गुरुवार, मार्च 18, 2021

श्री कुक्के सुब्रमण्य

जब आप कर्णाटक के मैंगलोर जिले के सुल्लिया तालुका में पहुँचते हैं तो जो सबसे प्रसिद्ध नाम आपको सुनाई देता है वो है सुब्रमण्यम नामक गाँव का। वो इस कारण कि इस गाँव में श्री कुक्के सुब्रमण्य का दर्शनीय मंदिर स्थित है। ना केवल आस पास के इलाकों में अपितु पूरे कर्णाटक में ये स्थान सर्प दोषों के निवारण हेतु सबसे उत्तम स्थान माना जाता है। नाग वैसे ही हिन्दू धर्म में अपना अलग स्थान रखते हैं और उनके प्रति समर्पित होने के कारण ही इस मंदिर की अपनी एक अलग विशेषता है।

गुरुवार, मार्च 11, 2021

भगवान शिव की बारात

आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकमाएँ। आज इस अवसर पर हम भगवान शिव की अनूठी बारात के विषय में चर्चा करेंगे। हमारे पौराणिक ग्रंथों में अनेकानेक देवी-देवताओं के विवाह का वर्णन है किन्तु जैसी भव्य बारात का वर्णन वर्णन भगवान शंकर और माता पार्वती के विवाह के सन्दर्भ में दिया गया है उसकी कोई तुलना नहीं है। इस बारात के विषय में कहा जाता है कि इसमें संसार के सभी प्राणी सम्मलित हुए थे और उनके भार से पृथ्वी अपनी धुरी पर झुक गयी थी। उसे संतुलित करने हेतु भगवान शंकर ने महर्षि अगस्त्य को अपने आशीर्वाद और उनके समस्त पुण्य फल के साथ पृथ्वी के दूसरे छोर पर भेजा और तब जाकर पृथ्वी का संतुलन सही हुआ।

बुधवार, मार्च 03, 2021

परमपिता ब्रह्मा के मानस पुत्र

ये तो हम सभी जानते हैं कि परमपिता ब्रह्मा से ही इस सारी सृष्टि का आरम्भ हुआ। सर्वप्रथम ब्रह्मा ने पृथ्वी सहित सारी सृष्टि की रचना की। तत्पश्चात उन्होंने जीव रचना के विषय में सोचा और तब उन्होंने अपने शरीर से कुल ५९ पुत्र उत्पन्न किये। इन ५९ पुत्रों में उन्होंने सर्वप्रथम जो १६ पुत्र अपनी इच्छा से उत्पन्न किये वे सभी "मानस पुत्र" कहलाये। इन १६ मानस पुत्रों में १० "प्रजापति" एवं उनमें से ७ "सप्तर्षि" के पद पर आसीन हुए। ये सभी मानस पुत्र ब्रह्मा के अन्य पुत्रों से अधिक प्रसिद्ध हैं। पुराणों में इन्हे "साम ब्रह्मा", अर्थात ब्रह्मा के सामान कहा गया है।

सोमवार, फ़रवरी 22, 2021

रामायण का प्रथम श्लोक

रामायण के रचनाकार प्रचेता पुत्र महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि भी कहा जाता है। वो इस कारण कि काव्य का जैसा प्रस्फुटन रामायण में देखने को मिला, वैसा उससे पहले कभी देखने को नहीं मिला था। इसी कारण रामायण को पहला महाकाव्य कहा जाता है। रामायण के बाद महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत ही उस स्तर का महाकाव्य बना किन्तु फिर भी रामायण जितना भावनात्मक है, कदाचित महभारत में भी वैसा भाव देखने को नहीं मिलता।

शनिवार, फ़रवरी 13, 2021

जाति एवं वर्ण में अंतर

"समाज से जाति भेद को मिटाना आवश्यक है" या "हिन्दू समाज कई जातियों में बटा है" - इस प्रकार की बातें हमें प्रतिदिन सुनने को मिल ही जाती है। आपमें से यदि कोई सोच रहा हो कि आज अचानक धर्म संसार पर राजनितिक बातें कैसे होने लगी, तो आप गलत समझ रहे हैं। आज हम कुछ ऐसा समझने का प्रयास करने वाले हैं जो शुद्ध रूप से सनातन हिन्दू धर्म का आधार है, किन्तु दुर्भाग्यवश उसे तोड़-मरोड़ कर ऐसा रूप दे दिया गया है जिससे समाज में मतभेद उत्पन्न हो गए हैं।