31 अगस्त 2019

ब्राह्मणों के प्रकार

वैसे तो ये सम्पूर्ण सृष्टि ही परमपिता ब्रह्मा से उत्पन्न हुई है किन्तु उनमे से भी ब्राह्मणों को उनका ही दूसरा रूप माना गया है। "ब्राह्मण", ये शब्द भी स्वयं "ब्रह्मा" से उत्पन्न हुआ है। हमारे धार्मिक ग्रंथों में कई स्थान पर ऋषि, मुनि इत्यादि का वर्णन है। आम तौर पर हम इसे एक ही समझ लेते हैं किन्तु इनमे भी भेद है। हमारे ग्रंथों में ब्राह्मणों के भी ८ प्रकार बताये गए हैं। तो आइए आज इस विषय में कुछ जानते हैं।

29 अगस्त 2019

तिरुपति बालाजी - ४

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस प्रकार भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर श्रीनिवास एवं माता लक्ष्मी ने पद्मावती के रूप में जन्म लिया। पद्मावती से विवाह करने के लिए श्रीनिवास ने देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर से धन उधार लिया और कलियुग के अंत तक उनके धन को लौटने का वचन दिया। अब आइये हम तिरुपति बालाजी मंदिर के विषय में और कुछ रोचक तथ्य जानते हैं।

25 अगस्त 2019

तिरुपति बालाजी - ३

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि भगवान विष्णु को त्यागने के बाद माता लक्ष्मी ने पद्मावती के नाम से पृथ्वी पर जन्म लिया। उन्हें खोजते-खोजते श्रीहरि ने भी श्रीनिवास के नाम से पृथ्वी पर जन्म लिया। युवा होने पर एक बार श्रीनिवास एक वन में पहुँचे जहाँ उन्होंने प्रथम बार पद्मावती को देखा। वापस आकर उन्होंने बकुलामाई, जिन्हे वो अपनी माता मानते थे, उन्हें अपने प्रेम के विषय में बताया। तब उनकी व्याकुलता देख कर बकुलामाई ने उनकी सहायता का वचन दिया। अब आगे...

23 अगस्त 2019

उज्जैन से अन्य ज्योतिर्लिंगों की अद्भुत दूरी


द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रृंखला में हमने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में एक लेख लिखा था। कहा गया है:

आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम्।
भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते॥

अर्थात: आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है।

इसी से इस ज्योतिर्लिंग की महत्ता का पता चलता है। आज से करीब १०० वर्ष पूर्व जब वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर एक काल्पनिक "कर्क रेखा" खींची तो उससे ये पता चला कि उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर इस पूरी पृथ्वी के केंद्र बिंदु पर स्थित है। जो बात वैज्ञानिकों को १०० वर्ष पहले पता चली, वे हमारे ऋषियों को हजारों वर्ष पहले पता चल गयी थी। हमारे पूर्वजों ने २००० वर्ष पूर्व सूर्य और ज्योतिष गणना के लिए उज्जैन में कई यंत्रों का निर्माण भी किया और आज भी वैज्ञानिक सूर्य एवं नक्षत्रों की सटीक गणना के लिए उज्जैन ही आते हैं।

21 अगस्त 2019

तिरुपति बालाजी - २

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस प्रकार महर्षि भृगु ने त्रिदेवों की परीक्षा ली। उसी परीक्षा में उन्होंने श्रीहरि विष्णु के वक्षस्थल पर अपने पैरों से प्रहार कर दिया। इस पर भी भगवान विष्णु ने उनके चरण पकड़ लिए। तब भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु को त्रिदेवों में श्रेष्ठ बताया। किन्तु उनके इस व्यवहार से देवी लक्ष्मी को बड़ा कष्ट हुआ कि क्यों भगवान विष्णु ने भृगु को उसके अपराध का दंड नहीं दिया। तब वे रुष्ट होकर श्रीहरि को छोड़ कर चली गयी। अब आगे...

