समुद्र मंथन

समुद्र मंथन
समुद्र मंथन हिन्दू धर्म की सबसे रोचक कथाओं में से एक है। इसका विस्तृत वर्णन विष्णु पुराण में दिया गया है। समुद्र मंथन क्यों करना पड़ा इसके ऊपर हम पहले ही एक लेख लिख चुके हैं और वीडियो बना चुके हैं। उसे आप यहाँ देख सकते हैं। समुद्र मंथन कहाँ हुआ उसके विषय में भी एक वीडियो बनाया जा चुका है जिसे आप यहाँ देख सकते हैं।

क्या भगवान शंकर वास्तव में भस्म हो जाते यदि भस्मासुर उनके सर पर हाथ रख देता?

क्या भगवान शंकर वास्तव में भस्म हो जाते यदि भस्मासुर उनके सर पर हाथ रख देता?
हम सब ने भस्मासुर की कथा सुनी या पढ़ी है। उस पर बने कई फिल्म और टीवी सीरियल भी देख चुके हैं। इन आधुनिक कृतियों द्वारा जनमानस में जो सबसे बड़ी भ्रान्ति फैलाई जाती है वो ये है कि त्रिलोक के स्वामी महादेव भी किसी के डर से मारे मारे फिर सकते हैं। ये महादेव का घोर अपमान है। इस बारे में चर्चा करने से पहले भस्मासुर के विषय में जान लेते हैं।

क्या आप भगवान शिव के दशावतार के विषय में जानते हैं?

क्या आप भगवान शिव के दशावतार के विषय में जानते हैं?
हम सभी ने भगवान विष्णु के प्रसिद्ध दशावतारों के विषय में जानते हैं किन्तु क्या आपको महादेव के दशावतार के विषय में पता है? आम तौर पर जब भी महादेव के अवतरण की बात होती है तो उनके विषय में द्वादश ज्योतिर्लिंग, ११ रुद्रावतार एवं उनके १९ अवतारों के बारे में जानकारी मिलती है। किन्तु श्रीहरि की भांति ही महादेव के भी दशावतार हैं। महादेव के ये दस अवतार मूलतः तंत्र विद्या से सम्बंधित हैं और इन्हे ही तंत्र शास्त्र का जनक माना गया है।

श्रीकृष्ण पर आक्रमण के समय किन किन राजाओं ने जरासंध का साथ दिया?

श्रीकृष्ण पर आक्रमण के समय किन किन राजाओं ने जरासंध का साथ दिया?
हम सभी श्रीकृष्ण और जरासंध की प्रतिद्वंदिता के विषय में जानते हैं। श्रीकृष्ण द्वारा अपने जमाता कंस के वध के पश्चात उसने १७ बार मथुरा पर आक्रमण किया किन्तु उन सभी युद्ध में उसे मुँह की खानी पड़ी। श्रीकृष्ण और बलराम हर बार उसकी पूरी सेना का नाश कर उसे जीवित छोड़ देते थे। वास्तव में वे दोनों चाहते थे कि जरासंध बार बार संसार के सभी पापियों को लेकर आये ताकि वे उनका एक बार में ही संहार कर सकें।

एकलव्य - क्यों माँगा गुरु द्रोण ने अंगूठा? क्यों किया श्रीकृष्ण ने वध?

एकलव्य - क्यों माँगा गुरु द्रोण ने अंगूठा? क्यों किया श्रीकृष्ण ने वध?
एकलव्य महाभारत का एक गौण पात्र है। यदि मूल महाभारत की बात की जाये तो एकलव्य के बारे में बहुत अधिक नहीं लिखा गया है। आज जो भी जानकारियां हमें एकलव्य के विषय में मिलती हैं वो अधिकतर लोक कथाओं के रूप में ही है लेकिन उन कथाओं और मान्यताओं में बहुत अधिक दुष्प्रचार किया गया है। तो आइये एकलव्य के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं और इन मिथ्या जानकारियों को भी समझते हैं।

"सेंगोल" वास्तव में क्या है?

आज कल सेंगोल की बहुत चर्चा हो रही है। इसके सम्बन्ध में कई भ्रांतियाँ भी फ़ैल रही है। अधिकतर लोग सेंगोल का ऐतिहासिक महत्त्व बता रहे हैं किन्तु आपको जानकर अच्छा लगेगा कि सेंगोल का पौराणिक महत्त्व भी बहुत अधिक है। सहस्त्रों वर्षों से सेंगोल का वर्णन हमारे पौराणिक ग्रंथों में है, विशेषकर इसका वर्णन महाभारत में किया गया है, पर किसी और नाम से। इसके विषय में लगभग हर व्यक्ति जनता होगा पर इस शब्द "सेंगोल" से बहुत कम लोग परिचित हैं। तो आइये हम सेंगोल के विषय में कुछ जानते हैं।

जब हनुमान जी ने बलराम जी, गरुड़, सुदर्शन एवं देवी सत्यभामा का अभिमान भंग किया

जब हनुमान जी ने बलराम जी, गरुड़, सुदर्शन एवं देवी सत्यभामा का अभिमान भंग किया
महाबली हनुमान अष्टचिरंजीवियों में से एक हैं। उन्हें कल्प के अंत तक जीवित रहने का वरदान प्राप्त है। यही कारण है कि रामायण के साथ साथ हनुमान जी का वर्णन महाभारत में भी आता है। महाभारत में उनके द्वारा भीम के अभिमान को भंग करने और अर्जुन के रथ की रक्षा करने के विषय में तो हम सभी जानते ही हैं किन्तु हरिवंश पुराण में एक वर्णन ऐसा भी आता है जब श्रीकृष्ण ने बजरंगबली के द्वारा बलराम जी, सुदर्शन चक्र, गरुड़ एवं देवी सत्यभामा का अभिमान भंग करवाया था।