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कौन हैं वास्तु पुरुष?

बरसों से जब भी हम अपने घर का निर्माण करना चाहते हैं तो जो सबसे पहले जो एक चीज हमारे ध्यान में रहती है वो है वास्तु। वास्तु शास्त्र को कई लोग आधुनिक विज्ञान मानते हैं किन्तु इसका इतिहास बहुत पुराना है। वास्तु जो शब्द है वो हिन्दू धर्म के एक देवता "वास्तु देव" के ऊपर पड़ा है। वास्तु शास्त्र का पूरा विज्ञान वास्तु देव की स्थिति को ध्यान में रख कर ही गढ़ा गया है। किन्तु आखिर ये वास्तु देव हैं कौन हैं?

बोनालु और पोथराजू

बोनालु तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में मनाया जाने वाला एक त्यौहार है जो आषाढ़ महीने में माता काली के एक रूप जिसे स्थानीय भाषा में येल्लम्मा कहा जाता है, उनके सम्मान में मनाया जाता है। विशेषकर इसे हैदराबाद और सिकंदराबाद में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। तीन हफ़्तों तक हर रविवार चलने वाला ये त्यौहार मनुष्यों द्वारा माता की कृपाओं का आभार प्रकट करने के लिए मनाया जाता है।

गंगा

गंगा
हिन्दू धर्म में गंगाजी का क्या महत्त्व है इसके बारे में कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। लगभग हर ग्रन्थ में माता गंगा के विषय में कोई ना कोई वर्णन मिलता है। गंगा जी के बारे में सबसे पहला वर्णन हमें ऋग्वेद में मिलता है। ऋग्वेद के १०वें मंडल के ७५वें सूक्त, जिसे नदीस्तुति सूक्त कहा जाता है, उसमें कई नदियों का वर्णन है और यहीं हमें गंगा का भी वर्णन मिलता है। इसी सूक्त के ५वें श्लोक में हमें गंगा और उनके साथ यहाँ ९ और नदियों का वर्णन है।

जब माता पार्वती ने देवताओं को निःसंतान रहने का श्राप दिया

बहुत कम लोगों को ये पता होगा कि देवताओं के कोई भी पुत्र अपनी माता के गर्भ से नहीं जन्में हैं। ऐसा इसलिए क्यूंकि देवताओं को ये श्राप स्वयं भगवती पार्वती ने दिया था। इसका वर्णन शिव पुराण के अतिरिक्त वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के ३६वें सर्ग में मिलता है जहाँ महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को माता गंगा की उत्पत्ति के सन्दर्भ में ये कथा सुनाते हैं।

स्वयं को खा जाने वाला शिवगण - कीर्तिमुख

कीर्तिमुख
आप सबने भारत, विशेष कर दक्षिण भारत में घरों और मंदिरों के ऊपर स्थापित इस भयानक आकृति को अवश्य देखा होगा। हालाँकि पहली बार इसे देख कर ऐसा लगता है जैसे ये कोई असुर हो किन्तु वास्तव में ये भगवान शंकर का एक गण है जिसका नाम है "कीर्तिमुख"। इसे देवताओं के भी ऊपर स्थान दिया जाता है।

कैसे बने श्रीगणेश एकदंत

कैसे बने श्रीगणेश एकदंत
ये तो हम सभी जानते हैं कि श्रीगणेश एकदन्त हैं, अर्थात उनका एक दांत टूटा हुआ है। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि आखिर क्यों श्रीगणेश का एक दांत टूट गया? इस विषय में हमें पुराणों में कई वर्णन मिलता है। इनमें से कुछ कथाएं सुनी हुई हैं किन्तु कुछ ऐसी भी है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

क्या भगवान शंकर वास्तव में नशा करते हैं?

क्या भगवान शंकर वास्तव में नशा करते हैं?
वैसे तो हिन्दू धर्म में असंख्य मिथ्या धारणाएं प्रचलित हैं किन्तु जो मिथ्या बात सबसे अधिक प्रचलित है वो है भगवान शंकर द्वारा भांग और नशे का सेवन करना। आज भी आपको इंटरनेट पर ऐसे अनेकों चित्र मिल जाएंगे जिसमें भोलेनाथ को भांग या गांजे का सेवन करता हुआ दिखाया गया है। जो स्वयं को शिव भक्त कहते हैं उन्हें इसपर को आपत्ति नहीं होती किन्तु सत्य यह है कि महादेव को इस रूप में दिखा कर आप उनका घोर अपमान करते हैं।

गीता कुल कितनी है?

