सोमवार, फ़रवरी 17, 2020

वस्तुएं जो भगवान शिव को वर्जित है - २

पिछले लेख में आपने उन चौदह वस्तुओं के बारे में पढ़ा जो भगवान शिव को अर्पित नहीं की जाती। जैसे कि पहले बताया गया है कि इस लेख को हम दो भागों में विभक्त करेंगे। इस भाग में हम उन वस्तुओं को समाहित करेंगे जिसे शिवलिंग पर चढाने को शास्त्रों में मना किया गया है। इसके अगले लेखों में हम उन मुख्य वस्तुओं के बारे में अलग से बताएंगे जिसे महादेव पर ना चढाने के पीछे कोई कथा है। तो आइये पहले सामान्य चीजों के बारे में जानते हैं। इस लेख में तीन ऐसी चीजें है जिसके पीछे कथा तो है किन्तु वो पहले ही धर्मसंसार पर प्रकाशित की जा चुकी है। उसके वर्णन के साथ उसका लिंक भी दिया गया है जिसे आप पढ़ सकते हैं।

बुधवार, फ़रवरी 12, 2020

वस्तुएं जो भगवान शिव को वर्जित है - १

भगवान शंकर को भोलेनाथ कहते हैं क्यूंकि वे सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं। महादेव ही ऐसे हैं जो केवल मन के भाव से ही प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी पूजा के लिए किसी विशेष वस्तुओं की आवश्यकता नहीं होती। किन्तु कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जो महादेव को नहीं चढ़ाई जाती। वे जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं उतनी ही जल्दी अप्रसन्न भी हो जाते हैं। अतः उनकी पूजा करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि ये वस्तुएं उन्हें अर्पित ना की जाये।

शनिवार, फ़रवरी 08, 2020

रावण के अनुसार स्त्रियों के ८ अवगुण

रामचरितमानस में एक प्रसंग आता है जब रावण द्वारा सीता हरण करने के पश्चात रावण की पटरानी मंदोदरी उसे बार बार देवी सीता को श्रीराम को लौटाने का अनुरोध करती है। पहले तो रावण उसके इस हठ को हंसी में टाल देता था किन्तु मंदोदरी के बार-बार टोकने के कारण रावण क्रोधित हो जाता है और वो बताता है कि स्त्रियों के ८ दुर्गुणों के कारण ही पुरुषों का विनाश होता है।

मंगलवार, फ़रवरी 04, 2020

वर्तमान देशों के पौराणिक नाम

पौराणिक ग्रंथों में हमें कई देशों के वैदिक नाम मिलते हैं। भारत का नाम आर्यावर्त था ये तो विश्व प्रसिद्ध है किन्तु कुछ और भी देश हैं जिनका वर्णन हमारे धार्मिक ग्रंथों में आता है। कुछ ऐसे ही प्रमुख देशों का विवरण इस लेख में दिया जा रहा है। अगर आपको किसी अन्य देश का पौराणिक नाम पता हो तो हमें बताएं।
  • अखंड भारत: आर्यवर्त
    • भारत: शंकुन्तला पुत्र महाराज भरत के नाम पर
    • हिन्दू स्थान: जो बाद में बदलकर हिंदुस्तान हो गया। ये नाम हिन्दू धर्म के कारण पड़ा। पहले जो कोई भी भारत से होता था, चाहे वो हिन्दू, मुस्लिम, सिख या किसी अन्य धर्म का क्यों ना हो, उसे हिन्दू ही कहा जाता था।

गुरुवार, जनवरी 30, 2020

जब देवताओं ने देवी सरस्वती को गिरवी रखा

आप सभी को वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें। वैसे तो वसंत पंचमी पर हमने पहले ही लेख डाल रखा है और माता सरस्वती, लक्ष्मी एवं गंगा विवाद पर भी एक लेख पहले ही प्रकाशित हो चुका है जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। इस लेख में हम आपको एक ऐसी कथा के बारे में बताने वाले हैं जिसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है। एक ऐसी घटना जब देवताओं ने माता सरस्वती का विनिमय किया।

रविवार, जनवरी 26, 2020

परीक्षित - ४: तक्षक का दंश और मृत्यु

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि कलियुग के प्रभाव के कारण महाराज परीक्षित से महर्षि शमीक का अपमान हो जाता है। इससे क्रोधित होकर उनके पुत्र श्रृंगी परीक्षित को श्राप देते हैं कि ठीक सातवें दिन तक्षक के दंश से परीक्षित की मृत्यु हो जाएगी। जब शमीक ऋषि को इसका पता चलता है तो वे बड़े दुखी होते हैं और परीक्षित को सन्देश भिजवाते हैं कि केवल ७ दिनों के लिए अपनी सुरक्षा का प्रबंध कर लें। 

