18 फ़रवरी 2018

जब अर्जुन को विश्वास ना हुआ कि भीष्म मूर्छित हैं

महाभारत में एक पर्व है "विराट पर्व" जिसमे पांडवों के १२ वर्ष के वनवास के बाद बिताये गए एक वर्ष के अज्ञातवास का वर्णन है। ये समय पांडवों ने द्रौपदी सहित विराटराज के राज्य में बिताया था। इस काल में वे सभी विराटराज के राज्य में दास बनकर रहे। युधिष्ठिर कंक, भीम बल्लभ, अर्जुन क्लीव बृहन्नला, नकुल ग्रन्थिक, सहदेव तन्तिपाल और द्रौपदी सैरंध्री के नाम से छुपकर उस नगर में रहे। उधर हस्तिनपुर में दुर्योधन किसी भी परिस्थिति में उन्हें ढूंढ निकलना चाहता था ताकि शर्त के अनुसार वे फिर १२ वर्षों के वनवास पर चले जाएँ।

इसी बीच विराटराज के साले कीचक की नजर सैरंध्री रूपी द्रौपदी पर पड़ी और वो उसे पाने को आतुर हो गया। द्रौपदी की रक्षा के लिए भीम ने कीचक का वध कर दिया। कीचक बहुत बलवान था और उसका वध करना केवल भीष्म, द्रोण, बलराम, कर्ण, दुर्योधन और भीम के लिए ही संभव था। इसीलिए दुर्योधन को ये समझ आ गया कि हो ना हो कीचक का वध भीम ने ही किया है। तो उसका अज्ञातवास भंग करने के लिए पहले दुर्योधन ने सुशर्मा को विराट पर आक्रमण करने को कहा और जब अर्जुन को छोड़कर शेष पांडव युद्ध करने को गए, दुर्योधन ने भीष्म के नेतृत्व में दूसरी और से विराट पर आक्रमण कर दिया। ऐसी परिस्थिति में विराट का छोटा बेटा उत्तर सबके सामने अपनी वीरता का ढिंढोरा पीटता हुआ अकेला उनसे युद्ध करने को चला गया। अर्जुन जनता था था कि वो उनके सामने एक क्षण भी नहीं टिक सकता इसीलिए वो भी उत्तर का सारथि बन युद्ध को चला गया। उधर रणक्षेत्र में पहुँच कर जब उत्तर ने हस्तिनापुर की सेना देखी तो मारे भय के भाग निकला। अर्जुन ने उसे पकड़ा और उसे समझाया कि इस प्रकार भागना क्षत्रियों को शोभा नहीं देता। इसपर उत्तर ने पूछा कि जिस सेना में द्रोण, कर्ण, दुर्योधन और अश्वथामा जैसे वीर हैं और जिसका सञ्चालन स्वयं गंगापुत्र भीष्म कर रहे हैं, उसे किस प्रकार परास्त किया जा सकता है। इसपर बृहन्नला रूपी अर्जुन उसे अपने अस्त्र-शस्त्रों के पास ले गया और उसे सत्य बताया कि वही अर्जुन है। जब उत्तर की शंका दूर हुई तो वो अर्जुन का सारथि बन कर अर्जुन को वापस रणक्षेत्र में ले आया।

