महाराज विक्रमादित्य

महाराज विक्रमादित्य
भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे महान सम्राट हुए हैं जिन्होंने अपनी वीरता और न्यायप्रियता से इतिहास पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। महाराज विक्रमादित्य उन्ही महान राजाओं में से एक हैं। हिन्दू धर्म में नव वर्ष का आरम्भ विक्रम सम्वत के आधार पर ही किया जाता है और ये विक्रम सम्वत महाराज विक्रमादित्य के नाम से ही आरम्भ हुआ। बच्चों में जो बेताल पच्चीसी एवं सिंहासन बत्तीसी कथाएं प्रसिद्ध हैं उसका सम्बन्ध भी महाराज विक्रमादित्य से ही है। यही नहीं उन्हें आधुनिक काल का अंतिम चक्रवर्ती सम्राट भी माना जाता है। आइये इनके विषय में कुछ जानते हैं।

गांधार राज सुबल

गांधार राज सुबल
महाराज सुबल गांधार के राजा थे और शकुनि एवं गांधारी के पिता थे। उन्हें गांधार के सबसे प्रसिद्ध एवं न्याय प्रिय राजाओं में से एक माना जाता है। सुबल का विवाह सुधर्मा नामक राजकुमारी से हुआ जिनसे उन्हें पाँच पुत्र एवं एक पुत्री की प्राप्ति हुई। हालाँकि इन पुत्र-पुत्रियों का वर्णन महाभारत और अन्य ग्रंथों में अलग-अलग है। महाभारत में सुबल का बहुत अधिक वर्णन नहीं दिया गया है किन्तु महाभारत पर आधारित कुछ अन्य ग्रंथों में सुबल के जीवन का कुछ विस्तार देखने को मिलता है।

श्री कष्टभंजन हनुमान

श्री कष्टभंजन हनुमान
गुजरात के बोटाद जिले में भावनगर के पास एक गाँव सारंगपुर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ पर स्थति श्री कष्टभंजन हनुमान का मंदिर है। इन्हे सारंगपुर का सम्राट माना जाता है और लोग इन्हे "बड़े हनुमानजी" एवं "महाराजाधिराज" के नाम से भी जानते हैं। इस सुन्दर मंदिर में हनुमान जी एक स्वर्ण सिंहासन पर विद्यमान रहते हैं। हालाँकि उनका ये रूप उनके आम साधारण रूप से थोड़ा अलग है। स्वर्ण मंदिर में, स्वर्ण गदा धारण किये हुए कष्टभंजन हनुमान प्रत्येक दिन श्रृंगार के बाद बहुत मनोहारी लगते हैं।

युवनाश्व - श्रीराम के वो पूर्वज जिन्होंने पुरुष होते हुए भी गर्भ धारण किया

युवनाश्व - श्रीराम के वो पूर्वज जिन्होंने पुरुष होते हुए भी गर्भ धारण किया
आज के आधुनिक युग में हम नए नए अविष्कार कर रहे हैं। विगत कुछ वर्षों से ये बात सिद्ध हो चुकी है कि ऐसी कई/अधिकतर चीजें जो आज हम बना रहे हैं, उसका वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में पहले ही दे दिया गया था। ये इस बात को सिद्ध करता है कि सनातन हिन्दू धर्म ना केवल अति-प्राचीन है अपितु बहुत वैज्ञानिक भी। आज हम जो सेरोगेसी की बात करते हैं वो सदियों पहले महाभारत में वर्णित था। उसी प्रकर आज के वैज्ञानिक इस बात पर भी शोध कर रहे हैं कि क्या पुरुष कृत्रिम रूप से गर्भ धारण कर सकते हैं? आज की ये कथा इसी बात का उत्तर है।

महाकुंभ

हम सभी जानते हैं कि वर्तमान में हरिद्वार में कुंभ पर्व मनाया जा रहा है।सत्य सनातन धर्म में कुंभ पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। पुराणों के अनुसार हिमालय के उत्तर में क्षीरसागर है, जहां देवासुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। मंथन दंड था- मंदर पर्वत, रज्जु था वासुकि तथा स्वयं विष्णु ने कूर्म रूप में मंदर को पीठ पर धारण किया था। समुद्र मंथन के समय क्रमश: पुष्पक रथ, ऐरावत, परिजात पुष्प, कौस्तुभ, सुरभि, अंत में अमृत कुंभ को लेकर स्वयं धन्वंतरि प्रकट हुए थे।

श्री कुक्के सुब्रमण्य

श्री कुक्के सुब्रमण्य
जब आप कर्णाटक के मैंगलोर जिले के सुल्लिया तालुका में पहुँचते हैं तो जो सबसे प्रसिद्ध नाम आपको सुनाई देता है वो है सुब्रमण्यम नामक गाँव का। वो इस कारण कि इस गाँव में श्री कुक्के सुब्रमण्य का दर्शनीय मंदिर स्थित है। ना केवल आस पास के इलाकों में अपितु पूरे कर्णाटक में ये स्थान सर्प दोषों के निवारण हेतु सबसे उत्तम स्थान माना जाता है। नाग वैसे ही हिन्दू धर्म में अपना अलग स्थान रखते हैं और उनके प्रति समर्पित होने के कारण ही इस मंदिर की अपनी एक अलग विशेषता है।

भगवान शिव की बारात

भगवान शिव की बारात
आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकमाएँ। आज इस अवसर पर हम भगवान शिव की अनूठी बारात के विषय में चर्चा करेंगे जिसका विस्तृत वर्णन श्री रामचरितमानस में दिया गया है। हमारे पौराणिक ग्रंथों में अनेकानेक देवी-देवताओं के विवाह का वर्णन है किन्तु जैसी भव्य बारात का वर्णन वर्णन भगवान शंकर और माता पार्वती के विवाह के सन्दर्भ में दिया गया है उसकी कोई तुलना नहीं है।