गुरुवार, जून 17, 2021

जटायु

पिछले लेख में आपने गृद्धराज सम्पाती के विषय में पढ़ा था। जटायु इन्ही सम्पाती के छोटे भाई थे। महर्षि कश्यप और विनता के ज्येष्ठ पुत्र अरुण इनके पिता थे। इनकी माता का नाम श्येनी था। पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस प्रकार विनता अपने बड़े पुत्र अरुण को समय से पहले ही अंडे से निकाल देती है जिससे वो बड़े रुष्ट होते हैं और सूर्यदेव के सारथि बन जाते हैं। इनके छोटे भाई समय पूरा होने पर अंडे से निकलते हैं जिनका नाम गरुड़ रखा जाता है। ये भगवान श्रीहरि के वाहन बन जाते हैं। अरुण के ही श्येनी से दो पुत्र होते हैं - सम्पाती और जटायु

गुरुवार, जून 10, 2021

सम्पाती

रामायण में हमें सम्पाती एवं जटायु नाम दो पक्षियों का वर्णन मिलता है, जो गिद्ध जाति से सम्बंधित थे। रामायण में इन दोनों का बहुत अधिक वर्णन तो नहीं है किन्तु फिर भी जटायु का वर्णन हमें बहुत प्रमुखता से मिलता है। सम्पाती का वर्णन हमें केवल सीता संधान के समय ही मिलता है, किन्तु फिर भी उनकी कथा बहुत प्रेरणादायक है। आज हम इन दोनों भाइयों में से ज्येष्ठ, सम्पाती के विषय में जानेंगे। अगले लेख में हम उनके छोटे भाई जटायु के विषय में चर्चा करेंगे।

गुरुवार, जून 03, 2021

क्या महाराज दशरथ की ३५० रानियाँ थी?

भारतीय संस्कृति में महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण के जिस रचना ने सर्वाधिक असर छोड़ा है वो गोस्वामी तुलसीदास रचित श्री रामचरितमानस है। हालाँकि तुलसीदास ने अपने ग्रन्थ मानस में कुछ ऐसी घटनाओं को भी जोड़ा है जो मूल वाल्मीकि रामायण में नहीं है। साथ ही कई अन्य घटनाओं को मानस में स्थान नहीं दिया गया है। ऐसी ही एक जानकारी महाराज दशरथ की पत्नियों के विषय में है।

गुरुवार, मई 27, 2021

द्रौपदी

पूर्व काल में एक ऋषि थे मुद्गल। उनका विवाह इन्द्रसेना नामक कन्या से हुआ जो बाद में अपने पति के नाम से मुद्गलनी भी कहलायी। दुर्भाग्य से मुद्गल की मृत्यु विवाह के तुरंत बाद हो गयी। तब इंद्रसेना को अपने पति के जाने का अपार दुःख हुआ किन्तु उसे इस बात का भी दुःख हुआ कि वो अपने वैवाहिक जीवन का भोग नहीं कर सकी। इसी कारण उसने भगवान शंकर की घोर आराधना की। जब महादेव प्रसन्न हुए तो इन्द्रसेना ने उनसे ये वर माँगा कि अगले जन्म में उसे एक ऐसा पति चाहिए जो धर्म का ज्ञाता हो, अपार बलशाली हो, सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हो, संसार में सर्वाधिक सुन्दर हो एवं जिसके सहनशीलता की कोई सीमा ना हो।

गुरुवार, मई 20, 2021

कुंती

ये पंचकन्या श्रृंखला का चौथा लेख है। इससे पहले मंदोदरी, अहिल्या एवं तारा पर लेख प्रकाशित हो चुके हैं। इस लेख में हम चौथी पंचकन्या कुंती के बारे में जानेंगे। यदुकुल में एक प्रतापी राजा हुए शूरसेन। उनकी पत्नी का नाम था मरिषा जो नाग कुल की थी। शूरसेन के एक फुफेरे भाई थे कुन्तिभोज जो कुंती प्रदेश के स्वामी थे। वे निःसंतान थे इसी कारण शूरसेन ने ये प्रतिज्ञा की कि अपनी पहली संतान को वो कुन्तिभोज को प्रदान करेंगे। शूरसेन की पहली संतान एक पुत्री हुए जिनका नाम था "पृथा"। प्रण के अनुसार शूरसेन ने पृथा को कुन्तिभोज को दे दिया। इस प्रकार पृथा कुन्तिभोज की दत्तक पुत्री कहलाई और आगे चल कर उन्ही के नाम पर उनका नाम "कुंती" पड़ा।

