8 दिसंबर 2019

रानी चोला देवी - २

पिछले लेख में आपने रानी चोला देवी और उनके पति मंगलसेन के विषय में पढ़ा। किस प्रकार रानी के उद्यान का विध्वंस करने वाले शूकर का वध मंगलसेन करते हैं जो वास्तव में चित्ररथ नामक गन्धर्व थे जो ब्रह्मदेव का श्राप भोग रहे थे। मंगलसेन के हांथों उन्हें अपने श्राप से मुक्ति मिल जाती है और वे उन्हें आशीर्वाद देकर अपने लोक लौट जाते हैं। अब आगे...

6 दिसंबर 2019

रानी चोला देवी - १

महर्षि अंगिरस के लेख में रानी चोला देवी का वर्णन आया था। महाभारत में युधिष्ठिर श्रीकृष्ण से पूछते हैं कि "हे माधव! जिसे सुनने से मन प्रसन्न हो और पापों का अंत हो जाये ऐसी कोई कथा मुझे सुनाइए।" ये सुनकर श्रीकृष्ण ने कहा - "भ्राताश्री! सतयुग में जब दैत्य वृत्रासुर ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया तब देवराज इंद्र ने यही इच्छा देवर्षि नारद के सामने जताई थी। देवर्षि ने जो कथा देवराज को सुनाई वही मैं आपको सुनाता हूँ। इस कथा को सुनने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती है।"

पुरन्दरपुर नामक एक वैभवशाली राज्य था जहाँ राजा मंगलसेन राज्य करते थे। कहा जाता है कि उनके नगर को स्वयं विश्वकर्मा ने बनाया था और उसके समान और कोई दूसरा नगर विश्व में नहीं था। राजा मंगलसेन की दो रूपवती पत्नियाँ थी - चिल्ल देवी और चोला देवी। जहाँ चिल्ल देवी को धर्म-कर्म में पूर्ण विश्वास था वही चोला देवी नास्तिक तो नहीं थी किन्तु उन्हें धर्म-कर्म, पूजा-पाठ पर कुछ खास श्रद्धा नहीं थी।

4 दिसंबर 2019

गयासुर - ३

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस प्रकार गयासुर को भगवान विष्णु द्वारा मिले गए वरदान के कारण सृष्टि का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे मुक्ति पाने के लिए समस्त देवता भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं और फिर श्रीहरि परमपिता ब्रह्मा को गयासुर का शरीर दान में मांगने का सुझाव देते हैं। तब ब्रह्मदेव गयासुर के पास जाकर यज्ञ हेतु उसके शरीर का दान मांगते हैं जो वो प्रसन्नतापूर्वक दे देता है। अब आगे... 

2 दिसंबर 2019

गयासुर - २

पिछले लेख में आपने धर्म परायण और श्रीहरि के भक्त गयासुर के बारे में पढ़ा। आपने ये जाना कि किस प्रकार जीवमात्र की भलाई के लिए उसने भगवान विष्णु से ये वर मांग लिया कि उसे देखते ही कोई भी प्राणी मोक्ष को प्राप्त कर ले। किन्तु उसके इस वरदान के कारण सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया क्यूंकि हर प्राणी उसे देख कर बैकुंठ जाने लगा और यमपुरी खाली हो गयी। अब आगे...