19 जनवरी 2019

कृष्ण का वो पुत्र जिसके कारण सम्पूर्ण यदुवंश का नाश हो गया

साम्ब कृष्ण और उनकी दूसरी पत्नी जांबवंती के ज्येष्ठ पुत्र थे जिसका विवाह दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से हुआ था। जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तो गांधारी ने कृष्ण को इसका दोषी मानते हुए यदुकुल के नाश का श्राप दे दिया जिसे कृष्ण ने सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने ये भी कहा कि समय आने पर वे और बलराम स्वयं यदुकुल का नाश कर देंगे। हालाँकि किसी ने उस समय ये नहीं सोचा था कि कृष्ण के कुल का नाश उनके अपने पुत्र साम्ब के कारण होगा। महाभारत को समाप्त हुए ३६ वर्ष बीत चुके थे। एक बार महर्षि दुर्वासा एवं अन्य ऋषि द्वारका पधारे। ऋषियों का इतना बड़ा झुण्ड देख कर साम्ब और उनके मित्रों ने उनसे ठिठोली करने की सोची।

17 जनवरी 2019

कुम्भ मेला

इस वर्ष की मकर संक्रांति अत्यंत पवित्र और शुभ है क्यूंकि उसके आरम्भ के साथ ही महाकुम्भ का भी शुभारम्भ हुआ। तो आज हम बात करते हैं कुंभ मेले की या कुंभ पर्व की। हिंदू धर्म में कुंभ पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है। यह एक ऐसा पर्व है जो वैज्ञानिक होने के साथ-साथ पूर्ण प्रमाणिकता लिए हुए है। यह बहुत ही प्रामाणिक है और जिस प्रकार हमारी १२ राशियां है उसी के अनुसार ग्रहों की चाल एवं उनका समय निश्चित है। ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान है, और एक प्रमाणिक विज्ञान है क्योंकि हमारे मनीषियों ने हजारों साल पहले पृथ्वी पर रहते हुए ही आकाशगंगा के अनगिनत ग्रहों के बारे में, उनकी चाल के बारे में, उनके प्रभाव के बारे में प्रमाणिक वर्णन कर दिया था और यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इसी के अनुसार ही कुंभ मेले का आयोजन भी किया जाता रहा है और आगे भी किया जाता रहेगा। कुम्भ मेला विश्व में होने वाला सबसे बड़ा मेला है। विशेषकर प्रयाग में होने वाले महाकुम्भ में प्रत्येक दिन २ करोड़ से भी अधिक लोग गंगास्नान करते है। ऐसा उदाहरण विश्व में कोई दूसरा नहीं है। कहा जाता है कि प्रयाग में होने वाले कुम्भ मेले को चन्द्रमा से भी देखा जा सकता है। हमारे पुराणों में जो भी वर्णित है, वह पूर्ण प्रमाणिक है एवं ब्रह्म के समान है क्योंकि शब्द अपने आप में ही ब्रह्म कहे गए हैं। इसी के बारे में कुछ जानकारी प्रस्तुत है:

15 जनवरी 2019

विजेता - धार्मिक कहानी प्रतियोगिता २ - "भक्तवत्सला शीतला माता"

