क्या राधा का वर्णन महाभारत में है?

क्या राधा का वर्णन महाभारत में है?
श्रीकृष्ण और श्री राधा दोनों ही भारत की संस्कृति में इस तरह रचे बसे हैं कि इन दोनों को अलग-अलग करके देखना एक प्रकार से असंभव है। किन्तु बहुत लोगों को ये जान कर हैरानी होगी कि राधा का वर्णन मूल व्यास महाभारत में है ही नहीं।

अजामिल - वो पापी जिसने स्वर्ग प्राप्त किया

अजामिल - वो पापी जिसने स्वर्ग प्राप्त किया
प्राचीन काल में अजामिल नामक एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण था। उसके पिता ने उसे बहुत अच्छी शिक्षा और संस्कार दिए थे और वो भी सदैव अपने पिता की सेवा एवं ईश्वर की साधना में लगा रहता था। उसके पिता ऐसे आदर्श पुत्र को प्राप्त कर अपने आप को धन्य समझते थे। समय आने पर उन्होंने अजामिल का विवाह एक सुन्दर एवं सुशील ब्राह्मण कन्या से कर दिया। एक आदर्श पुत्र की भांति ही अजामिल एक आदर्श पति भी साबित हुआ और दोनों सुख पूर्वक रहने लगे।

शिवलिंग में "लिंग" शब्द का वास्तव में क्या अर्थ है?

शिवलिंग में "लिंग" शब्द का वास्तव में क्या अर्थ है?
विगत कुछ समय से बहुत ही सुनियोजित ढंग से हमारे धर्मग्रंथों में लिखे तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर कलुषित करने का प्रयास चल रहा है। कुछ चीजें ऐसी भी होती है जिसे लोग ढंग से समझ नहीं पाते और अर्थ का अनर्थ हो जाता है। आज के समय में शिवलिंग की जो एक अवधारणा है वो भी बहुत ही भ्रामक है। तो आइये इस लेख में हम शिवलिंग का वास्तविक अर्थ समझने का प्रयास करते हैं।

वेदों के रोचक तथ्य

हिन्दू धर्म में वेदों को भगवान ब्रह्मा की वाणी एवं सृष्टि का आधार कहा गया है। कहते हैं वेद उतने ही प्राचीन हैं जितनी ये सृष्टि है। हिन्दू धर्म ग्रन्थ श्रुति एवं स्मृति में वर्गीकृत है और श्रुतियों में केवल वेदों की ही गणना होती है। आइये वेदों के विषय में कुछ रोचक चीजें जानते हैं।

अष्टलक्ष्मी - माता लक्ष्मी के आठ सर्वोच्च रूप

अष्टलक्ष्मी - माता लक्ष्मी के आठ सर्वोच्च रूप
हमें कुछ समय पहले देवताओं के अवतार और रूप के विषय में जाना था। माता लक्ष्मी के वैसे तो कई रूप हैं किन्तु उनमें से ८ सबसे प्रमुख माने जाते हैं जिन्हे हम अष्टलक्ष्मी कहते हैं। इन आठ रूपों में वे सृष्टि के विभिन्न भागों का प्रतिनिधित्व करती हैं। आइये इनके विषय में कुछ जानते हैं।

श्रीराम १२ एवं श्रीकृष्ण १६ कलाओं के साथ क्यों अवतरित हुए?

श्रीराम १२ एवं श्रीकृष्ण १६ कलाओं के साथ क्यों अवतरित हुए?
ये तो हम सभी जानते हैं कि किसी भी मनुष्य अथवा देवता की कुल १६ कलाएं होती हैं। १६ कलाओं पर एक लेख हमने पहले ही प्रकाशित कर दिया है जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। भगवान विष्णु भी इन सभी १६ कलाओं के धारक हैं। इसके अतिरिक्त चन्द्रमा को भी महादेव की कृपा से १६ कलाएं प्राप्त हैं और माता दुर्गा के पास भी कुल १६ कलाएं हैं। हालाँकि चंद्र एवं माँ दुर्गा की कलाएं श्रीहरि की कलाओं से भिन्न हैं।

असुर, दैत्य, दानव, राक्षस, पिशाच और बेताल में क्या अंतर है?

हिन्दू धार्मिक कथाओं को पढ़ते कई बार असुर, दैत्य, दानव, राक्षस, पिशाच और बेताल का वर्णन आता है। आम तौर पर हम इन सभी को एक ही मान लेते हैं और इसका उपयोग एक पर्यायवाची शब्द के रूप में करते हैं, किन्तु ये सभी अलग-अलग हैं। आइये इन सभी के बीच के अंतर को जान लेते हैं।