गुरुवार, अप्रैल 29, 2021

महाराज विक्रमादित्य

भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे महान सम्राट हुए हैं जिन्होंने अपनी वीरता और न्यायप्रियता से इतिहास पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। महाराज विक्रमादित्य उन्ही महान राजाओं में से एक हैं। हिन्दू धर्म में नव वर्ष का आरम्भ विक्रम सम्वत के आधार पर ही किया जाता है और ये विक्रम सम्वत महाराज विक्रमादित्य के नाम से ही आरम्भ हुआ। बच्चों में जो बेताल पच्चीसी एवं सिंहासन बत्तीसी कथाएं प्रसिद्ध हैं उसका सम्बन्ध भी महाराज विक्रमादित्य से ही है। यही नहीं उन्हें आधुनिक काल का अंतिम चक्रवर्ती सम्राट भी माना जाता है। आइये इनके विषय में कुछ जानते हैं।

गुरुवार, अप्रैल 15, 2021

गांधार राज सुबल

महाराज सुबल गांधार के राजा थे और शकुनि एवं गांधारी के पिता थे। उन्हें गांधार के सबसे प्रसिद्ध एवं न्याय प्रिय राजाओं में से एक माना जाता है। सुबल का विवाह सुधर्मा नामक राजकुमारी से हुआ जिनसे उन्हें पाँच पुत्र एवं एक पुत्री की प्राप्ति हुई। हालाँकि इन पुत्र-पुत्रियों का वर्णन महाभारत और अन्य ग्रंथों में अलग-अलग है। महाभारत में सुबल का बहुत अधिक वर्णन नहीं दिया गया है किन्तु महाभारत पर आधारित कुछ अन्य ग्रंथों में सुबल के जीवन का कुछ विस्तार देखने को मिलता है।

गुरुवार, अप्रैल 08, 2021

श्री कष्टभंजन हनुमान

गुजरात के बोटाद जिले में भावनगर के पास एक गाँव सारंगपुर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ पर स्थति श्री कष्टभंजन हनुमान का मंदिर है। इन्हे सारंगपुर का सम्राट माना जाता है और लोग इन्हे "बड़े हनुमानजी" एवं "महाराजाधिराज" के नाम से भी जानते हैं। इस सुन्दर मंदिर में हनुमान जी एक स्वर्ण सिंहासन पर विद्यमान रहते हैं। हालाँकि उनका ये रूप उनके आम साधारण रूप से थोड़ा अलग है। स्वर्ण मंदिर में, स्वर्ण गदा धारण किये हुए कष्टभंजन हनुमान प्रत्येक दिन श्रृंगार के बाद बहुत मनोहारी लगते हैं।

गुरुवार, अप्रैल 01, 2021

युवनाश्व - श्रीराम के वो पूर्वज जिन्होंने पुरुष होते हुए भी गर्भ धारण किया

आज के आधुनिक युग में हम नए नए अविष्कार कर रहे हैं। विगत कुछ वर्षों से ये बात सिद्ध हो चुकी है कि ऐसी कई/अधिकतर चीजें जो आज हम बना रहे हैं, उसका वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में पहले ही दे दिया गया था। ये इस बात को सिद्ध करता है कि सनातन हिन्दू धर्म ना केवल अति-प्राचीन है अपितु बहुत वैज्ञानिक भी। आज हम जो सेरोगेसी की बात करते हैं वो सदियों पहले महाभारत में वर्णित था। उसी प्रकर आज के वैज्ञानिक इस बात पर भी शोध कर रहे हैं कि क्या पुरुष कृत्रिम रूप से गर्भ धारण कर सकते हैं? आज की ये कथा इसी बात का उत्तर है।

बुधवार, मार्च 24, 2021

महाकुंभ

हम सभी जानते हैं कि वर्तमान में हरिद्वार में कुंभ पर्व मनाया जा रहा है।सत्य सनातन धर्म में कुंभ पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। पुराणों के अनुसार हिमालय के उत्तर में क्षीरसागर है, जहां देवासुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। मंथन दंड था- मंदर पर्वत, रज्जु था वासुकि तथा स्वयं विष्णु ने कूर्म रूप में मंदर को पीठ पर धारण किया था। समुद्र मंथन के समय क्रमश: पुष्पक रथ, ऐरावत, परिजात पुष्प, कौस्तुभ, सुरभि, अंत में अमृत कुंभ को लेकर स्वयं धन्वंतरि प्रकट हुए थे।

