23 मार्च 2012

कश्यप ऋषि से सम्पूर्ण जाति की उत्पत्ति

महर्षि कश्यप ब्रम्हा के मानस पुत्र मरीचि के पुत्र थे। इस प्रकार वे ब्रम्हा के पोते हुए। महर्षि कश्यप ने ब्रम्हा के पुत्र प्रजापति दक्ष की १७ कन्याओं से विवाह किया। संसार की सारी जातियां महर्षि कश्यप की इन्ही १७ पत्नियों की संतानें मानी जाति हैं। इसी कारण महर्षि कश्यप की पत्नियों को लोकमाता भी कहा जाता है। उनकी पत्नियों और उनसे उत्पन्न संतानों का वर्णन नीचे है:
  1. अदिति: आदित्य (देवता)। ये १२ कहलाते हैं. ये हैं अंश, अयारमा, भग, मित्र, वरुण, पूषा, त्वस्त्र, विष्णु, विवस्वत, सावित्री, इन्द्र और धात्रि या त्रिविक्रम (भगवन वामन)।

6 मार्च 2012

महाभारत में अठारह संख्या का महत्त्व

महाभारत कथा में १८ (अठारह) संख्या का बड़ा महत्त्व है। महाभारत की कई घटनाएँ १८ संख्या से सम्बंधित है। कुछ उदाहरण देखें:
  • महाभारत का युद्ध कुल १८ दिनों तक हुआ था। 
  • कौरवों (११ अक्षौहिणी) और पांडवों (९ अक्षौहिणी) की सेना भी कुल १८ अक्षौहिणी थी। अक्षौहिणी सेना के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ जाएँ।
  • अक्षौहिणी सेना के प्रत्येक भाग की संख्या के अंकों का कुल जमा १८ आता है।

पुराणों में श्लोकों की संख्या

  1. ब्रह्मपुराण: १४०००
  2. पद्मपुराण: ५५०००
  3. विष्णुपुराण: २३००० 
  4. शिवपुराण: २४००० 
  5. श्रीमद्भावतपुराण: १८००० 
  6. नारदपुराण: २५००० 
  7. मार्कण्डेयपुराण: ९००० 
  8. अग्निपुराण: १५००० 
  9. भविष्यपुराण: १४५०० 
  10. ब्रह्मवैवर्तपुराण: १८००० 
  11. लिंगपुराण: ११००० 
  12. वाराहपुराण: २४००० 
  13. स्कन्धपुराण: ८११०० 
  14. वामनपुराण: १०००० 
  15. कूर्मपुराण: १७००० 
  16. मत्सयपुराण: १४००० 
  17. गरुड़पुराण: १९००० 
  18. ब्रह्माण्डपुराण: १२०००
इस प्रकार सारे पुराणों के श्लोकों की कुल संख्या लगभग ४०३६०० (चार लाख तीन हजार छः सौ) है। इसके अलावा रामायण में लगभग २४००० एवं महाभारत में लगभग ११०००० श्लोक हैं।