क्या मेघनाद वास्तव में अपराजेय था?

क्या मेघनाद वास्तव में अपराजेय था?
रावण का पुत्र मेघनाद हिन्दू धर्म के सबसे दुर्धुष एवं प्रसिद्ध योद्धाओं में से एक है। इतिहास में कदाचित वही एक योद्धा है जिसे अतिमहारथी होने का गौरव प्राप्त है। आम तौर पर लोगों को ऐसा लगता है कि मेघनाद ही एकमात्र ऐसा योद्धा है जो कभी पराजित नहीं हुआ। हालाँकि ये बात सच है कि मेघनाद निःसंदेह एक अभूतपूर्व योद्धा था किन्तु फिर भी वो अपराजेय नहीं था।

मेघनाद का वर्णन हमें रामायण के बहुत बाद के खण्डों से मिलता है लेकिन रामायण में दो स्थानों पर ऐसा वर्णन है कि मेघनाद को भी पराजय का स्वाद चखना पड़ा था। एक तो लक्ष्मण के हाथों, जो हम सब जानते हैं और दूसरी अंगद के हाथों। रामायण के युद्ध कांड के सर्ग ४३ और ४४ में हमें मेघनाद के पराजय की बात पता चलती है।

युद्ध कांड के सर्ग ४३ के श्लोक ६ में लिखा है कि जब राक्षसों की सेना ने वानरों की सेना पर आक्रमण किया तो मेघनाद अंगद के साथ उसी प्रकार भिड़ गया जैसे महादेव के साथ अंधकासुर भिड़ गया था। इसके आगे श्लोक १८ में लिखा है कि मेघनाद ने अंगद पर गदा से प्रहार किया किन्तु अंगद ने उसकी गदा हाथ से पकड़ ली और उसी गदा से मेघनाद के रथ, घोड़ो और सारथि को चूर-चूर कर दिया।

तो यहाँ पर साफ़ लिखा गया है कि अंगद ने अपने पराक्रम से मेघनाद को विरथ होने पर विवश कर दिया था। आगे एक और विस्तृत वर्णन हमें सर्ग ४४ के श्लोक २८ से श्लोक ३३ में मिलता है। इसमें उनके उसी युद्ध के बारे में बताया गया है। इसमें लिखा गया है कि जब अंगद ने मेघनाद के रथ को तोड़ दिया और घोड़ों और सारथि को मार डाला तब अपने आप को कष्ट में पड़ा देख कर मेघनाद वहां से अंतर्धान हो गया।

अंगद के ऐसा प्रकाराम दिखाने पर सभी ऋषि और देवता उनकी प्रशंसा करने लगे। श्रीराम और लक्ष्मण ने भी अंगद के पराक्रम की बहुत प्रशंसा की। सभी मेघनाद का पराक्रम जानते थे इसीलिए उस युद्ध में उसे अंगद द्वारा पराजित हुआ देख कर सभी को बड़ी प्रसन्नता हुई। सभी लोग अंगद को साधुवाद देने लगे।

इसके बाद जैसा कि हम सभी जानते हैं कि वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड के सर्ग ९० में हमें लक्ष्मण और मेघनाद के बीच का तुमुल युद्ध देखने को मिलता है। इस युद्ध में लक्ष्मण मेघनाद की एक नहीं चलने देते और अंततः उनके हाथों मेघनाद का वध हो जाता है।

यदि हम रामचरितमानस की बात करें तो वहां भी लक्ष्मण के अतिरिक्त एक बार हमें मेघनाद के पराजय का वर्णन मिलता है। हालाँकि वहां अंगद का कोई वर्णन नहीं है बल्कि मानस के सुन्दर कांड के अनुसार हनुमान जी ने युद्ध में मेघनाद को अंतर्धान होने पर विवश कर दिया था। उसके बाद जब मेघनाद को लगा कि इस वानर को बल से नहीं जीता जा सकता, तब उसने उनपर ब्रह्मास्त्र से प्रहार किया था।

तो इस प्रकार वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस दोनों में हमें एक-एक बार लक्ष्मण के अतिरिक्त मेघनाद की पराजय के बारे में पढ़ने को मिलता है। लेकिन हाँ, ये भी सत्य है कि इसके अतिरिक्त हमें रामायण या मानस में कही भी मेघनाद की पराजय के बारे में पढ़ने को नहीं मिलता। ये सिद्ध करता है कि वो कितना उत्कृष्ट योद्धा था।

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