कुछ समय पहले हमने महर्षि कश्यप के वंश के बारे में बताया था। महाभारत में हमें ना सिर्फ महर्षि कश्यप बल्कि सभी मुख्य वंशों का वर्णन मिलता है। महाभारत के आदिपर्व के अंतर्गत आने वाले संभवपर्व के ६५ और ६६वें अध्याय में हमें इसका वर्णन मिलता है। हालाँकि मुझे इनके अतिरिक्त भी कई और वंशजों के बारे में पता था लेकिन उलझन से बचने के लिए इस लेख में हम केवल उतना ही वर्णन दे रहे हैं जितना हमें महाभारत में मिलता है।
इसके अनुसार ब्रह्माजी से सारी सृष्टि की उत्पत्ति हुई।
- ब्रह्मा के ६ मानस पुत्र थे - मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु।
- मरीचि के पुत्र थे कश्यप जिनसे दक्ष प्रजापति की १३ कन्याओं का विवाह हुआ। ये १३ कन्याएं थी - अदिति, दिति, दनु, काला, दनायु, सिंहिका, क्रोधा, प्राधा, विश्वा, विनता, कपिला, मुनि और कुद्रू।
- अदिति से १२ आदित्यों का जन्म हुआ। वे हैं - धाता, मित्र, अयर्मा, इंद्र, वरुण, अंश, भग, विवस्वान, पूषा, सविता, त्वष्टा और विष्णु (वामन)।
- विवस्वान ने त्वष्टा की पुत्री संज्ञा से विवाह किया जिससे उन्हें दो जुड़वाँ पुत्र हुए जो अश्विनीकुमार कहलाये।
- वरुण ने देवी नामक स्त्री से विवाह किया जिनसे उन्हें एक पुत्र और एक पुत्री हुए। पुत्र का नाम था बल और पुत्री का नाम था सुरा।
- दिति का पुत्र हिरण्यकशिपु हुआ जिससे दैत्य वंश आरम्भ हुआ।
- हिरण्यकशिपु के पांच पुत्र थे - प्रह्लाद, संह्लाद, अनुह्लाद, शिबि और बाष्कल।
- प्रह्लाद के तीन पुत्र हुए - विरोचन, कुम्भ और निकुम्भ।
- विरोचन के एक पुत्र हुए बलि।
- बलि के पुत्र का नाम बाण था।
- दनु के ३४ पुत्र हुए जिससे दानव वंश आरम्भ हुआ। वे हैं - विप्रचित्ति, शम्बर, नमुचि, पुलोमा, असिलोमा, केशी, दुर्जय, अयःशिरा, अश्वशिरा, अश्वशंकु, गगनमूर्धा, वेगवान, केतुमान, स्वर्भानु, अश्व, अश्वपति, वृषपर्वा, अजक, अश्वग्रीव, सूक्ष्म, तुहुण्ड, इषुपाद, एकचक्र, विरुपाक्ष, हर, अहर, निचंद्र, निकुम्भ, कुपट, कपट, शरभ, शलभ, सूर्य और चन्द्रमा। ये सूर्य और चंद्रमा देवताओं के सूर्य और चन्द्रमा से अलग हैं।
- इन सब दानवों के आगे अनेकों कुल चले लेकिन उनमें से १० कुल सबसे प्रसिद्ध हुए। वे थे - एकाक्ष, मृतपा, प्रलम्ब, नरक, वातापी, शत्रुपन, शठ, गविष्ठ, वनायु और दीर्घजिह्व।
- सिंहिका ने ४ पुत्रों को जन्म दिया - राहु, सुचन्द्र, चंद्रहर्ता और चन्द्रप्रमर्दन।
- क्रोधा से क्रूर स्वभाव वाले अनेक पुत्र हुए जिनमें क्रोधवश ज्येष्ठ था।
- दनायु से ४ असुरों का जन्म हुआ - विक्षधर, बल, वीर और वृत्र।
- काला के ५ पुत्र हुए - विनाशन, क्रोध, क्रोधहन्ता, क्रोधशत्रु और कालकेय।
- विनता के ६ पुत्र हुए - तार्क्ष्य, अरिष्टनेमि, गरुड़, अरुण, आरुणि और वारुणि।
- अरुण की पत्नी का नाम था श्येनी जिनसे दो पुत्र हुए - सम्पाती और जटायु।
- कुद्रू के १००० पुत्र हुए जो नाग कहलाये जिनमें से शेष, अनंत, वासुकि, तक्षक, कूर्म, कुलिक आदि प्रसिद्ध थे।
