- युधिष्ठिर: ३६ वर्ष
- परीक्षित: ६० वर्ष
जब दो ब्रह्मास्त्रों का सामना हुआ - अर्जुन और अश्वत्थामा का युद्ध
महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। कौरवों की ओर से केवल तीन महारथी हीं जीवित बचे थे - अश्वत्थमा, कृपाचार्य और कृतवर्मा। दुर्योधन की मृत्यु से दुखी अश्वत्थामा ने पांडवों को छल से मारने की प्रतिज्ञा की। उसने दुर्योधन को मरते हुए वचन दिया था कि जैसे भी हो वो पांचों पांडवों को अवश्य मार डालेगा। कृपाचार्य ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की पर अंततः उन्होंने भी उसका साथ देने की स्वीकृति भर दी।
जब भगवान शिव ने माता सती का त्याग किया
सभी लोग जानते हैं कि सती ने अपने पिता द्वारा शिव को यज्ञ में आमंत्रित न करने और उनका अपमान करने पर उसी यज्ञशाला में आत्मदाह कर लिया था लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इसकी भूमिका बहुत पहले हीं लिखी जा चुकी थी। ये कथा रामचरितमानस के बालकाण्ड में दी गयी है।
महर्षि कश्यप का वंश
महर्षि कश्यप परमपिता ब्रह्मा के मानस पुत्र मरीचि के पुत्र थे, इस प्रकार वे ब्रह्मा के पोते हुए। महर्षि कश्यप ने ब्रह्मापुत्र प्रजापति दक्ष की १७ कन्याओं से विवाह किया। संसार की सारी जातियां महर्षि कश्यप की इन्ही १७ पत्नियों की संतानें मानी जाति हैं। इसी कारण महर्षि कश्यप की पत्नियों को लोकमाता भी कहा जाता है। प्रजापति दक्ष की सभी पुत्रियों और उनके पति के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ जाएँ। उनकी पत्नियों और उनसे उत्पन्न संतानों का वर्णन नीचे है:
महाभारत में १८ संख्या का महत्त्व
महाभारत कथा में १८ (अठारह) संख्या का बड़ा महत्त्व है। महाभारत की कई घटनाएँ १८ संख्या से सम्बंधित है। कुछ उदाहरण देखें:
- महाभारत का युद्ध कुल १८ दिनों तक हुआ था।
- कौरवों (११ अक्षौहिणी) और पांडवों (७ अक्षौहिणी) की सेना भी कुल १८ अक्षौहिणी थी।
महापुराण
महाभारत के बाद महर्षि व्यास की सबसे प्रमुख कृति पुराण ही मानी जाती है। महर्षि व्यास ने कुल १८ पुराण लिखे जिन्हे महापुराण भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य ऋषियों द्वारा लिखी गयी कृतियों को उप पुराण भी कहा जाता है। इन पुराणों में समाहित ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। जो भी ज्ञान पृथ्वी पर है वो सभी इन पुराणों में वर्णित है। मूलतः पुराणों को दो भागों में विभक्त किया जाता है:
- महापुराण: महर्षि व्यास द्वारा लिखित
- उप पुराण: अन्य ऋषियों द्वारा लिखित
ब्रह्मा की आयु
हिन्दू धर्म में चतुर्युगी व्यवस्था है जिनमे चार युग होते हैं - सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। हिन्दू धर्म की काल गणना हमारे ग्रंथों की सबसे रोचक जानकारियों में से एक है। इसके विषय में जितना भी जाना जाये वो कम है। इसके अतिरिक्त आश्चर्यजनक रूप से हमारी सहस्त्रों वर्षों पुरानी गणना वैज्ञानिक रूप से बिलकुल सटीक बैठती है। आइये इस महत्वपूर्ण विषय को जानते हैं।
- ६ श्वास से एक विनाड़ी बनती है।
- १० विनाडियों से एक नाड़ी बनती है।
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