19 अगस्त 2019

कुबेर की नौ निधियाँ - २

पिछले लेख में आपने देवताओं के कोषाध्यक्ष यक्षराज कुबेर की पहली ४ निधियों के बारे में पढ़ा। इस लेख में हम आगे बढ़ते हैं और उनकी बची हुई ५ निधियों के बारे में जानते हैं।

५. नन्द: इस निधि का धारक राजसी एवं तामसी गुणों के मिश्रण वाला होता है। वह अकेला अपने कुल का आधार होता है। ये निधि साधक को लम्बी आयु एवं निरंतर तरक्की प्रदान करती है। ऐसा व्यक्ति अपनी प्रशंसा से अत्यंत प्रसन्न होता है और प्रशंसा करने वाले को आर्थिक रूप से सहायता भी कर देता है। अधिकतर ऐसे साधक अपने परिवार की नींव होता है और अपने परिवार में धन संग्रह करने वाला एकलौता व्यक्ति होता है। इस निधि के साधक के पास धन तो अथाह होता है किन्तु तामसी गुणों के कारण उसका नाश भी जल्दी होता है। पर साधक अपने पुत्र पौत्रों के लिए बहुत धन संपत्ति छोड़ कर जाता है।

17 अगस्त 2019

राघवयादवीयम् (श्लोक २६ - ३०)

श्लोक २६

अनुलोम (रामकथा)

सागरातिगम् आभातिनाकेशः असुरमासहः।
तं सः मारुतजं गोप्ता अभात् आसाद्य गतः अगजम् ॥ २६॥

अर्थात: समुद्र लांघ कर सहयाद्री पर्वत तक जा समुद्र तट तक पहुंचने वाले हनुमान जैसे दूत होने के कारण इंद्र से भी अधिक प्रतापी, असुरों की समृद्धि के लिए असहनशील उन रक्षक श्रीराम की कीर्ति में वृद्धि हो गई।

15 अगस्त 2019

रक्षा बंधन

आप सभी को रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें। रक्षाबंधन एक अति प्राचीन पर्व है जो हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व में बहनें अपने भाइयों के हाथ में रेशम के धागों का एक सूत्र बाँधती है और उसकी रक्षा की कामना करती है। बदले में भाई भी सदैव अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। ये साधारण सा बंधन भाई एवं बहन की रक्षा की कड़ी है और इसी कारण इसे रक्षा बंधन के नाम से जाना जाता है। सांस्कृतिक रूप से तो इसका बहुत महत्त्व है पर आज हम इसके धार्मिक महत्त्व को जानेंगे।

13 अगस्त 2019

कुबेर की नौ निधियाँ - १

कुछ समय पहले हमने आपको पवनपुत्र हनुमान की नौ निधियों के बारे में बताया था। हनुमानजी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि का दाता कहा जाता है। जिस प्रकार हनुमान के पास नौ निधियाँ हैं, ठीक उसी प्रकार देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर के पास भी नौ निधियाँ हैं। अंतर केवल इतना है कि हनुमान अपनी नौ निधियों को किसी अन्य को प्रदान कर सकते हैं जबकि कुबेर ऐसा नहीं कर सकते।

निधि का अर्थ होता ऐसा धन जो अत्यंत दुर्लभ हो। इनमे से कई का वर्णन युधिष्ठिर ने भी महाभारत में किया है जिसे आप यहाँ देख सकते हैं। कुबेर को इन निधियों की प्राप्ति महादेव से हुई है। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ना केवल भगवान शंकर ने उन्हें इन निधियों का दान दिया अपितु उन्हें देवताओं के कोषाध्यक्ष का पद भी प्रदान किया।

11 अगस्त 2019

राघवयादवीयम् (श्लोक २१ - २५)

श्लोक २१

अनुलोम (रामकथा)

ताटकेयलवादत् एनोहारी हारिगिर आस सः।
हा असहायजना सीता अनाप्तेना अदमनाः भुवि ॥ २१॥

अर्थात: ताड़कापुत्र मारीच के वध से प्रसिद्द, अपनी वाणी से पाप का नाश करने वाले तथा जो अत्यंत मनभावन है, उनकी हाय सुनकर (मृगरूपी मारीच द्वारा श्रीराम के स्वर में सीता को पुकारने पर) असहाय सीता अपने उस स्वामी श्रीराम के बिना व्याकुल हो गईं।

