यक्षिणियाँ कौन होती हैं?

यक्षिणियाँ कौन होती हैं?
हिन्दू धर्म में कई जातियों का वर्णन है। ये तो हम सभी जानते हैं कि परमपिता ब्रह्मा ने ही पूरी सृष्टि का निर्माण किया। उसे सँभालने के लिए उन्होंने अपने मानस पुत्रों को प्रकट किया। उनमें से ही एक थे महर्षि मरीचि जो सप्तर्षियों में से एक थे। उनके पुत्र थे महर्षि कश्यप जिन्होंने प्रजापति दक्ष की १७ कन्याओं से विवाह किया और उनके ही संतानों से अनेकानेक जातियों का जन्म हुआ। महर्षि कश्यप से उत्पन्न जातियों के बारे में जानने के लिए यहाँ जाएँ।

विश्व का सबसे अमीर और रहस्य्मयी मंदिर - श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर

आठवीं सदी में एक महान विष्णु भक्त थे जो सदैव श्रीहरि की साधना में लीन रहते थे। उनकी बस एक ही इच्छा थी कि किसी भी प्रकार उन्हें श्रीहरि के महाविष्णु स्वरुप के दर्शन हो जाएँ। किन्तु हर दिन एक बालक उनकी तपस्या को भंग करने का प्रयास करता था। एक दिन जब वो बालक उन्हें परेशान करने आया तो उन्होंने उसे पकड़ लिया।

भानुमति

भानुमति
महाभारत में स्त्री चरित्रों को बहुत प्रमुखता से दिखाया गया है। चाहे वो द्रौपदी हो, कुंती हो अथवा गांधारी, महाभारत स्त्री सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण है। हालाँकि कुछ स्त्री चरित्र ऐसे भी हैं जो गौण हैं किन्तु उससे उनका महत्त्व कम नहीं होता। ऐसा ही एक चरित्र है भानुमति का।

गणेश जी ने भी दिया था गीता ज्ञान - श्री गणेश गीता

गणेश गीता
हम सभी महाभारत में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए अद्वितीय ज्ञान, अर्थात श्रीमद्भगवतगीता के विषय में तो जानते ही हैं। महाभारत के भीष्म पर्व के आरम्भ में ज्ञान का ये अथाह सागर वर्णित है जिसमें १८ अध्याय एवं कुल ७०० श्लोक है। किन्तु क्या आप ये जानते हैं कि श्रीगणेश ने भी गीता का ज्ञान दिया था जो गणेश गीता के नाम से प्रसिद्ध है।

ऋष्यमूक पर्वत

ऋष्यमूक पर्वत
हम सभी ने रामायण में ऋष्यमूक पर्वत के विषय में सुना ही है। ये हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्वतों में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऋष्यमूक पर्वत आज के कर्नाटक राज्य के हम्पी में स्थित था। उसी स्थान पर वानर साम्राज्य किष्किंधा हुआ करता था, ऐसी मान्यता है।

वर्ष में दो बार नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

आपमें से कई लोगों को ये पता होगा कि नवरात्रि वर्ष में दो बार मनाई जाती है। हालाँकि बहुत ही कम लोगों को ये पता होगा कि वास्तव में वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व आता है। अर्थात हर तिमाही में एक बार नवरात्रि मनाई जाती है। आइये पहले इन चारों नवरात्रियों के नाम और समय को जान लेते हैं:

कुबेर से भी कर लेने वाले श्रीराम के परदादा - महाराज रघु

कुबेर से भी कर लेने वाले श्रीराम के परदादा - महाराज रघु
महाराज खटांग के पुत्र थे महाराज दिलीप। एक बार ये अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में गए जहाँ इन्होने उनकी गाय कामधेनु पुत्री नंदिनी की रक्षा का प्रण कर लिया। वे नंदिनी को लेकर वन गए जहाँ पर नंदिनी ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक माया सिंह उत्पन्न किया। उस सिंह ने नंदिनी पर आक्रमण किया जिसकी रक्षा के लिए महाराज दिलीप ने उस सिंह पर अनेक बाण चलाये किन्तु सारे व्यर्थ हुए।