महालया

महालया
सर्वप्रथम आप सभी महालया पर्व की हार्दिक शुभकामनायें। कल से महालया आरम्भ हो गया है। महालया उत्तर भारत, विशेष कर बंगाल का एक अति महत्वपूर्ण पर्व है। ये एक संस्कृत शब्द है जो "महा+आलय" से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है "महान आवास"। ये पर्व हर पितृ पक्ष समाप्त होने के अगली अमास्या को पड़ता है और इसी दिन के साथ दुर्गा पूजा एवं नवरात्रि का आरम्भ माना जाता है। महालया के अगले दिन ही नवदुर्गा के पहले रूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

सभी उपनिषदों की सूची

सभी उपनिषदों की सूची
हिन्दू धर्म में उपनिषदों का बड़ा महत्त्व है। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत और महापुराणों के अतिरिक्त उपनिषदों की भी रचना की। बाद में चलकर अदि शंकराचार्य ने सभी उपनिषदों पर भाष्य लिखे। सभी उपनिषद चारों वेद एवं किसी पंथ एवं संप्रदाय से सम्बंधित हैं। मूल उपनिषदों की संख्या १० मानी गयी है किन्तु इनके अतिरिक्त भी कई उपनिषद हैं जिनकी कुल संख्या १०८ है। आइये जानते हैं कि उन सभी के नाम क्या हैं और वे किस वेद एवं पंथ/समुदाय से सम्बंधित हैं।

संस्कृत भाषा का चमत्कार

संस्कृत भाषा का चमत्कार
कुछ समय पहले मुझे एक जानकारी प्राप्त हुई थी जिसमें संस्कृत भाषा का अद्भुत प्रयोग किया गया था। इसमें एक शब्द को विस्तारित कर विभिन्न चरित्रों के साथ जोड़ा गया था। मैंने सोचा कि इसे आप सभी के साथ साझा करना आवश्यक है ताकि हम सभी संस्कृत भाषा के अद्भुत उपयोग को देख सकें। ऐसा प्रयोग संसार की किसी भी अन्य भाषा के साथ करना असंभव है। आप स्वयं देखिये।

केवल भगवान विष्णु के साथ ही "श्री" क्यों लगाया जाता है?

केवल भगवान विष्णु के साथ ही "श्री" क्यों लगाया जाता है?
आप सभी ने ये ध्यान दिया होगा कि जब भी हम भगवान विष्णु और उनके अवतारों के विषय में बात करते हैं तो हम उनके आगे "श्री" शब्द लगाते हैं, जैसे श्रीहरि, श्रीराम, श्रीकृष्ण इत्यादि। किन्तु ऐसा हम भगवान ब्रह्मा, महादेव अथवा अन्य देवताओं के साथ नहीं करते। तो क्या इसका अर्थ ये है कि श्री बोल कर भगवान विष्णु को सम्मान दिया जाता है और अन्य देवताओं को नहीं? ऐसा बिलकुल भी नहीं है। आइये इसे समझते हैं।

रावण का परिवार

रावण का परिवार
रावण के विषय में तो हम सभी जानते ही हैं, किन्तु रावण के परिवार के विषय में बहुत लोगों को अधिक जानकारी नहीं है। आज इस लेख में हम संक्षेप में रावण के परिवार के विषय में जानेंगे। ध्यान दें कि यहाँ केवल रावण के व्यक्तिगत परिवार का विवरण दिया जा रहा है। सम्पूर्ण राक्षस वंश के विषय में एक लेख हमने पहले ही प्रकाशित किया है जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

हिन्दू धर्म के कुछ महान दानवीर

हिन्दू धर्म में दान का बहुत अधिक महत्त्व बताया गया है। जब भी हम दानवीरता की बात करते हैं तो हमारे मष्तिष्क में सहसा अंगराज कर्ण की तस्वीर बनती है। वे निःसंदेह दानवीर थे किन्तु हमारा हिन्दू धर्म तो दानवीरों से भरा पड़ा है। वैसे तो इतिहास में एक से बढ़ कर एक दानवीर हुए हैं किंतु कुछ दानवीर ऐसे हैं जिन्होंने दान की हर सीमा को पार कर दिया इसीलिए इनकी श्रेणी अन्य दानवीरों की अपेक्षा अलग ही बन गयी। आइये ऐसे ही कुछ दानवीरों के विषय में जानते हैं:

महाभारत के योद्धाओं की आयु कितनी थी?

महाभारत के योद्धाओं की आयु कितनी थी?
कौरवों और पांडवों की आयु के विषय मे बहुत संशय है। इसका कारण ये है कि मूल व्यास महाभारत में पांडवों या कौरवों की आयु का कोई सटीक विवरण नही दिया गया है। यदि अन्य ग्रंथों की बात की जाए तो भी उनमें दी गयी जानकारियों में बहुत असमानता दिखती है। कही कहा गया है कि युद्ध के समय युधिष्ठिर ९१ वर्ष के थे, कही ये आयु ४९ वर्ष की बताई गई है तो कहीं कुछ और। कहने का अर्थ ये है कि कोई भी सटीक रूप से इनकी आयु के बारे में नहीं बता सकता। यदि कोई ये कहता है कि उसे पांडवों अथवा कौरवों की सटीक आयु के विषय में पता है तो वो निश्चय ही असत्य कह रहा है।