20 फ़रवरी 2019

जब देवर्षि नारद को माया का भ्रम हो गया

एक बार देवर्षि नारद घूमते-घूमते बैकुंठ पहुंचे। वहाँ उन्होंने श्रीहरि विष्णु से पूछा कि "हे भगवन! संसार आपको मायापति कहता है किन्तु ये माया है क्या? मनुष्य क्यों सदैव माया के बंधन में जकड़ा होता है और व्यर्थ दुखी रहता है? जबकि बंधु-बांधव, धन संपत्ति आदि तो केवल मिथ्या है। अगर मनुष्यों को भी वैसा ज्ञान हो जाये जैसा हम देवताओं को होता है तो उन्हें इन व्यर्थ चीजों का दुःख नहीं होगा।" देवर्षि की ऐसी गर्व भरी बातें सुनकर भगवान विष्णु मुस्कुराये और कहा - "कोई बात नहीं। समय आने पर माया क्या है ये तुम्हे समझ आ जाएगा।"

फिर श्रीहरि ने कहा - "चलो थोड़ा पृथ्वी पर घूम आएं।" ऐसा कह कर वो देवर्षि के साथ पृथ्वीलोक पहुँचे। वहाँ एक वृक्ष के नीचे विश्राम करते हुए श्रीहरि ने देवर्षि से कहा कि उन्हें बड़ी प्यास लगी है। आस पास देखो जल है या नहीं। उनकी आज्ञा पाकर देवर्षि जल को ढूंढते हुए कुछ दूर तक चले आये जहाँ उन्हें एक सरोवर दिखा। वहाँ उन्होंने स्नान किया, जल पिया और फिर श्रीहरि के लिए जल लेकर सरोवर से बाहर आये। स्नानादि करने के बाद उन्हें अचानक ही नींद आने लगी और वो वही एक वृक्ष के नीचे थोड़ी देर के लिए लेट गए और उन्हें गहन निद्रा ने घेर लिया। 

18 फ़रवरी 2019

ऋषि मैत्रेय

ऋषि मैत्रेय महाभारत कालीन एक महान ऋषि थे। ये महर्षि पराशर के प्रिय शिष्य और और उनके पुत्र वेदव्यास के कृपा पात्र थे। इन्होने ही दुर्योधन को श्राप दिया था जिससे उसकी मृत्यु भीमसेन के हाथों हुई। इनका नाम इनकी माता "मित्रा" के नाम पर पड़ा और इन्हे अपने पिता "कुषरव" के कारण कौषारन भी कहा जाता है। वैसे तो इन्हे महर्षि पराशर ने समस्त वेदों और पुराणों की शिक्षा दी थी किन्तु ये विशेषकर विष्णु पुराण के महान वक्ता के रूप में विश्व प्रसिद्ध थे। युधिष्ठिर ने अपने राजसू यज्ञ में इन्हे भी आमंत्रित किया था।

16 फ़रवरी 2019

जब ऋषि मार्कण्डेय ने उर्वशी का मान भंग किया

उर्वशी के विषय में हम सभी जानते है। वो देवराज इंद्र की सबसे  सुन्दर अप्सरा और अन्य अप्सराओं की प्रमुख थी। पृथ्वी महान ऋषिओं-मुनिओं से भरी हुई थी और जब भी कोई मनुष्य घोर तपस्या करता था, देवराज इंद्र अपनी कोई अप्सरा उसकी तपस्या भंग करने के लिए भेज देते थे। कदाचित अपने सिंहासन के लिए वे कुछ अधिक ही चिंतित रहते थे। उनकी ही एक अप्सरा मेनका ने राजर्षि विश्वामित्र की तपस्या भंग कर दी थी। स्वयं उर्वशी ने पुरुओं के पूर्वज पुरुरवा की तपस्या भंग की और उनके साथ विवाह भी किया जिससे उन्हें आयु नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी उर्वशी ने ऋष्यश्रृंग के पिता ऋषि विभाण्डक की तपस्या तब भंग की जब अन्य अप्सराएं हार मान बैठी। एक तरह से कहा जाये तो उर्वशी देवराज इंद्र का अचूक अस्त्र थी। किन्तु उर्वशी को भी एक बार मुँह की खानी पड़ी।

14 फ़रवरी 2019

जब रावण और हनुमान के बीच शर्त लगी

जैसा कि हम जानते हैं कि रावण निःसंदेह एक महान योद्धा था। उसने अपने शासन में सातों द्वीपों को जीत लिया था। उसे ब्रह्मा का वरदान प्राप्त था। उसने देवताओं को परास्त किया और नवग्रह उसके राजसभा की शोभा बढ़ाते थे। यहाँ तक कि वो शनि के सर पर अपना पैर रख कर बैठा करता था। यहाँ तक कि उसने भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया था। उसका वीर रूप ऐसा था कि उसके साथ अपने अंतिम युद्ध करते समय स्वयं श्रीराम ने कहा था कि आज रावण जिस रौद्ररूप में है कि उसे पराजित करना समस्त देवताओं के साथ स्वयं देवराज इंद्र के लिए भी संभव नहीं है। जाहिर था कि इतना बलशाली रावण सदैव अपने वीर रस में ही डूबा रहता था। इसी कारण उसे वानरराज बालि और कर्त्यवीर अर्जुन के हाथों पराजय का सामना भी करना पड़ा था लेकिन उसने उन दोनों से कोई बैर नहीं रखा और बालि के साथ उसकी मित्रता तो विश्व प्रसिद्ध थी। उसका इतना अधिक बल ही वास्तव में उसके अभिमान और पतन का कारण बना। 

12 फ़रवरी 2019

क्या आपको महादेव की बहन के बारे में पता है?