गीता कुल कितनी है?
जब भी श्रीमदभगवद्गीता की बात आती है तो हम सभी को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए दिव्य ज्ञान का ही ध्यान आता है। निःसंदेह भगवद्गीता सर्वाधिक प्रसिद्ध है किन्तु आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पुराणों में और भी कई गूढ़ ज्ञान का वर्णन है जिन्हे गीता कहा गया है। वैसे तो लगभग ३०० गीताओं का वर्णन मिलता है किन्तु इस लेख में मुख्य गीताओं के विषय में बताया जा रहा है:

भोलेनाथ को मांस अर्पण करने वाला महान भक्त - कन्नप्पा नयनार

हिन्दू धर्म में महादेव के एक से बढ़कर एक भक्तों का वर्णन मिलता है। किन्तु उनमें से एक भक्त ऐसे भी थे जो किसी भी पूजा विधि को नहीं जानते थे। उन्होंने हर वो चीज की जो शास्त्र विरुद्ध है और जिसे पाप माना जाता है, किन्तु फिर भी महादेव ने उन्हें दर्शन दिए। वे इस बात को सिद्ध करते हैं कि महादेव केवल अपने भक्त के भाव देखते हैं, पद्धति नहीं। उनका नाम था कन्नप्पा।

क्या भगवान शंकर वास्तव में भस्म हो जाते यदि भस्मासुर उनके सर पर हाथ रख देता?

क्या भगवान शंकर वास्तव में भस्म हो जाते यदि भस्मासुर उनके सर पर हाथ रख देता?
हम सब ने भस्मासुर की कथा सुनी या पढ़ी है। उस पर बने कई फिल्म और टीवी सीरियल भी देख चुके हैं। इन आधुनिक कृतियों द्वारा जनमानस में जो सबसे बड़ी भ्रान्ति फैलाई जाती है वो ये है कि त्रिलोक के स्वामी महादेव भी किसी के डर से मारे मारे फिर सकते हैं। ये महादेव का घोर अपमान है। इस बारे में चर्चा करने से पहले भस्मासुर के विषय में जान लेते हैं।

क्या आप भगवान शिव के दशावतार के विषय में जानते हैं?

क्या आप भगवान शिव के दशावतार के विषय में जानते हैं?
हम सभी ने भगवान विष्णु के प्रसिद्ध दशावतारों के विषय में जानते हैं किन्तु क्या आपको महादेव के दशावतार के विषय में पता है? आम तौर पर जब भी महादेव के अवतरण की बात होती है तो उनके विषय में द्वादश ज्योतिर्लिंग, ११ रुद्रावतार एवं उनके १९ अवतारों के बारे में जानकारी मिलती है। किन्तु श्रीहरि की भांति ही महादेव के भी दशावतार हैं। महादेव के ये दस अवतार मूलतः तंत्र विद्या से सम्बंधित हैं और इन्हे ही तंत्र शास्त्र का जनक माना गया है।

भगवान शिव को अपने ही पुत्र श्रीगणेश का मस्तक क्यों काटना पड़ा?

भगवान शिव को अपने ही पुत्र श्रीगणेश का मस्तक क्यों काटना पड़ा?
महादेव द्वारा श्रीगणेश का मस्तक काटने के विषय में तो हम सभी जानते हैं किन्तु इस विषय में एक प्रश्न आता है कि आखिर उन्हें ऐसा करना क्यों पड़ा? महादेव तो त्रिकालदर्शी हैं फिर उन्हें कैसे नहीं पता था कि श्रीगणेश उनके ही पुत्र हैं? वास्तव में महादेव ने श्रीगणेश का मस्तक एक श्राप के कारण काटा था।

श्रीगणेश का मस्तक कटने के बाद कहाँ गया?