गुरुवार, मार्च 18, 2021

श्री कुक्के सुब्रमण्य

जब आप कर्णाटक के मैंगलोर जिले के सुल्लिया तालुका में पहुँचते हैं तो जो सबसे प्रसिद्ध नाम आपको सुनाई देता है वो है सुब्रमण्यम नामक गाँव का। वो इस कारण कि इस गाँव में श्री कुक्के सुब्रमण्य का दर्शनीय मंदिर स्थित है। ना केवल आस पास के इलाकों में अपितु पूरे कर्णाटक में ये स्थान सर्प दोषों के निवारण हेतु सबसे उत्तम स्थान माना जाता है। नाग वैसे ही हिन्दू धर्म में अपना अलग स्थान रखते हैं और उनके प्रति समर्पित होने के कारण ही इस मंदिर की अपनी एक अलग विशेषता है।

गुरुवार, मार्च 11, 2021

भगवान शिव की बारात

आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकमाएँ। आज इस अवसर पर हम भगवान शिव की अनूठी बारात के विषय में चर्चा करेंगे। हमारे पौराणिक ग्रंथों में अनेकानेक देवी-देवताओं के विवाह का वर्णन है किन्तु जैसी भव्य बारात का वर्णन वर्णन भगवान शंकर और माता पार्वती के विवाह के सन्दर्भ में दिया गया है उसकी कोई तुलना नहीं है। इस बारात के विषय में कहा जाता है कि इसमें संसार के सभी प्राणी सम्मलित हुए थे और उनके भार से पृथ्वी अपनी धुरी पर झुक गयी थी। उसे संतुलित करने हेतु भगवान शंकर ने महर्षि अगस्त्य को अपने आशीर्वाद और उनके समस्त पुण्य फल के साथ पृथ्वी के दूसरे छोर पर भेजा और तब जाकर पृथ्वी का संतुलन सही हुआ।

बुधवार, मार्च 03, 2021

परमपिता ब्रह्मा के मानस पुत्र

ये तो हम सभी जानते हैं कि परमपिता ब्रह्मा से ही इस सारी सृष्टि का आरम्भ हुआ। सर्वप्रथम ब्रह्मा ने पृथ्वी सहित सारी सृष्टि की रचना की। तत्पश्चात उन्होंने जीव रचना के विषय में सोचा और तब उन्होंने अपने शरीर से कुल ५९ पुत्र उत्पन्न किये। इन ५९ पुत्रों में उन्होंने सर्वप्रथम जो १६ पुत्र अपनी इच्छा से उत्पन्न किये वे सभी "मानस पुत्र" कहलाये। इन १६ मानस पुत्रों में १० "प्रजापति" एवं उनमें से ७ "सप्तर्षि" के पद पर आसीन हुए। ये सभी मानस पुत्र ब्रह्मा के अन्य पुत्रों से अधिक प्रसिद्ध हैं। पुराणों में इन्हे "साम ब्रह्मा", अर्थात ब्रह्मा के सामान कहा गया है।

सोमवार, फ़रवरी 22, 2021

रामायण का प्रथम श्लोक

रामायण के रचनाकार प्रचेता पुत्र महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि भी कहा जाता है। वो इस कारण कि काव्य का जैसा प्रस्फुटन रामायण में देखने को मिला, वैसा उससे पहले कभी देखने को नहीं मिला था। इसी कारण रामायण को पहला महाकाव्य कहा जाता है। रामायण के बाद महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत ही उस स्तर का महाकाव्य बना किन्तु फिर भी रामायण जितना भावनात्मक है, कदाचित महभारत में भी वैसा भाव देखने को नहीं मिलता।

शनिवार, फ़रवरी 13, 2021

जाति एवं वर्ण में अंतर

"समाज से जाति भेद को मिटाना आवश्यक है" या "हिन्दू समाज कई जातियों में बटा है" - इस प्रकार की बातें हमें प्रतिदिन सुनने को मिल ही जाती है। आपमें से यदि कोई सोच रहा हो कि आज अचानक धर्म संसार पर राजनितिक बातें कैसे होने लगी, तो आप गलत समझ रहे हैं। आज हम कुछ ऐसा समझने का प्रयास करने वाले हैं जो शुद्ध रूप से सनातन हिन्दू धर्म का आधार है, किन्तु दुर्भाग्यवश उसे तोड़-मरोड़ कर ऐसा रूप दे दिया गया है जिससे समाज में मतभेद उत्पन्न हो गए हैं।