7 सितंबर 2012

प्रमुख नाग कुल

पुराणों के अनुसार महर्षि कश्यप ने प्रजापति दक्ष की १७ कन्याओं से विवाह किया और उनसे ही सभी जातियों की उत्पत्ति हुई। इसके बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ें। कश्यप एवं उनकी की पत्नी क्रुदु से नाग जाति (नाग और सर्प जाति अलग-अलग है) की उत्पत्ति हुई जिसमे नागों के आठ प्रमुख कुल चले। इनका वर्णन नीचे दिया गया है:
  1. अनंत (शेषनाग): कद्रू के पुत्रों में सबसे पराक्रमी। उन्होंने अपनी छली माँ भाइयों का साथ छोड़कर गंधमादन पर्वत पर तपस्या करनी आरंभ की। भाइयों तथा क्रुदु का का विमाता विनता तथा सौतेले भाइयों अरुण और गरुड़ के प्रति द्वेष भाव ही उसकी सांसारिक विरक्ति का कारण था। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उसे वरदान दिया कि उसकी बुद्धि सदैव धर्म में लगी रहे। साथ ही ब्रह्मा ने उसे आदेश दिया कि वह पृथ्वी को अपने फन पर संभालकर धारण करे, जिससे कि वह हिलना बंद कर दे तथा स्थिर रह सके। शेष नाग ने इस आदेश का पालन किया। उसके पृथ्वी के नीचे जाते ही सर्पों ने उसके छोटे भाई, वासुकि का राज्यतिलक कर दिया। श्रीहरि विष्णु शेषनाग पर ही शयन करते हैं। जब वसुदेव भगवान कृष्ण को नन्द गाँव पहुँचाने के लिए यमुना में उतरे तो इन्होने ही दोनों की रक्षा की थी। श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण और श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम इन्ही के अवतार माने जाते हैं।