श्रीगणेश का मस्तक कटने के बाद कहाँ गया?
श्रीगणेश की कथा तो हम सभी जानते हैं। उन्हें गजमुख क्यों और किस प्रकार प्राप्त हुआ उसके बारे में भी सभी लोगों को पता है। गणेश जी के सर के कटने के विषय में दो कथाएं मुख्य रूप से प्रसिद्ध हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा तो महादेव के द्वारा उनके सर को काटने की है जो सर्वविदित है। किन्तु एक अन्य कथा भी आती है जिसमें शनिदेव की कुदृष्टि के कारण श्रीगणेश का मस्तक कट गया था।

जब श्रीहरि ने छल से माता पार्वती से बद्रीनाथ ले लिया

जब श्रीहरि ने छल से माता पार्वती से बद्रीनाथ ले लिया
बद्रीनाथ के धार्मिक महत्त्व के विषय में तो हम सभी जानते हैं। हम ये भी जानते हैं कि बद्रीनाथ भगवान विष्णु का निवास स्थान है। किन्तु बहुत कम लोगों को ये पता होगा कि बद्रीनाथ श्रीहरि से पहले महादेव का निवास स्थान हुआ करता था। इस विषय में एक बहुत ही रोचक कथा हमें पुराणों में मिलती है।

कौन हैं पंजुरली और गुलिगा देव और क्या है भूता कोला?

आज कल "कांतारा" नामक एक फिल्म की बहुत चर्चा है और उससे भी अधिक उत्सुकता उस फिल्म में दिखाए गए देवता "पंजुरली देव" के बारे में जानने में है। पंजुरली देव की उपासना दक्षिण भारत, विशेषकर कर्णाटक और केरल के कुछ हिस्सों में की जाती है। वहां इनकी दंतकथाएं बड़ी प्रचलित हैं किन्तु देश के अन्य हिस्सों में उसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। तो आइये इस विषय में कुछ जानते हैं।

पांडवों का पुनर्जन्म

पांडवों का पुनर्जन्म
महापुराणों के अतिरिक्त अन्य पुराणों की प्रमाणिकता पर यदा-कदा प्रश्न उठते ही रहे हैं। किन्तु उनमें भी जो पुराण सबसे अधिक शंशय का केंद्र रहा है वो है भविष्य पुराण। ऐसी मान्यता है कि समय के साथ इसी पुराण में सबसे अधिक मिलावट की गयी है। यही कारण है कि इस पुराण में लिखा हुआ कितना सत्य है और कितना असत्य, ये ठीक-ठीक किसी को नहीं पता है।

जब श्रीगणेश और महाबली हनुमान में युद्ध हुआ

जब श्रीगणेश और महाबली हनुमान में युद्ध हुआ
पुराणों की कुछ कथाएं ऐसी होती हैं जिसके बारे में बहुत लोगों को जानकारी नहीं होती। साथ ही कुछ कथाओं में बहुत विरोधाभास होता है। आज जो कथा हम आपको बताने वाले हैं वो भी कुछ ऐसी ही है। ये कथा है उस घटना की जब दो महाशक्तियां - श्रीगणेश और महावीर हनुमान आपस में टकराये।

वट वृक्ष - वो पेड़ जिसे अमर माना जाता है

वट वृक्ष
वट वृक्ष हिन्दू धर्म के सर्वाधिक महत्वपूर्ण और पवित्र वनस्पतियों में से एक है। अश्वत्थ (पीपल) एवं तुलसी के साथ वट वृक्ष, अर्थात बरगद के पेड़ की हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्ता है। हिन्दू धर्म के लगभग हर ग्रन्थ में वट वृक्ष के महत्त्व के विषय में लिखा गया है। केवल हिन्दू धर्म में ही नहीं अपितु जैन और बौद्ध धर्म में भी वट वृक्ष की अद्भुत महत्ता बताई गयी है।

गंगा कुंड - गंगा और नर्मदा के मिलन का पावन स्थल

गंगा कुंड
मध्य प्रदेश के इंदौर से १२७ किमी की दूरी पर मनावर जिला धार के अंतर्गत मनावर से २५ किमी की दरी पर स्थित गांगली गांव स्थित है। इसका नाम गंगा पर ही आधारित है जो कालांतर में गंगा से गांगली हो गया। ये नर्मदा के तट पर स्थित है। यहाँ एक पवित्र कुंड विधमान है जिसमे निरंतर गंगा का जल प्रवाहित होता रहता है।