एक बार देवर्षि नारद "नारायण! नारायण!" का जाप करते हुए तीनों लोकों की यात्रा पर निकले। सभी देवों के दर्शन करते हुए "शीतला माता" के धाम पहुँचे। ध्यान-मुद्रा में बैठी मातारानी को मुस्कुराते हुए देख विस्मित महर्षि ने अभिवादन के साथ ही कहा -"माँ! आज तो आपके मुख पर अद्वितीय तेज और प्रसन्नता झलक रही है। कौन है, जिसने आपके मुख पर प्रसन्नता बिखेर दी है?" माता ने उसी स्मित हास्य के साथ कहा - वत्स! एक निश्छल हृदय भक्त के अतिरिक्त और कौन हो सकता है?" तब महर्षि ने आश्चर्य से पूछा - "माता! आपके तो असंख्य भक्त हैं। फिर ऐसा कौन भक्तविशेष है जो आपके ह्रदय के इतने समीप है?" इसपर देवी ने कहा - "देवर्षि! कुण्डिनपुर में रहने वाली निर्मला ने अपनी सच्ची व निस्पृह भक्ति से मेरे हृदय को जीत लिया है।" तब देवर्षि ने मुस्कुराते हुए कहा - "अगर आज्ञा हो तो मैं भी आपकी इस विशेष भक्त से मिल आऊं।" तब देवी ने हँसते हुए कहा - "देवर्षि! मैं आपकी प्रकृति से अनभिज्ञ नहीं हूँ। मैं जानती हूँ कि आप निर्मला की परीक्षा लेना चाहते हैं। अगर ऐसा है तो आप अवश्य अपने मन की करें।"

14 जनवरी 2019

मकर संक्रांति विशेष

आप सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ। इस वर्ष मकर संक्रांति १४ जनवरी सायंकाल में प्रवेश कर रहा है और १५ जनवरी को मनाया जायेगा। मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है इसपर एक लेख पिछले वर्ष इसी दिन धर्मसंसार पर प्रकाशित किया गया था जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। इस वर्ष पंडित रोहित वशिष्ठ ने मकर संक्रांति के विषय में कुछ ज्ञानवर्धक जानकारी हमें भेजी है: 

मुहूर्त 
  • इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश १४ जनवरी २०१९ को रात्रि ७:५० मिनट पर हो रहा है।
  • स्नान दान आदि के लिए मकर सक्रांति का समय १५ जनवरी २०१९ को प्रातः ७:१९ से आरंभ हो रहा है।
  • पुण्य काल १५ जनवरी २०१९ को प्रातः ७:१९ से आरंभ होकर १२:३० तक रहेगा। 
  • महापुण्य काल १५ जनवरी २०१९ को प्रातः ७:१९ से प्रातः ९:०३ तक है।

11 जनवरी 2019

जय श्रीराम ने पतंग उड़ाई

संक्रांति का माहौल है और इस समय पूरे देश में पतंगबाजी का मजा लिया जाता है। पतंग का इतिहास वैसे तो बहुत पुराना नहीं है लेकिन पुराणों में एक वर्णन ऐसा भी आता है जब श्रीराम ने भी पतंग उड़ाई थी। ये घटना रामचरितमानस के बालकाण्ड में वर्णित है। कथा इस प्रकार है कि श्रीराम और उनके तीनों भाई बालक थे और महाबली हनुमान भी बालरूप में श्रीराम के दर्शनों को अयोध्या आये हुए थे। संक्रांति के दिन सभी बालकों ने पतंग उड़ाने का मन बनाया। श्रीराम अपने भाइयों और हनुमान के साथ खुले मैदान में आ गए और श्रीराम ने अपनी पतंग उड़ाई। उन्होंने अपनी पतंग की इतनी ढील दी कि वो स्वर्गलोक तक जा पहुँची। इस बारे में तुलसीदास जी लिखते हैं:

9 जनवरी 2019

अयप्पा स्वामी

अयप्पा स्वामी भगवान शिव के छः पुत्रों में से एक हैं। उनके जन्म की कथा बहुत पहले महिषासुर के समय से शुरू होती है। महिषासुर की एक छोटी बहन थी महिषा। माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने के पश्चात उसने देवताओं से प्रतिशोध लेने के लिए ब्रह्माजी की घोर तपस्या की। ब्रह्मदेव उसकी तपस्या से प्रसन्न हुए और वरदान माँगने को कहा। महिषी ने उनसे अमरत्व का वरदान माँगा किन्तु उन्होंने मना कर दिया। तब महिषी ने उनसे ये वरदान माँगा कि उनका वध केवल भगवान शिव और नारायण के पुत्र द्वारा ही संभव हो। ब्रह्मदेव ने उसे ये वरदान दे दिया और महिषी ने समझा की अब वो अमर हो गयी है क्यूंकि शिव और विष्णु का संयोग तो असंभव है। फिर उनका पुत्र कैसे पैदा होगा? ये वरदान प्राप्त कर वो दैत्या पृथ्वी पर उत्पात मचाने लगी। उसके वध के लिए देवता चिंतित हो गए किन्तु हरि और हर का संयोग कैसे संभव था? प्रकृति में जो कुछ भी होता है किसी ना किसी कारणवश होता है। उसी प्रकार नियति ने भी महिषी के अंत की प्रक्रिया आरम्भ कर दी थी।

