26 फ़रवरी 2018

जब मदुरई श्राप से भस्म हो गया - कण्णगी और कोवलन की कथा

अगर हम दक्षिण भारत की ओर देखें, तो ये विभिन्न प्रकार के धार्मिक कथाओं से भरा पड़ा है। उन्ही में से एक कथा है "शिलप्पदिकारम" काव्य में वर्णित कण्णगी-कोवलन की कथा। ये काव्य संगम काल में, लगभग २००० वर्ष पहले, पहली सदी में एक जैन राजकुमार "इलांगो अडिगल" के द्वारा लिखा गया था। इस काव्य की गणना तमिल साहित्य के ५ सबसे बड़े महाकाव्यों में की जाती है। अन्य ४ काव्य हैं मणिमेकलाई (५ वी सदी), कुण्डलकेचि (५ वी सदी), वलयापति (९ वी सदी) तथा शिवका चिंतामणि (१० वी सदी)। शिलप्पदिकारम का अर्थ होता है "पायलों की कथा" और ये नाम इसे इस लिए दिया गया क्यूंकि इसमें कण्णगी के पायलों का बड़ा महत्त्व है।

24 फ़रवरी 2018

नचिकेता

नचिकेता पौराणिक काल के तेजस्वी ऋषि-पुत्र थे जो ऋषि वाजश्रवा के पुत्र थे। इनका वर्णन कठ-उपनिषद में मिलता है। एक बार वाजश्रवा देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु विश्वजीत यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ के पश्चात उन्होंने ब्राह्मणों को गौ-दान दान देना प्रारम्भ किया। उनका पुत्र नचिकेता भी उनके साथ था। नचिकेता ने देखा कि उसके पिता केवल ऐसी गायों का दान कर रहे हैं जो अत्यंत वृद्ध, रुग्ण और दूध देने में असमर्थ है। अपने पिता को ऐसा करते देख कर नचिकेता ने उनसे कहा कि "पिताश्री! आप जिस प्रकार का दान ब्राह्मणों को दे रहे हैं उससे आपको यज्ञ का फल प्राप्त नहीं होगा। जो गायें दूध देने में असमर्थ हैं, उन्हें दान में देता सर्वथा अनुचित है।"

21 फ़रवरी 2018

मंथरा

मंथरा रामायण की एक महत्वपूर्ण और कदाचित सबसे घृणित पात्र मानी जाती है। घृणित इसलिए क्यूँकि उसी के कहने पर कैकेयी ने श्रीराम के लिए १४ वर्षों का वनवास माँगा। संस्कृत में मंथरा का अर्थ कुबड़ा होता है और उसके कुबड़े होने के कारण ही उसे ये नाम मिला होगा। वो राजा दशरथ की तीसरी पत्नी कैकेयी की धाय थी और विवाह के पश्चात कैकेयी के साथ वो भी अयोध्या आ गयी थी। कैकेयी को पालने-पोसने के कारण उसका प्रभाव भी कैकेयी पर बहुत था। रामायण में कई जगह इस बात का वर्णन है जब कैकेयी मंथरा को उसके बड़बोलेपन पर डाँटती है और कहती है कि तुम इतनी बातें मुझसे केवल इसीलिए कर सकती हो क्यूँकि तुम मेरी माता के सामान हो। विशेषकर जब मंथरा कैकेयी को राम के विरूद्ध भड़कती है तो इस वार्तालाप का वर्णन है। रामायण में उसका वर्णन एक ऐसी वाकचतुर नारी के रूप में किया गया है जो तर्क-वितर्क में अत्यंत निपुण है और अपने युक्तिपूर्ण बातों से वो किसी से भी अपनी बात मनवा लेती है।

18 फ़रवरी 2018

जब अर्जुन को विश्वास ना हुआ कि भीष्म मूर्छित हैं

महाभारत में एक पर्व है "विराट पर्व" जिसमे पांडवों के १२ वर्ष के वनवास के बाद बिताये गए एक वर्ष के अज्ञातवास का वर्णन है। ये समय पांडवों ने द्रौपदी सहित विराटराज के राज्य में बिताया था। इस काल में वे सभी विराटराज के राज्य में दास बनकर रहे। युधिष्ठिर कंक, भीम बल्लभ, अर्जुन क्लीव बृहन्नला, नकुल ग्रन्थिक, सहदेव तन्तिपाल और द्रौपदी सैरंध्री के नाम से छुपकर उस नगर में रहे। उधर हस्तिनपुर में दुर्योधन किसी भी परिस्थिति में उन्हें ढूंढ निकलना चाहता था ताकि शर्त के अनुसार वे फिर १२ वर्षों के वनवास पर चले जाएँ।

इसी बीच विराटराज के साले कीचक की नजर सैरंध्री रूपी द्रौपदी पर पड़ी और वो उसे पाने को आतुर हो गया। द्रौपदी की रक्षा के लिए भीम ने कीचक का वध कर दिया। कीचक बहुत बलवान था और उसका वध करना केवल भीष्म, द्रोण, बलराम, कर्ण, दुर्योधन और भीम के लिए ही संभव था। इसीलिए दुर्योधन को ये समझ आ गया कि हो ना हो कीचक का वध भीम ने ही किया है। तो उसका अज्ञातवास भंग करने के लिए पहले दुर्योधन ने सुशर्मा को विराट पर आक्रमण करने को कहा और जब अर्जुन को छोड़कर शेष पांडव युद्ध करने को गए, दुर्योधन ने भीष्म के नेतृत्व में दूसरी और से विराट पर आक्रमण कर दिया।