9 अगस्त 2019

तिरुपति बालाजी - १

शायद ही कोई ऐसा हो जिसने तिरुपति बालाजी का नाम ना सुना हो। इसे दक्षिण भारत के सब बड़े और प्रसिद्ध मंदिर के रूप में मान्यता प्राप्त है। दक्षिण भारत के अतिरिक्त अन्य राज्यों में भी इस मंदिर की बहुत मान्यता है। यह एक ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान विष्णु मनुष्य रूप में  विद्यमान हैं जिन्हे "वेंकटेश" कहा जाता है। इसी कारण इसे "वेंकटेश्वर बालाजी" भी कहते हैं। ये मंदिर विश्व का सबसे अमीर मंदिर है जहाँ की अनुमानित धनराशि ५०००० करोड़ से भी अधिक है। इसके पीछे का कारण बड़ा विचित्र है।

बात तब की है जब देवों और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया। उस मंथन से अनेक रत्न प्राप्त हुए और उनमे से सबसे दुर्लभ देवी लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई। उनका सौंदर्य ऐसा था कि देव और दैत्य दोनों उन्हें प्राप्त करना चाहते थे। किन्तु माता लक्ष्मी ने स्वयं श्रीहरि विष्णु को अपना वर चुन लिया। स्वयं ब्रह्मदेव ने दोनों का विवाह करवाया। विवाह के पश्चात देवी लक्ष्मी ने पूछा कि उनका स्थान कहाँ होगा? तब नारायण ने कहा कि उनका स्थान उनके वक्षस्थल में होगा।

7 अगस्त 2019

राघवयादवीयम् (श्लोक १६ - २०)

श्लोक १६

अनुलोम (रामकथा)

सः अरम् आरत् अनज्ञाननः वेदेराकण्ठकुंभजम्।
तं द्रुसारपटः अनागाः नानादोषविराधहा ॥ १६॥

अर्थात: श्रीराम जो महाज्ञानी हैं, जिनकी वाणी वेद है, जिन्हें वेद कंठस्थ है, वो कुम्भज (महर्षि अगस्त्य, जिन्हे ये नाम मटके में जन्म लेने के कारण मिला) के निकट जा पंहुचे। वे निर्मल वृक्ष वल्कल (छाल) परिधानधारी हैं जो अनेक पाप करने वाले विराध के संहारक हैं।

5 अगस्त 2019

क्यों महाभारत के युद्ध को टालना असंभव था?

कौरवों ने छल से द्युत जीतकर पांडवों को १२ वर्ष के वनवास और एक वर्ष के अज्ञातवास पर भेज दिया। पांडवों ने अपना वनवास और अज्ञातवास नियमपूर्वक पूर्ण किया। विराट के युद्ध के पश्चात स्वयं पितामह भीष्म ने कहा कि पांडवों ने सफलतापूर्वक अपना अज्ञातवास पूर्ण कर लिया था किन्तु दुर्योधन अपने हठ पर अड़ा रहा। पांडवों ने धृतराष्ट्र से विनम्रतापूर्वक अपने हिस्से का राज्य माँगा पर पुत्रमोह में पड़ कर धृतराष्ट्र अच्छे-बुरे का विवेक खो बैठे। जब हस्तिनपुर दूत बनकर गए श्रीकृष्ण स्वयं संधि करवाने में असफल रहे तब अंततः महाभारत का युद्ध निश्चित हो गया।

1 अगस्त 2019

राघवयादवीयम् (श्लोक ११ - १५)

श्लोक ११

अनुलोम (रामकथा)

वरमानदसत्यासह्रीतपित्रादरात् अहो।
भास्वरः स्थिरधीरः अपहारोराः वनगामी असौ ॥ ११॥

अर्थात: विनम्र, आदरणीय, सत्य के त्याग से और वचन पालन ना करने से लज्जित होने वाले, अद्भुत, तेजोमय, मुक्ताहारधारी, वीर एवं साहसी श्रीराम वन को प्रस्थान किए।