7 जनवरी 2019

राशियों के आराध्य देव

हिन्दू धर्म और ज्योतिष में १२ राशियाँ बताई गयी है जिसके अपने अधिपति होते हैं। प्राचीन ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक राशि के आराध्य देव बताये गए हैं। अगर उस राशि का जातक अपने राशि के आराध्य देव की पूजा करता है तो उसके समस्त ग्रहदोष समाप्त हो जाते हैं। हालाँकि कोई भी व्यक्ति अपनी श्रद्धा अनुसार किसी भी राशि के आराध्य की पूजा कर सकता है। इससे उसे शुभ फल ही प्राप्त होता है। तो आइये जानते हैं कौन सी राशि के कौन आराध्य देव हैं। 

  1. मेष: गजानन 
  2. वृष: कुलस्वामिनी 
  3. मिथुन: कुबेर 
  4. कर्क: भगवान शंकर 
  5. सिंह: सूर्यदेव 
  6. कन्या: कुबेर 
  7. तुला: कुलस्वामिनी 
  8. वृश्चिक: गणपति 
  9. धनु: दत्तात्रेय 
  10. मकर: शनिदेव, हनुमान 
  11. कुम्भ: शनि, हनुमान 
  12. मीन: दत्तात्रेय

5 जनवरी 2019

युयुत्सु

युयुत्सु महाभारत का एक महत्वपूर्ण पात्र है। महाभारत के युद्ध के अंत में बचे हुए १८ योद्धाओं में से एक वो भी था। दुर्योधन एवं अन्य कौरवों की भांति युयुत्सु भी धृतराष्ट्र पुत्र था किन्तु उसकी माता गांधारी नहीं थी। ऐसा वर्णित है कि महारानी गांधारी की एक वैश्य दासी थी जिसका नाम सौवाली (सुग्धा) था। वो गांधारी की सिर्फ दासी ही नहीं अपितु अभिन्न सखी भी थी जो गांधारी के विवाह के पश्चात उसके साथ गांधार से हस्तिनापुर आयी थी और मृत्युपर्यन्त उसके साथ ही रही।

3 जनवरी 2019

ऋष्यशृंग

ऋष्यश्रृंग ऋषि का वर्णन पुराणों एवं रामायण में आता है। ब्रह्मदेव के पौत्र महर्षि कश्यप के एक पुत्र थे विभाण्डक। वे स्वाभाव से बहुत उग्र और महान तपस्वी थे। एक बार उनके मन में आया कि वे ऐसी घोर तपस्या करें जैसी आज तक किसी और ने ना की हो। इसी कारण वे घोर तप में बैठे। उनकी तपस्या इतनी उग्र थी कि स्वर्गलोक भी तप्त हो गया। जब देवराज इंद्र ने देखा कि ऋषि विभाण्डक घोर तप कर रहे हैं तो उन्होंने उनकी तपस्या भंग करने के लिए कई अप्सराएं भेजी किन्तु वे उनका तप तोड़ने में असफल रहीं। तब इंद्र ने उर्वशी को विभाण्डक के पास भेजा। जब विभाण्डक ऋषि ने उर्वशी को देखा तो उसके सौंदर्य देखकर मुग्ध हो गए और उन्होंने उर्वशी के साथ संसर्ग किया जिससे उनकी तपस्या भंग हो गयी।