महाभारत के बाद महर्षि व्यास की सबसे प्रमुख कृति पुराण ही मानी जाती है। महर्षि व्यास ने कुल १८ पुराण लिखे जिन्हे महापुराण भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य ऋषियों द्वारा लिखी गयी कृतियों को उप पुराण भी कहा जाता है। इन पुराणों में समाहित ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। जो भी ज्ञान पृथ्वी पर है वो सभी इन पुराणों में वर्णित है। मूलतः पुराणों को दो भागों में विभक्त किया जाता है:
हिन्दू धर्म में चतुर्युगी व्यवस्था है जिनमे चार युग होते हैं - सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। हिन्दू धर्म की काल गणना हमारे ग्रंथों की सबसे रोचक जानकारियों में से एक है। इसके विषय में जितना भी जाना जाये वो कम है। इसके अतिरिक्त आश्चर्यजनक रूप से हमारी सहस्त्रों वर्षों पुरानी गणना वैज्ञानिक रूप से बिलकुल सटीक बैठती है। आइये इस महत्वपूर्ण विषय को जानते हैं।
हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथों में १६ मुख्य साम्राज्यों का वर्णन मिलता है जिन्हे महाजनपद के नाम से जाना जाता था। इससे मिलते जुलते विवरण बौद्ध और जैन ग्रंथों में भी मिलते हैं। महाजनपद वास्तव में कई साम्राज्यों का समूह होता था जिसके अंतर्गत राज्यों के राजा महाजनपद के प्रमुख राजा के अधीन रहते थे। इनका राजनितिक महत्त्व बहुत अधिक था। आइये इसके बारे में कुछ जानते हैं: