20 अक्तूबर 2019

अतिकाय - २

पिछले लेख में आपने रावण के दूसरे पुत्र अतिकाय के जन्म के बारे में पढ़ा। आपने ये भी पढ़ा कि किस प्रकार अतिकाय ने अपने पराक्रम से महारुद्र को प्रसन्न किया और उनसे कई वरदान और दिव्यास्त्र प्राप्त किये। अतिकाय को भगवान रूद्र से एक दिव्य त्रिशूल भी प्राप्त हुआ जो अचूक था। जब अतिकाय शक्ति संपन्न होकर वापस आया तब रावण की शक्ति और बढ़ गयी। अब आगे...

अतिकाय के जन्म के विषय में एक कथा और आती है कि वो और उसका भाई त्रिशिरा, जो रावण और धन्यमालिनी का पुत्र था दोनों दैत्य मधु और कैटभ के अवतार थे। पिछले जन्म में भगवान विष्णु के द्वारा दोनों का वध किये जाने के बाद दोनों ने उनसे प्रतिशोध के लिए पुनः त्रेतायुग में रावण के पुत्र के रूप में जन्म लिया।

18 अक्तूबर 2019

अतिकाय - १

हम सबने रावण के ज्येष्ठ पुत्र मेघनाद के विषय में जरूर पढ़ा होगा किन्तु रावण के दूसरे पुत्र अतिकाय के विषय में अधिक जानकारी नहीं दी गयी है। इस लेख में रावण के दूसरे पुत्र अतिकाय के विषय में बताया जाएगा। वो रावण के ७ पुत्रों में से एक था जो मंदोदरी से उत्पन्न हुआ था। हालाँकि कई ग्रंथों में रावण की दूसरी पत्नी धन्यमालिनी को अतिकाय की माता बताया जाता है। धन्यमालिनी मंदोदरी की छोटी बहन थी जो मय दानव और हेमा अप्सरा की पुत्री थी। 

16 अक्तूबर 2019

भूरिश्रवा - २

पिछले लेख में आपने भूरिश्रवा के वंश के बारे में पढ़ा। वो भी कुरुवंशी थे और धृतराष्ट्र के भाई और भीष्म के भतीजे थे। उनके पिता सोमदत्त और सात्यिकी के पिता शिनि की प्रतिद्वंदिता के कारण कुरुओं और यादवों में वैमनस्व बढ़ गया। दोनों ने भगवान शंकर से पुत्र की कामना की जिससे भूरिश्रवा और सात्यिकी का जन्म हुआ। अब आगे...

14 अक्तूबर 2019

भूरिश्रवा - १

भूरिश्रवा महाभारत के सबसे प्रसिद्ध योद्धाओं में से एक थे। इन्होने महाभारत युद्ध में कौरवों के पक्ष से युद्ध किया था। कौरव सेना के प्रधान सेनापति भीष्म ने अपनी ११ अक्षौहिणी सेना के लिए जिन ११ सेनापतियों का चयन किया था, भूरिश्रवा उन सेनापतियों में से एक थे। भूरिश्रवा का वध युद्ध के १४वें दिन सात्यिकी ने किया था। वास्तव में भूरिश्रवा कुरुवंशी ही थे और महाभारत युद्ध में उनके साथ उनके पिता और दादा ने भी युद्ध किया था। 

12 अक्तूबर 2019

शरद पूर्णिमा

कल शरद पूर्णिमा का पर्व है। इस पर्व का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व है। आश्विन महीने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। शरद का एक अर्थ चन्द्रमा भी है और इस दिन चाँद की किरणों का अपना एक अलग ही महत्त्व होता है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र की किरणों में स्वयं अमृत समाहित होता है। यही कारण है कि आज के दिन गावों में लोग खुले आकाश एवं चांदनी के नीचे सोते हैं। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रौशनी में रहने से कई प्रकार के रोग समाप्त हो जाते हैं। 

