श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
महाराष्ट्र के पुणे जिले से करीब ११० किलोमीटर दूर रायचूर जिले के सह्याद्रि की मनोरम पहाड़ियों में भीमा नदी के तट पर भगवान शिव का छठा ज्योतिर्लिंग श्री भीमाशंकर महादेव स्थापित है। ये मंदिर समुद्र तल से लगभग ३२५० फ़ीट ऊंचाई पर स्थित है। इसमें स्थापित शिवलिंग आम शिवलिंग से बहुत वृहद् या मोटा है और इसी कारण इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का शिखर १८वीं सदी में नाना फरडावीस ने बनवाया था, जिसमे विशेष रूप से एक विशाल घंटा शामिल है। यही नहीं मराठा शासक छत्रपति शिवाजी ने इस मंदिर को कई तरह की सुविधाएँ दी।

श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
कहा जाता है कि ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ वैसे ही सुशोभित होते हैं जैसे ग्रहों के बीच में सूर्यनारायण। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय के "केदार" नामक चोटी पर बसे ये स्थान इतना मनोरम है कि यही बस जाने को जी चाहता है। किन्तु ये स्थान मनोरम होने के साथ-साथ दुर्गम भी है। इस ज्योतिर्लिंग का महत्त्व इसी लिए भी अधिक है क्यूंकि ये ज्योतिर्लिंग होने के साथ-साथ चार धामों में से भी एक है। साथ ही साथ ये पञ्च-केदार में से भी एक है। बद्रीनाथ धाम के निकट इस धाम पर आपको हरि (बद्री) और हर (केदार) का अनोखा सानिध्य देखने को मिलता है। कहा गया है:

श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में परम पावन नर्मदा नदी के बीच स्थित शिवपुरी द्वीप पर भगवान महादेव का चौथा ज्योतिर्लिगं श्री ॐकारेश्वर स्थित है। शिवद्वीप, जिसे मान्धाता द्वीप भी कहते हैं, उसकी आकृति भी आश्चर्यजनक रूप से ॐ के समान है। इस ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ नर्मदा नदी का भी बड़ा महत्त्व है। शास्त्र कहते हैं कि जो फल यमुना में १५ स्नान और गंगा में ७ स्नान करने पर मिलता है वो ॐकारेश्वर महादेव की कृपा से नर्मदा के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम् ।
भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते ॥

अर्थात: आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है।

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

हैदराबाद से करीब २०० किलोमीटर दूर आंध्र के कुर्नूल जिले के श्रीशैलम पहाड़ियों की प्राकृतिक सौंदर्य के बीच महादेव का द्वितीय ज्योतिर्लिंग श्रीमल्लिकार्जुन स्थित है। वैसे तो भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों का अत्यधिक महत्त्व है पर उसपर भी ये ज्योतिर्लिंग अद्वितीय एवं विशेष है। इसका कारण ये है कि यहाँ महादेव के साथ-साथ माता पार्वती भी विराजती है तथा मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ शक्तिपीठों में से भी एक है।

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

गुजरात के सौराष्ट्र में प्रभास तीर्थ पर बना सोमनाथ का मंदिर अपनी अदभुत कलाकृति के साथ-साथ भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग होने के कारण भी प्रसिद्ध है। ये शिवलिंग अत्यंत प्राचीन है क्यूंकि इसकी स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। इसके बारे में एक कथा है कि ब्रह्मपुत्र प्रजापति दक्ष ने चंद्र को अपनी २७ कन्याओं का दान किया। आरम्भ में सभी उनके साथ सुख पूर्वक रह रही थी किन्तु चंद्रदेव का अपनी पत्नी रोहिणी पर अधिक प्रेम था। वो उससे इतना प्रेम करते थे कि उनका ध्यान अन्य पत्निओं की तरफ नहीं जाता था।

द्वादश ज्योतिर्लिंग

कई वर्षों से सोच रहा था कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों पर एक लेख लिखूं। इस बार श्रावण के इस पवित्र अवसर पर हरेक ज्योतिर्लिंग पर एक लेख प्रकाशित करूँगा। सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग का वर्णन तब आता है जब सृष्टि के आरम्भ में भगवान विष्णु एवं परमपिता ब्रह्मा के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाता है। तब उनके बीच अग्नि प्रज्वलित एक ज्योतिर्लिंग उपस्थित होता है।