पौराणिक काल के योद्धाओं का स्तर

हम सभी ने कई बार रामायण, महाभारत एवं अन्य पौराणिक कहानियों में योद्धाओं की पदवी के विषय में पढ़ा है। सबसे आम शब्द जो इन पुस्तकों में आता है वह है "महारथी" और ये शब्द इतना आम बना  दिया गया है कि किसी भी प्रसिद्ध योद्धा के लिए हम महारथी शब्द का प्रयोग कर लेते है जबकि सत्य ये है कि महारथी एक बहुत बड़ी श्रेणी होती थी और कुछ चुनिंदा योद्धा हीं महारथी के स्तर तक पहुच पाते थे।

इरावान

इरावान महाभारत का बहुचर्चित तो नहीं किन्तु एक मुख्य पात्र है। इरावान महारथी अर्जुन का पुत्र था जो एक नाग कन्या उलूपी से उत्पन्न हुआ था। द्रौपदी से विवाह के पूर्व देवर्षि नारद के सलाह के अनुसार पाँचों भाइयों ने अनुबंध किया कि द्रौपदी एक वर्ष तक किसी एक भाई की पत्नी बन कर रहेगी। उस एक वर्ष में अगर कोई भी अन्य भाई भूल कर भी बिना आज्ञा द्रौपदी के कक्ष में प्रवेश करेगा तो उसे १२ वर्ष का वनवास भोगना पड़ेगा। देवर्षि ने ये अनुबंध इस लिए करवाया था ताकि दौपदी को लेकर भाइयों के मध्य किसी प्रकार का मतभेद ना हो।

भगवान चित्रगुप्त और कायस्थ वंश

कायस्थों का स्त्रोत श्री चित्रगुप्तजी महाराज को माना जाता है। कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने चार वर्णो को बनाया (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र) तब यम जी ने उनसे मानवों का विवरण रखने में सहायता मांगी। फिर ब्रह्माजी ११००० वर्षों के लिये ध्यानसाधना मे लीन हो गये और जब उन्होने आँखे खोली तो देखा कि "आजानुभुज करवाल पुस्तक कर कलम मसिभाजनम" अर्थात एक पुरुष को अपने सामने कलम, दवात, पुस्तक तथा कमर मे तलवार बाँधे पाया।

पृथ्वी से सप्तर्षियों की दूरी

पुराणों में सात महान ऋषियों के बारे में वर्णित है जिन्हें सप्तर्षि कहा जाता है। ध्यान देने वाली बात है कि हर मनवन्तर में सप्तर्षि अलग अलग होते हैं। अभी सातवां मनवन्तर चल रहा है जिसमे वैवस्वत मनु का शासन है। किन्तु पहले मनवन्तर जिसके शासक स्वयंभू मनु हैं, के सप्तर्षियों का महत्त्व सबसे अधिक है।

श्रीकृष्ण को छप्पन भोग की क्यों चढ़ाये जाते हैं?

भगवान को लगाए जाने वाले भोग की बड़ी महिमा है। इनके लिए ५६ प्रकार के व्यंजन परोसे जाते हैं, जिसे छप्पन भोग कहा जाता है। यह भोग रसगुल्ले से शुरू होकर दही, चावल, पूरी, पापड़ आदि से होते हुए इलायची पर जाकर खत्म होता है। अष्ट पहर भोजन करने वाले बालकृष्ण भगवान को अर्पित किए जाने वाले छप्पन भोग के पीछे कई रोचक कथाएं हैं।

भगवद्गीता के रोचक तथ्य

  • किसने किसको सुनाई: श्रीकृष्ण ने अर्जुन को
  • कब सुनाई: आज से लगभग ७००० साल पहले 
  • किस दिन सुनाई: रविवार के दिन

३३ करोड़ देवताओं का रहस्य

हिन्दू धर्म सागर की तरह विशाल है। इसकी विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दू धर्म में कुल देवी देवताओं की संख्या ३३ करोड़ बताई जाती है। सुनने में कुछ अजीब नहीं लगता? क्या ये संभव है कि किसी धर्म में कुल देवी देवताओं की संख्या ३३ करोड़ हो सकती है? किसी को भी आश्चर्य हो सकता है। लेकिन कहते हैं ना कि अधूरा ज्ञान हानिकारक हो सकता है। तो आईये हम इस बात का वास्तविक तथ्य जानते हैं।