकी पूजा करना आरम्भ कर दें। किन्तु वो कभी भी स्वर्ग तक सीढियाँ बनाने में सफल ना हो सका। 

शुक्रवार, मार्च 13, 2020

भगवान शिव को क्यों नहीं चढ़ाया जाता केतकी का फूल?

पिछले लेखों में आपने पढ़ा कि ऐसी कौन कौन सी वस्तुएं हैं जो भगवान शिव को चढ़ाना वर्जित है। इन वस्तुओं में से एक है केतकी का पुष्प। केतकी का पुष्प सफ़ेद रंग का होता है और देखने में बहुत सुन्दर होता है किन्तु फिर भी इसे महादेव को अर्पित नहीं किया जाता क्यूंकि स्वयं भगवान शंकर ने इसे वर्जित किया है। इसके पीछे जो कथा है वो सृष्टि के आरम्भ से पहले की है।

सोमवार, मार्च 09, 2020

भगवान शिव को क्यों नहीं चढ़ाई जाती कुमकुम?

इस श्रृंखला के पिछले लेखों में आपने उन वस्तुओं के विषय में पढ़ा जो भगवान शिव को वर्जित है। इनमें से शंख, तुलसी, लौह पात्र, केतकी और कुमकुम के पीछे विशेष कथा है। शंख, तुलसी एवं लौह पात्र की कथा हम पहले ही धर्मसंसार पर प्रकाशित कर चुके हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर क्या कारण है कि भगवान शिव को कुमकुम नहीं चढ़ाई जाती।

गुरुवार, मार्च 05, 2020

वर्तमान शहरों के प्राचीन नाम

निर्विवाद रूप से भारत वर्ष विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। ये देव नगरी है। यहाँ के कई नगर अत्यंत प्राचीन हैं। वैसे तो भारत के सहस्त्रों नगरों का प्राचीन नाम अवश्य होगा किन्तु इस लेख में हम केवल कुछ प्रमुख नगरों को ही समाहित कर पाए हैं। अगर आपके पास किसी अन्य नगर के प्राचीन नाम की जानकारी हो तो हमें अवश्य बताएं।

रविवार, मार्च 01, 2020

वैद्यराज चरक - २: चरक संहिता

पिछले लेख में आपने वैद्यराज चरक का जीवन परिचय पढ़ा। कुछ विद्वान संसार को कुछ ऐसा दे कर जाते हैं जिससे वे सदा के लिए इतिहास में अमर हो जाते हैं। जैसे महर्षि वाल्मीकि रामायण, वेदव्यास महाभारत और तुलसीदास रामचरितमानस के लिए जाने जाते हैं। उसी प्रकार वैद्यराज चरक ने एक ऐसे महान ग्रन्थ की रचना की जिससे वे इतिहास में अमर हो गए। वो ग्रन्थ है "चरक संहिता"

सोमवार, फ़रवरी 24, 2020

वैद्यराज चरक - १: परिचय

चरक एक महान वैद्य थे जिन्हे विश्व का सबसे पहला वैद्य माना जाता है। यही नहीं, इन्हे आयुर्वेद का जनक भी माना जाता है। इनके जन्म को लेकर कुछ मतभेद है। कुछ लोग इनका जन्म ईसा से ३०० वर्ष पहले का मानते हैं जबकि अधिकतर लोग इनका जन्म महात्मा बुद्ध से भी पहले का मानते हैं। इसमें से दूसरा मत ही ज्यादा तर्कसंगत लगता है। कुछ लोग चरक और कनिष्क को एक मानते हैं किन्तु ऐसा नहीं है। कनिष्क बौद्ध थे किन्तु चरक साहित्य में बौद्ध मतों का कठोरता से खंडन किया गया है।

सोमवार, फ़रवरी 17, 2020

वस्तुएं जो भगवान शिव को वर्जित है - २

पिछले लेख में आपने उन चौदह वस्तुओं के बारे में पढ़ा जो भगवान शिव को अर्पित नहीं की जाती। जैसे कि पहले बताया गया है कि इस लेख को हम दो भागों में विभक्त करेंगे। इस भाग में हम उन वस्तुओं को समाहित करेंगे जिसे शिवलिंग पर चढाने को शास्त्रों में मना किया गया है। इसके अगले लेखों में हम उन मुख्य वस्तुओं के बारे में अलग से बताएंगे जिसे महादेव पर ना चढाने के पीछे कोई कथा है। तो आइये पहले सामान्य चीजों के बारे में जानते हैं। इस लेख में तीन ऐसी चीजें है जिसके पीछे कथा तो है किन्तु वो पहले ही धर्मसंसार पर प्रकाशित की जा चुकी है। उसके वर्णन के साथ उसका लिंक भी दिया गया है जिसे आप पढ़ सकते हैं।