रामायण में कौन किसका अवतार था?

रामायण में कौन किसका अवतार था?
ये तो हम सभी जानते ही हैं कि रामायण में भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अपना सातवां अवतार लिया था। किन्तु उस युग में उनकी सहायता के लिए अनेकों देवताओं ने अवतार लिए। इसका विस्तृत वर्णन वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के सर्ग १७ और युद्धकाण्ड के सर्ग ३० में मिलता है। इसके अतिरिक्त रामचरितमानस में भी हमें कुछ वर्णन मिलता है। कुछ ऐसे अवतार भी हैं जो लोक कथाओं के रूप में प्रचलित हैं, उसका अलग से वर्णन किया गया है।

जब रावण माता सीता का अपहरण किये बिना ही लौट गया

जब रावण माता सीता का अपहरण किये बिना ही लौट गया
रामायण में सीता हरण के विषय में जनमानस में एक धारणा प्रचलित है कि रावण ने शूर्पणखा के कहने पर मारीच की सहायता से माता सीता का हरण किया था। किन्तु वास्तव में खर-दूषण और जनस्थान के १४००० राक्षसों के नाश का समाचार सबसे पहले शूर्पणखा ने रावण को नहीं दिया था। ना ही सबसे पहले शूर्पणखा ने रावण को सीता हरण की सलाह दी थी। साथ ही साथ पहली बार रावण मारीच की बात मान कर माता सीता का हरण किये बिना ही लौट गया था, ये बात बहुत ही कम लोगों को पता है।

क्या श्रीराम ने खर-दूषण को बड़ी सरलता से मार डाला था?

क्या श्रीराम ने खर-दूषण को बड़ी सरलता से मार डाला था?
भगवान श्रीराम और खर-दूषण के युद्ध के विषय में तो हम सभी जानते हैं। आम तौर पर इस युद्ध के विषय में विस्तार से बहुत कम लोगों को पता है और ऐसी मान्यता है कि ये युद्ध श्रीराम ने बड़ी आसानी से बहुत कम समय में जीत लिया। किन्तु जब हम वाल्मीकि रामायण पढ़ते हैं तो इस युद्ध के विषय में बहुत विस्तार से लिखा गया है। इसका वर्णन हमें अरण्य कांड के २५वें सर्ग से लेकर ३०वें सर्ग तक दिया गया है। जब आप इसे पढ़ेंगे तो आपको श्रीराम के शौर्य के विषय में पता चलेगा।

स्वयं को खा जाने वाला शिवगण - कीर्तिमुख

कीर्तिमुख
आप सबने भारत, विशेष कर दक्षिण भारत में घरों और मंदिरों के ऊपर स्थापित इस भयानक आकृति को अवश्य देखा होगा। हालाँकि पहली बार इसे देख कर ऐसा लगता है जैसे ये कोई असुर हो किन्तु वास्तव में ये भगवान शंकर का एक गण है जिसका नाम है "कीर्तिमुख"। इसे देवताओं के भी ऊपर स्थान दिया जाता है।

अद्भुत रामायण - एक अजीब रामायण

अद्भुत रामायण - एक अजीब रामायण
वैसे तो वाल्मीकि रामायण के कई संस्करण हैं जिनमें से सबसे प्रमुख है गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री रामचरितमानस। इसके अतिरिक्त भी आनंद रामायण, कम्ब रामायण, अध्यात्म रामायण आदि अनेक संस्करण हैं। इन्ही संस्करणों में से जो सबसे अलग संस्करण है वो है अद्भुत रामायण। जैसा कि इसका नाम है, इस रामायण में ऐसी ऐसी अद्भुत घटनाएं हैं जिसपर विश्वास करना बहुत कठिन है।

महर्षि रुरु और प्रमद्वरा की कथा

महर्षि रुरु और प्रमद्वरा की कथा
आज वट सावित्री का पर्व है। सावित्री के पात्रिव्रत के विषय में हमने एक लेख पहले ही प्रकाशित किया है जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। सावित्री और उन जैसे अनेकों पतिव्रताओं की कथा से हमारे ग्रन्थ भरे पड़े हैं पर आज हम आपको एक ऐसे पुरुष की कथा सुनाते हैं जिन्होंने अपने मृत पत्नी के प्राण यमराज की कृपा से वापस प्राप्त किये।

भरत किस मार्ग से अयोध्या से कैकेय गए और किस मार्ग से वापस आये?

भरत किस मार्ग से अयोध्या से कैकेय गए और किस मार्ग से वापस आये?
ये तो हम सभी जानते हैं कि रामायण में श्रीराम के राज्याभिषेक से पहले ही भरत और शत्रुघ्न अपने ननिहाल कैकेय देश चले गए थे। बाद में जब महाराज दशरथ की मृत्यु हुई तो गुरु वशिष्ठ ने दूतों को कैकेय देश भेजा ताकि वे भरत और शत्रुघ्न को वापस ले कर आ सकें। जिस मार्ग से दूत कैकेय पहुंचे और जिस मार्ग से भरत और शत्रुघ्न सेना सहित वापस आये, उसका विस्तृत वर्णन रामायण में दिया गया है।