रविवार, मई 17, 2020

शाल्मल द्वीप

पिछले लेख में आपने प्लक्ष द्वीप के विषय में पढ़ा। अब हम शाल्मल द्वीप के विषय में कुछ जानते हैं।
  • शाल्मल द्वीप विस्तार में प्लक्ष द्वीप से दुगना है।
  • इस द्वीप के स्वामी पवुष्मान हैं जिनके सात पुत्र इस द्वीप के सातों वर्षों पर राज्य करते हैं। 
  • ये द्वीप चारो ओर से मदिरा के सागर से घिरा हुआ है।
  • इस द्वीप में कभी दुर्भिक्ष नहीं पड़ता और यहाँ के निवासी कभी अस्वस्थ नहीं होते। 
  • इस द्वीप का नाम यहाँ पर उपस्थित विराट शाल्मल (सेमल) के वृक्ष के कारण पड़ा है। विष्णु पुराण में इसके विषय में कहा गया है - शाल्मलि: सुमहान वृक्षो नाम्ना निवृतिकारक:।।
  • इस द्वीप में ७ महान पर्वत हैं:
    1. कुमुद: इसके धातुमय शिखरों से अनेक शिलामालाएं उत्पन्न हुई हैं।  
    2. उन्नत: इसके शिखर हरिताल के हैं। 
    3. बलाहक: इसका दूसरा  नाम वलात्क भी है जिसके शिखर आकाश से भी ऊँचे हैं। 
    4. द्रोणाचल: इसका दूसरा नाम द्रोभ भी है जिसके शिखर पर दुर्लभ विशल्यकारिणी एवं मृतसंजीवनी नामक औषधि पायी जाती हैं। 
    5. कंक: ये पर्वत दिव्य वृक्षों से भरा है जिसमे दिव्य फल एवं पुष्प लगे हैं। 
    6. महिष: इसका नाम अग्नि के एक प्रकार महिष से पड़ा है जो इसके शिखर पर रहते हैं। 
    7. ककुद्मान: इस पर्वत पर वासुदेव स्वयं उस समय वर्षा करते हैं जिस समय ब्रह्मा प्रजा की उत्पत्ति करना चाहते हैं। 
  • इस द्वीप में ७ पवित्र नदियाँ बहती हैं:
    1. योनि
    2. तोया
    3. वितृष्णा
    4. चंद्रा
    5. विमुक्ता
    6. विमोचनी
    7. निवृत्ति
  • इस द्वीप में ७ वर्ष हैं:
    1. श्वेत
    2. हरित
    3. जीमूत
    4. रोहित
    5. वैद्युत
    6. मानस
    7. सुप्रभ
  • यहाँ भी ४ वर्णों की व्यवस्था है, जिसके विषय में विष्णु पुराण में कहा गया है - कपिलाश्चारुणा: पीता: कृष्णाश्चैव पृथक् पृथक।।
    1. कपिल: ब्राह्मण 
    2. अरुण: क्षत्रिय 
    3. पीत: वैश्य 
    4. कृष्ण: शूद्र
अगले लेख में हम कुश द्वीप के विषय में जानेंगे।

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