गुरुवार, मई 13, 2021

तारा

ये पञ्चसती श्रृंखला का तीसरा लेख है। इससे पहले हमने मंदोदरी एवं अहिल्या पर लेख प्रकाशित किया था, आशा है आपको पसंद आया होगा। आज इस लेख में हम वानरराज बाली की पत्नी तारा के विषय में जानेंगे। तारा के जन्म के विषय में हमें दो अलग जानकारियां प्राप्त होती है। एक कथा के अनुसार तारा देवगुरु बृहस्पति की पुत्री थी। ये बहुत बड़ा संयोग है कि बृहस्पति की पत्नी का नाम भी तारा ही था। हालाँकि ये मान्यता अधिक प्रसिद्ध नहीं है।

शुक्रवार, मई 07, 2021

अहिल्या

देवी अहिल्या हिन्दू धर्म की सर्वाधिक सम्मानित महिलाओं में से एक है जिन्हे पञ्चसतियों में स्थान दिया गया है। अन्य चार हैं - मंदोदरी, तारा, कुंती एवं द्रौपदी। अहिल्या महर्षि गौतम की पत्नी थी और देवराज इंद्र के छल के कारण उन्होंने सदियों तक पाषाण बने रहने का दुःख भोगा। बहुत काल के बाद जब श्रीराम महर्षि विश्वामित्र के साथ गौतम ऋषि के आश्रम मे पधारे तब उन्होंने पाषाण रूपी अहिल्या का उद्धार किया। अहिल्या का महत्त्व इसलिए भी अधिक है क्यूंकि उनकी रचना स्वयं परमपिता ब्रह्मा ने की थी और वो उन्ही की पुत्री मानी गयी। यही कारण है कि उन्हें "अयोनिजा" भी कहा जाता है।

गुरुवार, अप्रैल 29, 2021

महाराज विक्रमादित्य

भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे महान सम्राट हुए हैं जिन्होंने अपनी वीरता और न्यायप्रियता से इतिहास पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। महाराज विक्रमादित्य उन्ही महान राजाओं में से एक हैं। हिन्दू धर्म में नव वर्ष का आरम्भ विक्रम सम्वत के आधार पर ही किया जाता है और ये विक्रम सम्वत महाराज विक्रमादित्य के नाम से ही आरम्भ हुआ। बच्चों में जो बेताल पच्चीसी एवं सिंहासन बत्तीसी कथाएं प्रसिद्ध हैं उसका सम्बन्ध भी महाराज विक्रमादित्य से ही है। यही नहीं उन्हें आधुनिक काल का अंतिम चक्रवर्ती सम्राट भी माना जाता है। आइये इनके विषय में कुछ जानते हैं।

गुरुवार, अप्रैल 15, 2021

गांधार राज सुबल

महाराज सुबल गांधार के राजा थे और शकुनि एवं गांधारी के पिता थे। उन्हें गांधार के सबसे प्रसिद्ध एवं न्याय प्रिय राजाओं में से एक माना जाता है। सुबल का विवाह सुधर्मा नामक राजकुमारी से हुआ जिनसे उन्हें पाँच पुत्र एवं एक पुत्री की प्राप्ति हुई। हालाँकि इन पुत्र-पुत्रियों का वर्णन महाभारत और अन्य ग्रंथों में अलग-अलग है। महाभारत में सुबल का बहुत अधिक वर्णन नहीं दिया गया है किन्तु महाभारत पर आधारित कुछ अन्य ग्रंथों में सुबल के जीवन का कुछ विस्तार देखने को मिलता है।

गुरुवार, अप्रैल 08, 2021

श्री कष्टभंजन हनुमान

गुजरात के बोटाद जिले में भावनगर के पास एक गाँव सारंगपुर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ पर स्थति श्री कष्टभंजन हनुमान का मंदिर है। इन्हे सारंगपुर का सम्राट माना जाता है और लोग इन्हे "बड़े हनुमानजी" एवं "महाराजाधिराज" के नाम से भी जानते हैं। इस सुन्दर मंदिर में हनुमान जी एक स्वर्ण सिंहासन पर विद्यमान रहते हैं। हालाँकि उनका ये रूप उनके आम साधारण रूप से थोड़ा अलग है। स्वर्ण मंदिर में, स्वर्ण गदा धारण किये हुए कष्टभंजन हनुमान प्रत्येक दिन श्रृंगार के बाद बहुत मनोहारी लगते हैं।