10 अक्तूबर 2019

रावण का मानमर्दन २: असुरराज शंभर

ये रावण के मानमर्दन श्रृंखला का दूसरा लेख है। इससे पहले के लेख में हमने ये बताया था कि किस प्रकार रावण दैत्यराज बलि के हाथों परास्त होने के बाद अपमानित होता है। इस लेख के बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ें। इस लेख में हम असुरराज शंभर के हाथों रावण के पराजय की कथा बताएंगे। शंभर वैजंतपुर के सम्राट थे। उनकी पत्नी माया मय दानव की पुत्री एवं रावण की पत्नी मंदोदरी की बड़ी बहन थी। इस प्रकार रावण शंभर का सम्बन्धी था।

8 अक्तूबर 2019

माद्री - २

पिछले लेख में अपने पढ़ा कि किस प्रकार दिग्विजय के दौरान हस्तिनापुर के नरेश पाण्डु को अपनी पहली पत्नी कुंती के रहते हुए भी माद्री से विवाह करना पड़ता है। हालाँकि उसके बाद भी कुंती और माद्री के बीच सम्बन्ध सौहार्दयपूर्ण ही रहता है। उसके बाद वे तीनों एकांतवास के लिए वन को जाते हैं और किंदम ऋषि के आश्रम में ठहरते हैं। अब आगे...

6 अक्तूबर 2019

माद्री - १

आज पंजाब में जिस स्थान पर रावी और चिनाब नदियों का मिलन होता है उसे ही पहले मद्रदेश कहा जाता था। वहाँ के एक राजा थे भगवान, जिन्होंने लम्बे समय तक मद्र पर शासन किया। मद्रदेश उस समय आर्यावर्त के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली राज्यों में से एक माना जाता था। उनकी दो संतानें थी, एक पुत्र और एक पुत्री। पुत्र का नाम शल्य और पुत्री का माद्री था। 

4 अक्तूबर 2019

माँ गौरी और उनके वाहन की कथा

माता सती की मृत्यु के उपरांत भगवान शिव बैरागी हो गए। तब सती ने पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। उस जन्म में भी उनका महादेव के प्रति अनुराग था और इसी कारण उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की और अंततः उन्हें पति के रूप में प्राप्त किया। दोनों का विवाह बड़ी धूम धाम से हुआ और फिर वे दोनों अपने निवास कैलाश पर लौट आये और कुछ काल उन्होंने बड़े सुख से बिताये। 

एक दिन महादेव और देवी पार्वती कैलाश में बैठे हास-परिहास कर रहे थे कि अचानक महादेव ने उन्हें परिहास में "काली" शब्द से सम्बोधित कर दिया। महादेव का ये सम्बोधन माता पार्वती को चुभ गया और वे तत्काल अपने श्याम रंग से मुक्ति पाने हेतु तपस्या के लिए निकल गयी। महादेव ने उन्हें रोकने का बड़ा प्रयत्न किया किन्तु उन्होंने ये निश्चय कर लिया था कि वो गौर वर्ण प्राप्त कर के ही रहेंगी। 

2 अक्तूबर 2019

माँ दुर्गा के १०८ नाम

माता पार्वती ही संसार की समस्त शक्तियों का स्रोत हैं। उन्ही का एक रूप माँ दुर्गा को भी माना जाता है। उनपर आधारित ग्रन्थ "दुर्गा सप्तसती" में माँ के १०८ नामों का उल्लेख है। प्रातःकाल इन नामों का स्मरण करने से मनुष्य के सभी दुःख दूर होते हैं। आइये उन नामों और उनके अर्थों को जानें:
  1. सती: भगवान शंकर की पहली पत्नी। अपने पिता प्रजापति दक्ष के यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाली इन देवी का माहात्म्य इतना है कि उसके बाद पति परायण सभी स्त्रियों को सती की ही उपमा दी जाने लगी।
  2. साध्वी: ऐसी स्त्री जो आशावादी हो।
  3. भवप्रीता: जिनकी भगवान शिव पर अगाध प्रीति हो। 
  4. भवानी: समस्त ब्रह्माण्ड ही जिनका भवन हो।