रामायण के सन्दर्भ में जो सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक है वो है कि मृत्यु के समय रावण की आयु कितनी थी? इसको समझने के लिए हमें बहुत पीछे जाना होगा क्योंकि समय की जिस गणना की बात हम कर रहे हैं उसे आज का विज्ञान नही समझ सकता। पहली बात तो ये कि जब कोई कहता है कि रामायण १४००० वर्ष पहले की कथा है तो ये याद रखिये कि ये वैज्ञानिकों ने आधुनिक गणना के अनुसार माना है। अगर वैदिक गणना की बात करें तो रामायण का काल खंड बहुत पहले का है। परमपिता ब्रह्मा की आयु और युग वर्णन के बारे में जानने के लिए यहाँ जाएँ।
श्रीमद्भवद्गीता के अनुसार श्रीकृष्ण की सभी विभूतियाँ
वैसे तो श्रीकृष्ण के रूप अनंत हैं और उनके द्वारा प्रदत्त गीता ज्ञान भी अनंत ही है, किन्तु श्रीमद्भगवद्गीता के दसवें अध्याय विभूति योग के श्लोक २० से लेकर श्लोक ४० तक श्रीकृष्ण ने अपनी विभिन्न विभूतियों का वर्णन किया है। यदि केवल विभूतियों की बात की जाये तो श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं "मेरी विभूतियाँ असंख्य हैं, किन्तु मैंने केवल संक्षेप में विभूतियों का वर्णन किया है।" आइये देखते हैं कि श्रीकृष्ण ने स्वयं को किस विभूति में क्या कहा है:
- सृष्टि में आदि, मध्य एवं अंत
- भूतमात्र के हृदय में आत्मा
दीपावली क्यों मनाई जाती है?
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें। हर वर्ष दीपावली हमारे जीवन में हर्षोल्लास लेकर आती है, आशा है इस वर्ष भी ऐसा ही हो। वैसे तो ना केवल भारत में, बल्कि अनेक देशों में भी दिवाली का सांस्कृतिक महत्त्व बहुत अधिक है किन्तु आज हम इस पर्व के धार्मिक महत्त्व को जानेंगे। आइये उन कुछ विशेष कारणों को देखते हैं जिनके कारण दीपावली का पर्व मनाया जाता है।
संवत्सर (संवत) क्या और कितने हैं?
यदि आपने महाराज विक्रमादित्य पर प्रकाशित हमारा लेख पढ़ा होगा तो आपने विक्रम सम्वत के विषय में भी अवश्य पढ़ा होगा। किन्तु विक्रम संवत ही केवल एक संवत्सर नहीं है। हमारे धर्म में कई संवत्सरों का वर्णन है। इस लेख में हम जानेंगे कि संवत्सर वास्तव में है क्या और हिन्दू धर्म में कुल कितने संवत्सर हैं।
हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में कैसे छिपा दिया था?
श्री विष्णु पुराण में वर्णित भगवान विष्णु के दशावतार में तीसरे हैं भगवान वाराह। इस अवतार में इन्होने हिरण्यकशिपु के छोटे भाई हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी का उद्धार किया था। इस अवतार में जो सबसे भ्रामक बात जन-मानस में फैली है वो ये है कि हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था। किन्तु ये कैसे संभव है? समुद्र तो पृथ्वी पर ही होता है, फिर पृथ्वी को समुद्र में छिपा देना कैसे संभव है? तो आइये इस घटना के पीछे छिपे सत्य को समझने का प्रयास करते हैं।
ईश्वर के विस्तार (रूप) एवं अवतार में क्या अंतर है?
आने वाले कुछ समय में हम त्रिदेवियों एवं अन्य देवताओं के अवतारों के विषय में कुछ लेख प्रकाशित करने वाले हैं। किन्तु उससे पहले हमने सोचा कि हमें ईश्वर के "अवतार" एवं "विस्तार" में अंतर पता होना अत्यंत आवश्यक है। विस्तार को ही "रूप" भी कहते हैं। आम तौर पर हम ईश्वर के रूप और अवतार को एक ही समझते हैं किन्तु ऐसा नहीं है। इन दोनों में अंतर है और इसे पूरी तरह समझे बिना हम इनके बीच उलझ सकते हैं। तो आइये इसे समझते हैं।
महालया
सर्वप्रथम आप सभी महालया पर्व की हार्दिक शुभकामनायें। कल से महालया आरम्भ हो गया है। महालया उत्तर भारत, विशेष कर बंगाल का एक अति महत्वपूर्ण पर्व है। ये एक संस्कृत शब्द है जो "महा+आलय" से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है "महान आवास"। ये पर्व हर पितृ पक्ष समाप्त होने के अगली अमास्या को पड़ता है और इसी दिन के साथ दुर्गा पूजा एवं नवरात्रि का आरम्भ माना जाता है। महालया के अगले दिन ही नवदुर्गा के पहले रूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
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