- मुनि के १६ पुत्र हुए - भीमसेन, उग्रसेन, सुपर्ण, वरुण, गोपति, धृतराष्ट्र, सुर्यवर्चा, सत्यवाक, अर्कपर्ण, प्रयुत, भीम, चित्ररथ, शालिशिरा, पर्जन्य, कलि और नारद। यहाँ नारद ब्रह्मापुत्र नारद से अलग हैं।
- प्राधा से ८ पुत्रियां और १० पुत्र हुए। पुत्रियों के नाम थे - अनवद्या, मनु, वंशा, असुरा, मार्गणप्रिया, अरूपा, सुभगा और भासी। पुत्रों के नाम थे - सिद्ध, पूर्ण, बर्हि, पूर्णायु, ब्रह्मचारी, रतिगुण, सुपर्ण, विश्वावसु, भानु और सुचन्द्र। इनके अतिरिक्त प्राधा ने ही १३ अप्सराओं को जन्म दिया जो थी अलम्बुषा, मिश्रकेशी, विद्युत्पर्णा, तिलोत्तमा, अरुणा, रक्षिता, रम्भा, मनोरमा, केशिनी, सुबाहु, सुरता, सुरजा और सुप्रिया। साथ ही प्राधा ने ४ गंधर्वों को भी जन्म दिया। ये थे - अतिबाहु, हाहा, हूहू और तुंबरू।
- कपिला से अमृत, ब्राह्मण, गायें, गंधर्वों और अप्सराओं का जन्म हुआ।
- इनके अतिरिक्त भी महर्षि कश्यप की २ पत्नियां और थी - ताम्रा और क्रोधवशा।
- ताम्रा ने पांच कन्याओं को जन्म दिया - काकी, श्येनी, भासी, धृतराष्ट्री और शुकी।
- काकी ने उल्लुओं को जन्म दिया।
- श्येनी के पुत्र बाज हुए।
- भासी ने मुर्गों और गिद्धों को जन्म दिया।
- धृतराष्ट्री से हंस और चक्रवाकों ने जन्म लिया।
- शुकी ने तोतों को जन्म दिया।
- क्रोधवशा ने ९ कन्याओं को जन्म दिया। वे थी - मृगी, मृगमंदा, हरी, भद्रमना, मातंगी, शार्दूली, श्वेता, सुरभि और सुरसा।
- मृगी ने मृग जाति को जन्म दिया।
- मृगमंदा से रीछ और सृमर जन्में।
- भद्रमना ने गजराज ऐरावत को जन्म दिया।
- हरी के पुत्र वानर, लंगूर और घोड़े हुए।
- शार्दूली से सिंह, बाघ और चीते जन्में।
- मातंगी से हाथी जन्में।
- श्वेता ने श्वेत नाम के दिग्गज (हाथी) को जन्म दिया।
- सुरभि की दो पुत्रियां हुई - रोहिणी और गंधर्वी।
- रोहिणी की दो पुत्रियां हुई - विमला और अनला। साथ ही साथ रोहिणी से ही गाय और बैल जाति की उत्पत्ति हुई।
- अनला से ७ प्रकार के वृक्ष उत्पन्न हुए - खजूर, ताल, हिंताल, ताली, छोटे खजूर, सुपारी और नारियल। इनके अतिरिक्त अनला की शुकी नाम की एक पुत्री भी हुई।
- गंधर्वी से अश्व जाति की उत्पत्ति हुई।
- सुरसा से कंक नाम के पक्षियों को जन्म दिया। सुरसा से १०० सर वाले सर्पों ने भी जन्म लिया। इसके अतिरिक्त सुरसा की तीन पुत्रियां भी थी - अनला, रूहा और वीरुधा। इनमें जो अनला है वो रोहिणी की पुत्री अनला से अलग है।
- अनला से बिना फूलों वाली वनस्पति का जन्म हुआ।
- रूहा से फूलों वाली वनस्पति का जन्म हुआ।
- वीरुधा से बांस, बल्ली, लता, गुल्म, तिनकों आदि की उत्पत्ति हुई।
- अंगिरा के तीन पुत्र हुए - बृहस्पति, उतथ्य और संवर्त।
- अत्रि के कई पुत्र हुए जो सभी सिद्ध महर्षि थे।
- पुलस्त्य के पुत्र राक्षस, वानर, किन्नर तथा यक्ष माने जाते हैं।
- पुलह से शरभ, सिंह, किम्पुरुष, व्याघ्र, रीछ और भेड़िये जाति के पुत्र हुए।
- क्रतु से ६०००० पुत्र उत्पन्न हुए जो बालखिल्य कहलाये।
- ऊपर बताये गए ६ पुत्रों के अतिरिक्त भगवान ब्रह्मा के एक और पुत्र हुए - स्थाणु।