14 फ़रवरी 2018

महाशिवरात्रि

आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। वैसे तो आज "वैलेंटाइन्स डे" भी है लेकिन ये शायद पहला मौका होगा जब महाशिवरात्रि के कारण अधिकतर लोगों का झुकाव धार्मिक महोत्सव की ओर अधिक होगा। इस बार देश में अलग अलग राज्यों में दो दिन, १३ एवं १४ को महाशिवरात्रि मनाई जा रही है। इसका एक कारण ये भी है कि इस बार महाशिवरात्रि के मुहुर्त १३ तारीख की मध्यरात्रि में पड़ने का अनुमान है। जहाँ बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और उत्तर भारत में इस पर्व को १४ फरवरी को मनाया जा रहा है वहीं दक्षिण भारत जैसे कर्नाटक, आंध्रा एवं तमिलनाडु में इस बार महाशिवरात्रि १३ फ़रवरी को मन ली गयी।

10 फ़रवरी 2018

श्रीकृष्ण के जीवन के अनजाने, आश्चर्जनक एवं दुर्लभ तथ्य

  • कॄष्ण के जन्म के समय और उनकी आयु के विषय में पुराणों व आधुनिक मिथकविज्ञानियों में मतभेद हैं। हालाँकि महाभारत के समय उनकी आयु ७२ वर्ष बताई गयी है। महाभारत के पश्चात पांडवों ने ३६ वर्ष शासन किया और कृष्ण की मृत्यु के तुरंत बाद ही उन्होंने भी अपने शरीर का त्याग कर दिया। इस गणना से कृष्ण की आयु उनकी मृत्यु के समय लगभग १०८ वर्ष थी। ये संख्या हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र मानी जाती है। यही नहीं, परगमन के समय ना कृष्ण का एक भी बाल श्वेत था और ना ही शरीर पर कोई झुर्री थी। 

8 फ़रवरी 2018

जानकी जयंती (सीता नवमी)

आप सभी को जानकी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। राम नवमी की तरह इसे सीता नवमी के नाम से भी जाना जाता है। हालाँकि इस पर्व का प्रचलन बहुत अधिक नहीं है किन्तु इसका रामायण में विशेष महत्त्व वर्णित है और नेपाल में खासकर इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाया जाता है। नेपाल के जानकी मंदिर में इस दिन बहुत बड़ा आयोजन किया जाता है। कहा जाता है कि आज के दिन ही माता सीता भूमि के गर्भ से प्रकट हुई थी और इसी कारण इसे जानकी जयंती के नाम से जाना जाता है।

7 फ़रवरी 2018

पञ्चांग (हिन्दू कैलेंडर)

हिंदू या सनातन धर्म विविधता से परिपूर्ण है या ये कहना अनुचित नहीं होगा कि हिंदू धर्म वास्तव में एक जीवन पद्धति है। हिन्दू धर्म और वैदिक ज्योतिष में व्रत, पर्व, त्यौहार, पञ्चांग और मुहूर्त का विशेष महत्व है जिसके बिना हिन्दू धर्म में किसी उत्सव की कल्पना नहीं की जा सकती है। होली, दिवाली से लेकर हिंदू धर्म में कई शुभ तिथियों और त्यौहारों का बड़ा महत्व है और इन सबों का आधार पञ्चांग ही है।

6 फ़रवरी 2018

जब कृष्ण ने अर्जुन को बताया क्यों है कर्ण मानदानी - दूसरी कथा

पहली कथा में हमने पढ़ा कि कैसे कृष्ण ने कर्ण की दानवीरता अर्जुन को दिखाई। इसके बारे में विस्तार से आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

युद्ध का सत्रहवाँ दिन ख़त्म हो चुका था। आज के युद्ध में कौरव सेना के तीसरे सेनापति महारथी कर्ण की पराजय हो चुकी थी। अर्जुन को कर्ण पर विजय प्राप्त करने के लिए उसपर तब प्रहार करना पड़ा था जब वो धरती में धँसे अपने रथ का चक्र निकाल रहा था। इसी कारण युद्ध के पश्चात अर्जुन का मन अत्यंत व्यथित था।

5 फ़रवरी 2018

भगवान शिव के अवतार

भगवान विष्णु के अवतार के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन भगवान शिव के अवतारों के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। भगवान विष्णु के अवतारों के बारे में विस्तार से यहाँ पड़ें। आज हम आपको भगवान शिव के अवतारों के बारे में बताते हैं। शिव महापुराण में भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है जिनमे से १९ अवतारों के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। वैसे शिव के अंशावतार भी बहुत हुए हैं। यहाँ पर हम भगवान् शिव के ज्योर्तिर्लिंग के बारे में जानकारी नहीं दे रहे हैं क्योंकि वे अवतार नहीं हैं। उनकी व्याख्या हम अलग से विस्तार में करेंगे।