भगवान शिव के परिवार के बारे में हम सभी जानते हैं। उनकी पत्नी देवी पार्वती, पुत्र कार्तिकेय एवं गणेश तो प्रसिद्ध है ही, साथ ही साथ उनकी पुत्री अशोकसुन्दरी के बारे में भी जानने को मिलता है। इसके अतिरिक्त उनके अन्य चार पुत्रों (सुकेश, जालंधर, अयप्पा और भूमा) के विषय में भी पुराणों में जानकारी मिलती है। लेकिन क्या आपको महादेव की बहन के बारे में पता है? पुराणों और लोक कथाओं में भगवान शिव की बहन "असावरी देवी" के बारे में भी वर्णन मिलता है जिन्हे स्वयं महादेव ने देवी पार्वती के अनुरोध पर उत्पन्न किया था। तो आइये आज महादेव की बहन के विषय में जानते हैं। 

10 फ़रवरी 2019

सरस्वती, लक्ष्मी एवं गंगा का विवाद

आप सबको वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें। पिछले वर्ष इस अवसर पर हमने देवी सरस्वती पर एक लेख प्रकाशित किया था जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। इस वर्ष हमने सोचा देवी सरस्वती पर कोई विशेष जानकारी लेकर आपके सामने आएं। तो आज हम आपको देवी सरस्वती और देवी गंगा के बीच हुए एक विवाद के विषय में बताएँगे। इस कथा का विवरण कुछ पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। 

एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु की तीन पत्नियाँ - लक्ष्मी, गंगा एवं सरस्वती थी। तीनों सदा नारायण को प्रसन्न रखने का प्रयास करती थी ताकि उनका विशेष प्रेम उन्हें प्राप्त हो सके। एक बार देवी गंगा के प्रति श्रीहरि का अधिक प्रेम देख कर देवी लक्ष्मी एवं माँ सरस्वती को ईर्ष्या हुई। इसपर लक्ष्मी जी ने तो कुछ नहीं कहा किन्तु सरस्वती जी ने इस पक्षपात के लिए भगवान विष्णु को खूब खरी-खोटी सुनाई। लक्ष्मी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया किन्तु क्रोध के कारण वे उसी प्रकार नारायण को उपालम्भ देती रही। साथ ही उन्होंने देवी गंगा को भी दुर्वचन कहे। इस कलह से तंग आकर भगवान विष्णु कुछ समय के लिए वैकुण्ठ से बाहर चले गए।

7 फ़रवरी 2019

पूजा सम्बंधित १० महत्वपूर्ण जानकारियाँ

  1. पूजागृह में दो शिवलिंग, तीन गणेश, दो शंख, दो सूर्य प्रतिमा, तीन देवी प्रतिमा, दो गोमती चक्र या दो शालिग्राम का पूजन नहीं करना चाहिए। 
  2. घर में ९ इंच (२२ सेंटीमीटर) या उससे छोटी प्रतिमा होनी चाहिए। इससे बड़ी प्रतिमा घर के लिए शुभ नहीं होती है। उसे मंदिर में ही स्थापित करना चाहिए। 
  3. देवी की १ बार, सूर्य की ७ बार, गणेश की ३ बार, विष्णु की ४ बार तथा शिव की आधी परिक्रमा करनी चाहिए।

5 फ़रवरी 2019

मौनी अमावस्या

मौनी अमावस्या का वर्णन कुम्भ के सन्दर्भ में मिलता है। जब अमृत को बचाने के लिए जब धन्वन्तरि कलश लेकर भागे, अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर ४ स्थानों पर गिरी जहाँ आज कुम्भ का आयोजन किया जाता है। वे हैं प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन। मौनी अमावस्या को अत्यंत ही शुभ माना जाता है। इस दिन मौन रहकर स्नान करने की प्रथा बहुत पुरानी है। आज के दिन गंगास्नान कई गुणा अधिक फल देता है। यदि ये तिथि सोमवार को पड़े तो इसका महत्त्व बहुत ही बढ़ जाता है और अगर उस समय कुम्भ का ही आयोजन हो रहा हो तब तो मौनी अमावस्या को गंगास्नान का अर्थ एक प्रकार से अमृत में नहाने के समान है। सौभाग्य से इस वर्ष ऐसा ही संयोग पड़ा है जब मौनी अमावस्या सोमवार को है और प्रयाग महाकुम्भ का आयोजन हो रहा है। आइये इसके विषय में कुछ जानते हैं:

3 फ़रवरी 2019

देवर्षि नारद द्वारा प्रह्लाद को गर्भ में दिया गया उपदेश

महाभारत में देवर्षि नारद और युधिष्ठिर का एक संवाद है जहाँ देवर्षि नारद उन्हें भक्तराज प्रह्लाद के विषय में एक अनोखी बात बताते हैं। बात तब की है जब हिरण्यकशिपु तपस्या करने वन में चला गया। उसकी पत्नी कयाधु उस समय गर्भवती थी। हिरण्यकशिपु के जाने के बाद उस अवसर का लाभ उठा कर देवों ने दैत्यों पर आक्रमण कर दिया। जब दैत्य सेनापतियों को देवताओं की भारी तैयारी का पता चला तो उनका साहस जाता रहा। वे उनका सामना नहीं कर सके। मार खाकर स्त्री, पुत्र, मित्र, गुरुजन, महल, पशु और साज-सामान की कुछ चिन्ता न करके वे अपने प्राण बचाने के लिये बड़ी जल्दी में इधर-उधर भाग गये। अपनी जीत चाहने वाले देवताओं ने राजमहल को नष्ट कर दिया और देवराज इन्द्र ने हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु को भी बन्दी बना लिया। कयाधु मारे भय के रो रही थी और इन्द्र उसे बलात् लिये जा रहे थे।