जब परीक्षित को ये समाचार मिला तो उन्होंने अपने पुत्र जन्मेजय को राजा बना दिया और अपनी रक्षा के लिए ७ मंजिला एक ऐसा लौह भवन बनवाया जिसमे वायु को छोड़ कर कुछ और प्रवेश ही नहीं कर सकता था। राजा की रक्षा के लिए प्रत्येक मंजिल पर चारो ओर सर्पमँत्र के ज्ञाताओं को रक्षा के लिए बिठा दिया। उस भवन के सबसे ऊपरी ७वीं मंजिल पर स्वयं महाराज परीक्षित बैठे। 

गुरुवार, जनवरी 23, 2020

परीक्षित -३: कलियुग का प्रभाव और श्राप

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस प्रकार महाराज परीक्षित कलियुग को धर्म रूपी बैल पर अत्याचार करते देखा। कलियुग के समझाए जाने पर कि अब उसका युग आने वाला है, महाराज परीक्षित ने कलियुग को रहने के लिए पाँच स्थान निश्चित कर दिए। वे थे - जुआ, हिंसा, मदिरा, स्त्री एवं स्वर्ण। परीक्षित ने कलियुग को रहने का स्थान तो दे दिया किन्तु वे खुद नहीं जानते थे कि उसका प्रभाव सबसे पहले उनपर ही पड़ने वाला है।

रविवार, जनवरी 19, 2020

परीक्षित - २: कलियुग से सात्क्षात्कार

पिछले लेख में आपने परीक्षित के जन्म के विषय में पढ़ा। आपने ये भी जाना कि महाभारत के ३६ वर्षों के बाद जब श्रीकृष्ण ने निर्वाण लिया, तब युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर का राज्य परीक्षित को सौंपा और अपने भाइयों और पत्नी के साथ शरीर का त्याग कर दिया। तब परीक्षित ने युधिष्ठिर के उत्तराधिकार को कुशलतापूर्वक संभाला और हस्तिनापुर का राज्य उचित ढंग से चलाने लगे। अब आगे...

गुरुवार, जनवरी 16, 2020

परीक्षित - १: जन्म

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था और दुर्योधन की मृत्यु हो चुकी थी। कौरव सेना में केवल तीन योद्धा - अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा बचे थे। मरने से पूर्व दुर्योधन ने अश्वथामा को अपनी सेना का अंतिम प्रधान सेनापति नियुक्त किया और उससे पांडवों का वध करने को कहा। अश्वथामा ने भूलवश पांडवों के पांचों पुत्रों - प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकर्मा, शतानीक और श्रुतसेन का वध कर दिया। जब पांडवों को ये पता चला तो वो अश्वथामा को ढूंढते हुए महर्षि वेदव्यास के आश्रम पर पहुंचे। 

उन्हें वहाँ आया देख कर अश्वथामा ने प्रतिशोध की भावना से उनपर ब्रह्मास्त्र के प्रहार कर दिया। उससे बचने के लिए अर्जुन को भी ब्रह्मास्त्र चलाना पड़ा। दोनों ब्रह्मास्त्रों के टकराने से जो विनाश होता उससे बचने के लिए वेदव्यास और देवर्षि ने बीच-बचाव किया जिससे अर्जुन ने अपना ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया किन्तु अश्वथामा को ब्रम्हास्त्र को लौटना आता ही नहीं था। तब महर्षि वेदव्यास ने उसे ब्रह्मास्त्र की दिशा बदलने को कहा जिसके बाद अश्वथामा ने अपने ब्रह्मास्त्र को अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ पर छोड़ दिया। इसके बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ।

शनिवार, जनवरी 11, 2020

रावण का मानमर्दन ३: कर्त्यवीर्य अर्जुन - २

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि रावण अपने दिग्विजय की यात्रा में कर्त्यवीर्य अर्जुन की माहिष्मति नगरी पहुँचता है। वहाँ रावण नर्मदा के तट पर शिवलिंग बना कर पूजा करने लगा। उसी समय सहस्त्रार्जुन ने अपने १००० हाथों से नर्मदा का प्रवाह रोक लिया जिससे रावण का बनाया शिवलिंग खंडित हो गया। इससे क्रुद्ध होकर रावण ने सहस्त्रार्जुन को युद्ध की चुनौती दी। तब उसने रावण को अपने नगर आने का आमंत्रण दिया।