- स्थाणु के ११ पुत्र हुए जो रूद्र कहलाये। ये हैं - मृगव्याध, सर्प, निरृति, अजैकपाद, अहिर्बुधन्य, पिनाकी, दहन, ईश्वर, कपाली, स्थाणु और भव। यहाँ पर जो स्थाणु हैं वो अलग हैं जिनका नाम अपने पिता के नाम पर पड़ा।
- ब्रह्माजी के दाहिने अंगूठे से दक्ष प्रजापति का जन्म हुआ। इसी प्रकार ब्रह्माजी के बाएं अंगूठे से दक्ष प्रजापति की पत्नी की उत्पत्ति हुई। इन दोनों की ५० कन्यायें हुई। प्रजापति दक्ष के कई पुत्र भी हुए किन्तु वे सभी नष्ट हो गए। दक्ष प्रजापति ने १० कन्याएं धर्म को, २७ कन्याएं चंद्रमा को और १३ कन्याएं कश्यप को प्रदान की। कश्यप के वंश का वर्णन हम ऊपर देख ही चुके हैं।
- धर्म की १० पत्नियां थी - कीर्ति, लक्ष्मी, धृति, मेधा, पुष्टि, श्रद्धा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा और मति। ये लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी से अलग हैं।
- धर्म के ८ पुत्र हुए जो वसु कहलाये। ये हैं - धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभास। इसके अतिरिक्त धर्म के ३ और पुत्र हुए - शम, काम और हर्ष। शम ने प्राप्ति से, काम ने रति से और हर्ष ने नंदा से विवाह किया।
- धर के दो पुत्र हुए - द्रविण और हुतहव्यवह।
- ध्रुव के पुत्र काल हुए।
- सोम के मनोहरा नामक स्त्री से ४ पुत्र हुए - वर्चा, शिशिर, प्राण और रमण।
- अह के ४ पुत्र हुए - ज्योति, शम, शांत और मुनि।
- अनल के ४ पुत्र हुए - कुमार (कार्तिकेय), शाख, विशाख और नैगमेय। महाभारत में ये तो वर्णन है कि कार्तिकेय कृतिकाओं के पुत्र थे, लेकिन भगवान शिव का वर्णन नहीं है।
- अनिल की अपनी पत्नी शिवा से दो पुत्र हुए - मनोजव और अविज्ञातगति।
- प्रत्युष के पुत्र हुए देवल। देवल के भी दो पुत्र हुए।
- प्रभास ने बृहस्पति की बहन ब्रह्मवादिनी से विवाह किया जिनसे उन्हें विश्वकर्मा नाम के पुत्र प्राप्त हुए जो बाद में देवशिल्पी बने।
- धर्म के ही एक भाई हुए - अधर्म, जिसकी पत्नी का नाम था निरृति। उनके तीन पुत्र थे - भय, महाभय और मृत्यु। इनमें मृत्यु का कोई पुत्र नहीं हुआ क्यूंकि वही सबका अंत करने वाला था।
- चन्द्रमा की २७ पत्नियां थी जो नक्षत्र कहलायी।
- ब्रह्माजी के ह्रदय से भृगु जन्मे जिनके दो पुत्र हुए - शुक्राचार्य और च्यवन। हालाँकि महाभारत में ही एक जगह शुक्राचार्य को भृगु के पुत्र कवि का पुत्र भी बताया गया है।
- शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे जिनके ६ पुत्र हुए जिनमें त्वष्टाधर और अत्रि प्रमुख थे। ये अत्रि ब्रह्माजी के पुत्र अत्रि से अलग हैं।
- च्यवन ने मनु की पुत्री आरुषी से विवाह किया जिनसे और्व का जन्म हुआ।
- और्व के पुत्र ऋचीक हुए।
- ऋचीक के पुत्र जमदग्नि हुए।
- जमदग्नि के ४ पुत्र हुए जिनमें से सबसे छोटे परशुराम जी सबसे प्रसिद्ध थे।
- ब्रह्माजी के २ पुत्र और थे - धाता और विधाता। माता लक्ष्मी को इन दोनों की बहन बताया गया है।

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