14 फ़रवरी 2018

महाशिवरात्रि

आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। वैसे तो आज "वैलेंटाइन्स डे" भी है लेकिन ये शायद पहला मौका होगा जब महाशिवरात्रि के कारण अधिकतर लोगों का झुकाव धार्मिक महोत्सव की ओर अधिक होगा। इस बार देश में अलग अलग राज्यों में दो दिन, १३ एवं १४ को महाशिवरात्रि मनाई जा रही है। इसका एक कारण ये भी है कि इस बार महाशिवरात्रि के मुहुर्त १३ तारीख की मध्यरात्रि में पड़ने का अनुमान है। जहाँ बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और उत्तर भारत में इस पर्व को १४ फरवरी को मनाया जा रहा है वहीं दक्षिण भारत जैसे कर्नाटक, आंध्रा एवं तमिलनाडु में इस बार महाशिवरात्रि १३ फ़रवरी को मन ली गयी। कश्मीरी ब्राम्हणों के लिए ये सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्यौहार है और अनंतनाग में विशेषकर इसी बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। यही नहीं, नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर और बांग्लादेश में भी इसे पुरे हर्षोउल्लास से मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में आज के दिन का एक विशेष महत्त्व है क्यूँकि आज का दिन देवाधिदेव भगवान शंकर का माना जाता है। अविवाहित कन्या इसे अपने पसंद के वर को प्राप्त करने हेतु तो विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी आयु हेतु मानती हैं। तो आइये इसके बारे में कुछ रोचक जानकारियाँ प्राप्त करें। 
  • सबसे पहली बात तो ये कि "शिवरात्रि" और "महाशिवरात्रि" एक नहीं हैं। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को अमावस्या के एक दिन पहले की रात्रि शिवरात्रि कहलाती है। इसका अर्थ ये है कि साल में १२ शिवरात्रि होती है किन्तु इन १२ शिवरात्रियों में फाल्गुन (फरवरी-मार्च) महीने की शिवरात्रि का विशेष महत्त्व है इसी कारण इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। 
  • इस वर्ष मासिक शिवरात्रि १५ जनवरी, १४ फरवरी, १५ मार्च, १४ अप्रैल, १३ मई, १२ जून, ११ जुलाई, ९ अगस्त, ८ सितम्बर, ७ अक्टूबर, ५ नवम्बर एवं ५ दिसंबर को आएगी। इनमे से आज का दिन अर्थात १४ फरवरी इन सब में श्रेष्ट महाशिवरात्रि है। 

10 फ़रवरी 2018

श्रीकृष्ण के जीवन के अनजाने, आश्चर्जनक एवं दुर्लभ तथ्य

  • कॄष्ण के जन्म के समय और उनकी आयु के विषय में पुराणों व आधुनिक मिथकविज्ञानियों में मतभेद हैं। हालाँकि महाभारत के समय उनकी आयु ७२ वर्ष बताई गयी है। महाभारत के पश्चात पांडवों ने ३६ वर्ष शासन किया और कृष्ण की मृत्यु के तुरंत बाद ही उन्होंने भी अपने शरीर का त्याग कर दिया। इस गणना से कृष्ण की आयु उनकी मृत्यु के समय लगभग १०८ वर्ष थी। ये संख्या हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र मानी जाती है। यही नहीं, परगमन के समय ना कृष्ण का एक भी बाल श्वेत था और ना ही शरीर पर कोई झुर्री थी। 
  • भगवान विष्णु ने भगवान शिव से उनका बाल रूप देखने का अनुरोध किया और उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान शिव ने बालक के रूप गृहपति अवतार लिया। उसके बाद भगवान शिव ने भी भगवान विष्णु के बाल रूप को देखने की इच्छा जताई। पहले अयोध्या में  श्रीराम के और फिर गोकुल में  कृष्ण अवतार के बाल रूप को देखने के लिए स्वयं भगवान शिव वेश बदल कर पृथ्वी पर आये। श्रीराम और कृष्ण दोनों के आराध्यदेव भगवान शिव ही थे। 

8 फ़रवरी 2018

जानकी जयंती (सीता नवमी)

आप सभी को जानकी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। राम नवमी की तरह इसे सीता नवमी के नाम से भी जाना जाता है। हालाँकि इस पर्व का प्रचलन बहुत अधिक नहीं है किन्तु इसका रामायण में विशेष महत्त्व वर्णित है और नेपाल में खासकर इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाया जाता है। नेपाल के जानकी मंदिर में इस दिन बहुत बड़ा आयोजन किया जाता है। कहा जाता है कि आज के दिन ही माता सीता भूमि के गर्भ से प्रकट हुई थी और इसी कारण इसे जानकी जयंती के नाम से जाना जाता है। 

रामायण में ये कथा बहुत प्रसिद्द है कि एक बार जब जनकपुरी में भयानक अकाल पड़ा तो ऋषियों ने राजा जनक को भूमि यज्ञ करने की सलाह दी ताकि वर्षा हो सके। यज्ञ के पश्चात राजा जनक को स्वर्ण के हल से पृथ्वी को जोतना था। जब वे ऐसा कर रहे थे तो उनका हल एक जगह अटक गया। जब उस जगह को खोदा गया तो वहां से एक कन्या का प्राकट्य हुआ जिसे राजा जनक ने अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। उनकी पुत्री होने के कारण उस कन्या का नाम जानकी पड़ा और चूँकि उनका प्रादुर्भाव भूमि के खुदाई (सीतने) के कारण हुआ था, उनका एक नाम सीता भी पड़ा। बचपन में ही सीता ने भगवान् शिव का महान पिनाक धनुष उठा लिया था जिसे कभी कोई हिला भी नहीं पाया था। इसे देख कर राजा जनक ने सीता के स्वयंवर में ये शर्त रखी कि जो योद्धा पिनाक पर प्रत्यञ्चा चढ़ा देगा उसी से सीता का विवाह किया जाएगा। सभी राजाओं के असफल होने के बाद अंततः श्रीराम ने धनुष को भंग कर सीता से विवाह किया।

7 फ़रवरी 2018

पञ्चांग (हिन्दू कैलेंडर)

हिंदू या सनातन धर्म विविधता से परिपूर्ण है या ये कहना अनुचित नहीं होगा कि हिंदू धर्म वास्तव में एक जीवन पद्धति है। हिन्दू धर्म और वैदिक ज्योतिष में व्रत, पर्व, त्यौहार, पञ्चांग और मुहूर्त का विशेष महत्व है जिसके बिना हिन्दू धर्म में किसी उत्सव की कल्पना नहीं की जा सकती है। होली, दिवाली से लेकर हिंदू धर्म में कई शुभ तिथियों और त्यौहारों का बड़ा महत्व है और इन सबों का आधार पञ्चांग ही है। हिन्दू पञ्चांग हिन्दू समाज द्वारा माने जाने वाला कैलेंडर है और इसके भिन्न-भिन्न रूप में यह लगभग पूरे भारत में माना जाता है। पञ्चांग या शाब्दिक अर्थ है पंच+अंग यानि पाँच अंग, यही हिन्दू काल-गणना की रीति से निर्मित पारम्परिक कैलेण्डर या कालदर्शक को कहते हैं। हिंदू कलैंडर यानि पञ्चांग में भी १२ महीने होते हैं। प्रत्येक महीने में १५ दिन के दो पक्ष होते हैं: शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष

6 फ़रवरी 2018

जब कृष्ण ने अर्जुन को बताया क्यों है कर्ण मानदानी - दूसरी कथा

पहली कथा में हमने पढ़ा कि कैसे कृष्ण ने कर्ण की दानवीरता अर्जुन को दिखाई। इसके बारे में विस्तार से आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

युद्ध का सत्रहवाँ दिन ख़त्म हो चुका था। आज के युद्ध में कौरव सेना के तीसरे सेनापति महारथी कर्ण की पराजय हो चुकी थी। अर्जुन को कर्ण पर विजय प्राप्त करने के लिए उसपर तब प्रहार करना पड़ा था जब वो धरती में धँसे अपने रथ का चक्र निकाल रहा था। इसी कारण युद्ध के पश्चात अर्जुन का मन अत्यंत व्यथित था। तभी कृष्ण वहाँ आये और अर्जुन से दुखी मन से कहा कि "आज महादानी कर्ण का भी पतन हो गया।" कृष्ण को इस प्रकार बोलते देख अर्जुन को आश्चर्य हुआ। उसने सोचा था कि कृष्ण कर्ण को महावीर कहके सम्बोधित करेंगे किन्तु कृष्ण उसे महादानी कह रहे थे। अर्जुन ने यही शंका कृष्ण के समक्ष रखी तो उन्होंने कहा कि कर्ण इस स्थिति में भी दान देने को सक्षम है। इसपर अर्जुन ने कहा "हे माधव! मुझे कर्ण की दानवीरता पर कोई संदेह नहीं किन्तु जो व्यक्ति अपने जीवन की अंतिम साँसे ले रहा हो वो कैसे दान दे सकता है?" इसपर कृष्ण ने अर्जुन को कर्ण के पास चलने को कहा।

5 फ़रवरी 2018

भगवान शिव के अवतार

भगवान विष्णु के अवतार के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन भगवान शिव के अवतारों के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। भगवान विष्णु के अवतारों के बारे में विस्तार से यहाँ पड़ें। आज हम आपको भगवान शिव के अवतारों के बारे में बताते हैं। शिव महापुराण में भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है जिनमे से १९ अवतारों के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। वैसे शिव के अंशावतार भी बहुत हुए हैं। यहाँ पर हम भगवान् शिव के ज्योर्तिर्लिंग के बारे में जानकारी नहीं दे रहे हैं क्योंकि वे अवतार नहीं हैं। उनकी व्याख्या हम अलग से विस्तार में करेंगे। 

शिव के ११ रूद्र अवतार: 
  1. कपाली
  2. पिंगल
  3. भीम
  4. विरुपाक्ष
  5. विलोहित
  6. शास्ता
  7. अजपाद
  8. आपिर्बुध्य
  9. शम्भू
  10. चण्ड
  11. भव