द्रौपदी स्वयंवर में किन किन लोगों ने धनुष को उठा लिया था?

द्रौपदी स्वयंवर में किन किन लोगों ने धनुष को उठा लिया था?
द्रौपदी स्वयंवर के विषय में तो हम सभी जानते ही हैं। एक आम अवधारणा है कि अर्जुन को अपने जमाता के रूप में प्राप्त करने के लिए पंचालराज द्रुपद ने धनुष को इतना कठोर और भारी बनवाया था कि कोई भी उस धनुष को हिला भी नहीं पाया। लेकिन ये बात बिल्कुल गलत है। महाभारत के आदिपर्व के अंतर्गत स्वयंवर पर्व में द्रौपदी स्वयंवर के प्रकरण में हमें इसके बारे में पता चलता है।

वास्तव में उस स्वयंवर में कई राजा थे जिन्होंने उस अद्भुत धनुष को उठा लिया था किन्तु अर्जुन के अतिरिक्त कोई और उसपर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सका। यहाँ तक कि अंगराज कर्ण भी नहीं। महाभारत के इस पर्व के श्लोक १५ से १९ तक ये कहा गया है कि कर्ण, दुर्योधन, शाल्व, शल्य, अश्वथामा, क्राथ, सुनीत, वक्र, कलिंगराज, वंगनरेश, पाण्ड्यनरेश, पौण्ड्रनरेश, विदेहनरेश, यवननरेश और कई और राजा उस धनुष पर अपना अपना बल दिखाने लगे पर कोई भी उस धनुष पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सका। सभी उस धनुष पर जोर लगाते थे, किन्तु उसके झटके से दूर जा गिरते थे।

तो यहाँ पर आप ये देख सकते हैं कि अन्य इन श्लोकों में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि कोई उस धनुष को उठा नहीं पाया बल्कि ये लिखा है कि कोई उस धनुष पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा पाया। औरों के साथ-साथ अंगराज कर्ण ने भी उस धनुष को उठा तो लिया था किन्तु उस पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा पाया था। यदि आप गीता प्रेस की महाभारत पढ़ेंगे तो उसमें भी ये साफ-साफ लिखा है कि कर्ण द्वारा धनुष पर प्रत्यंचा चढाने की बात दक्षिणात्य पाठ, नीलकण्ठी पाठ या बोरी महाभारत में कहीं नहीं लिखी।

यही कारण है कि जनमानस में जो ये भ्रम फैला हुआ है कि द्रौपदी ने सूतपुत्र होने के कारण कर्ण से विवाह नहीं किया वो भी बिलकुल गलत है। इसके बारे में आप विस्तार से यहाँ देख सकते हैं। 

हालाँकि इसके आगे के श्लोकों में कुछ राजाओं का स्पष्ट वर्णन मिलता है जो उस धनुष को उठा भी नहीं पाए थे। सबसे पहला वर्णन शिशुपाल का आता है जिसके बारे में लिखा गया है कि यमराज के समान बलवान शिशुपाल धनुष उठाने के लिए चला किन्तु उसपर हाथ लगते ही वो घुटनों के बल बैठ गया।

इसके बाद महापराक्रमी जरासंध उस धनुष के सामने पर्वत की भांति खड़े हो गए किन्तु धनुष को उठाते समय धनुष का झटका खा कर वो भी गिर गए। इससे अपमानित होकर उन्होंने उसी समय स्वयंवर सभा छोड़ दी। इसके बाद महावीर शल्य आए, पर उन्होंने भी धनुष को उठाते समय घुटने टेक दिए।

इसके बाद शत्रुओं को संताप देने वाला महाबली दुर्योधन उठ कर खड़ा हो गया। वो शीघ्रतापूर्वक धनुष के पास आया और उस धनुष को हाथ में लेकर वो इंद्र के सामान शोभा पाने लगा। दुर्योधन जब उस धनुष पर प्रत्यंचा चढाने लगा तो उस समय उसके अँगुलियों के बीच में झटके से ऐसी चोट लगी कि वो चित्त लोट गया और लज्जित होता हुआ अपने स्थान पर वापस लौट गया।

इसके बाद जब पूरा क्षत्रिय समाज शांत होकर बैठ गया तब अर्जुन उस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आगे आये। उन्होंने बात ही बात में उस धनुष को उठा लिया और जिस धनुष पर बड़े-बड़े वीर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सके थे, अर्जुन ने चटपट उसपर प्रत्यंचा चढ़ा दी और पांचों बाण हाथ में ले लिए। फिर उन्ही बाणों से उन्होंने लक्ष्य को छिन्न-भिन्न करके वो प्रतियोगिता और द्रुपदकुमारी द्रौपदी को भी जीत लिया।

तो महाभारत के अनुसार केवल अर्जुन और कर्ण ही नहीं थे जिन्होंने धनुष को उठा लिया था बल्कि दुर्योधन जैसे कुछ और योद्धा भी थे जो उस धनुष को उठाने में सक्षम थे। हालाँकि अर्जुन के अतिरिक्त कोई भी और योद्धा उस धनुष पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा पाया था।

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