बुधवार, जनवरी 20, 2021

मंदार पर्वत - वो स्थान जहाँ समुद्र मंथन हुआ था

विगत मकर संक्रांति को मुझे मंदार पर्वत जाने का अवसर मिला। मैं स्वयं भागलपुर (बिहार) का रहने वाला हूँ और बचपन से कई बार यहाँ जा चुका हूँ। ये वही पर्वत है जिससे प्राचीन काल में समुद्र मंथन किया गया था। ये वही मंदराचल पर्वत है जिसे समुद्र मंथन में मथनी के रूप में उपयोग में लाया गया था। इस स्थान का नाम "बौंसी" है जो "वासुकि" का अपभ्रंश है। नागराज वासुकि को ही मंदराचल पर्वत की रस्सी के रूप में उपयोग किया गया था। उन्ही के नाम पर इस स्थान का नाम पड़ा जो अब अपभ्रंश होकर बौंसी हो गया है।

सोमवार, जनवरी 11, 2021

नटराज के पैरों के नीचे कौन दबा रहता है?

हम सभी ने भगवान शिव के नटराज रूप को कई बार देखा है। किन्तु क्या आपने ध्यान दिया है कि नटराज की प्रतिमा के पैरों के नीचे एक दानव भी दबा रहता है? आम तौर पर देखने से हमारा ध्यान उस राक्षस की ओर नहीं जाता किन्तु नटराज की मूर्ति के दाहिने पैर के नीचे आपको वो दिख जाएगा। क्या आपको पता है कि वास्तव में वो है कौन? आइये आज इस लेख में हम उस रहस्य्मयी दानव के विषय में जानते हैं।

मंगलवार, जनवरी 05, 2021

श्रुति एवं स्मृति क्या है?

हिन्दू धर्म में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक है कि अति प्राचीन होने के बाद भी हिन्दू धर्म के धर्मग्रंथों में लिखे ज्ञान को सुरक्षित कैसे रखा गया। यदि हम आधुनिक काल गणना की भी बात करें तो महाभारत का कालखंड ७००० वर्ष एवं रामायण का कालखंड १४००० वर्ष पूर्व का बताया गया है। हिन्दू धर्म के सबसे प्राचीन ग्रंथ वेदों को लगभग २८००० वर्ष प्राचीन बताया जाता है। अब प्रश्न ये है कि ये सारे धर्मग्रन्थ तो आज भी हमारे पास हैं। फिर इस अथाह ज्ञान को इतने लम्बे समय तक किस प्रकार संचित किया गया? आइये इसे समझते हैं।

सोमवार, दिसंबर 28, 2020

"ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी" - तुलसीदास जी के इस दोहे का वास्तविक अर्थ

ढोल, गंवार, शूद्र, पशु नारी।
सकल ताड़ना के अधिकारी।।

गोस्वामी तुलसीदास रचित महान ग्रन्थ श्रीरामचरितमानस में वर्णित इस एक दोहे को लेकर बहुत प्रश्न उठाये जाते है। विशेषकर "शूद्र" एवं "नारी" शब्द को लेकर वामपंथियों और छद्म नारीवादियों ने इसे तुलसीदास और मानस के विरुद्ध एक शस्त्र बना रखा है। प्रश्न ये है कि क्या वास्तव में गोस्वामी तुलसीदास जैसा श्रेष्ठ व्यक्ति शूद्रों एवं नारियों के विषय में ऐसा लिख सकता है? आइये इसे समझते हैं।

रविवार, दिसंबर 20, 2020

क्यों दिया माता सीता ने गौ माता को श्राप?

मूल वाल्मीकि रामायण की कथाओं के अतिरिक्त भी कई ऐसी कथाएं हैं जो जनमानस में लोक कथाओं के रूप में प्रसिद्ध हैं। ऐसी ही एक कथा में ऐसा वर्णन है जब माता सीता ने गौ माता, फल्गू नदी एवं
केतकी के पुष्प को श्राप दिया था। देश के कई राज्य, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश में ये कथा बहुत प्रसिद्ध है।