मंगलवार, सितंबर 01, 2020

मोक्ष पट्टम

आप सभी ने सांप सीढ़ी का खेल अवश्य खेला होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि इसके पीछे का इतिहास क्या है? क्या आपको ये ज्ञात है कि इस खेल का सम्बन्ध हमारे पौराणिक ज्ञान से भी है। आज हम आपको इस खेल के उद्भव के विषय में बताएँगे और हम ये भी देखेंगे कि ये खेल किस प्रकार हमारे पौराणिक ज्ञान से सम्बंधित है।

गुरुवार, अगस्त 27, 2020

गोमती चक्र

हिन्दू धर्म में गोमती नदी का बड़ा महत्त्व है। हमारी पांच सबसे पवित्र नदियों में से एक गोमती भी है। मान्यता है कि गोमती महर्षि वशिष्ठ की पुत्री थी जो बाद में नदी के रूप में परिणत हो गयी। इसी पवित्र नदी के अंदर एक विशेष पत्थर पाया जाता है जिसे हम गोमती चक्र के नाम से जानते हैं। ये पत्थर उतना कीमती तो नहीं होता किन्तु बहुत दुर्लभ होता है। ये कैल्शियम का पत्थर होता है जिसमे चक्र का निशान होता है जो इसके नाम का मुख्य कारण है। हिन्दू धर्म में गोमती चक्र का बड़ा महत्त्व है। विशेष रूप से ज्योतिष शास्त्र में इसे बहुत पवित्र माना जाता है। मुख्य रूप से गोमती चक्र श्रीहरि और श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ है।

बुधवार, अगस्त 19, 2020

महर्षि जमदग्नि

ब्रह्मा जी के श्रेष्ठ पुत्रों में एक थे महर्षि भृगु जिन्होंने त्रिदेवों की परीक्षा ली थी। इनकी कई पत्नियां थी जिनमे से एक थी दानवराज पौलोम की पुत्री "पौलोमी"। इन दोनों के एक परम तेजस्वी पुत्र हुए महर्षि च्यवन। च्यवन ने आरुषि नामक कन्या से विवाह किया जिनसे उन्हें और्व नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। और्व के एक पुत्र हुए ऋचीक, जो परम तपस्वी थे। इनका विवाह महाराज गाधि की पुत्री और विश्वामित्र की बहन सत्यवती से हुआ। सत्यवती को प्राप्त करने के लिए ऋचीक ने १००० श्यामकर्ण अश्व महाराज गाधि को भेंट किये थे। कालांतर में इन्ही श्यामकर्ण अश्व को प्राप्त करने के लिए ऋषि गालव ने ययाति कन्या माधवी का विनिमय किया था।

मंगलवार, अगस्त 11, 2020

कुश का वंश

श्रीराम के वंश का विस्तृत वर्णन धर्मसंसार पर पहले ही प्रकाशित हो चुका है। श्रीराम के दो पुत्र हुए - लव और कुश। निर्वाण लेते समय श्रीराम ने अपने साम्राज्य को स्वयं और अपने अनुज पुत्रों में समान रूप से बाँट दिया। लव को जो राज्य मिला उसका नाम उन्होंने लव नगर रखा। आज पाकिस्तान का लाहौर ही वो नगर था। कुश के राज्य का नाम कुश नगर पड़ा जिसे आज पाकिस्तान के कसूर के नाम से जाना जाता है। दुर्भाग्य ये है कि आज इन दोनों जगहों से हिन्दुओं को समाप्त कर दिया गया है। लव का वंश अधिक नहीं चला किन्तु कुश के वंशजों से अपने राज्य को बहुत बढ़ाया। आइये इस पर एक दृष्टि डालते हैं:

रविवार, अगस्त 02, 2020

यदुवंश

इस वेबसाइट का पहला लेख मैंने कुरुवंश (पुरुवंश) से किया था। श्रीकृष्ण का लेख लिखने में बहुत देर हो गयी। श्रीकृष्ण के वंश की शाखा भी उन्ही चक्रवर्ती सम्राट ययाति से चली जिनसे पुरु का वंश चला। पुरु ययाति के सबसे छोटे पुत्र थे और यदु सबसे बड़े। हालाँकि ययाति के श्राप के कारण सबसे प्रसिद्ध राजवंश पुरु का ही रहा जिसमें दुष्यंत, भरत, कुरु, हस्ती, शांतनु और युधिष्ठिर जैसे महान सम्राट हुए। ययाति के अन्य पुत्रों का वंश भी चला किन्तु चक्रवर्ती सम्राट केवल पुरु के वंश में ही हुए।

शनिवार, जुलाई 18, 2020

रुद्राक्ष

रुद्राक्ष हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र वस्तुओं में से एक माना गया है। कहते हैं कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने हेतु रुद्राक्ष सबसे सरल माध्यम है क्यूंकि ये स्वयं रूद्र से ही जन्मा है। शिव पुराण और पद्म पुराण में कहा गया है कि रुद्राक्ष धारण करने से अधम से अधम व्यक्ति भी स्वर्ग को प्राप्त होता है। रुद्राक्ष वास्तव में एक वृक्ष का फल होता है। ऐसे वृक्ष हिमालय में सबसे अधिक पाए जाते हैं। उसकेअतिरिक्त नेपाल और इंडोनेशिया में भी रुद्राक्ष के वृक्ष मिलते हैं। भारत में भी रुद्राक्ष के वृक्ष होते हैं किन्तु इनकी लकड़ियों को अंधाधुंध काटने के कारण भारत में ये दुर्लभ वृक्ष विलुप्त होने की कगार पर है।

शनिवार, जुलाई 11, 2020

पुष्कर द्वीप

पिछले लेख में हमने शाक द्वीप के विषय में पढ़ा। इस लेख में हम सप्तद्वीपों में से अंतिम पुष्कर द्वीप के विषय में जानेंगे।
  • पुष्कर द्वीप का आकर शाक द्वीप से दुगुना है। 
  • इस द्वीप का नाम यहाँ स्थिति अतिविशाल न्यग्रोध (वट) के वृक्ष के कारण पड़ा है। ये इतना विशाल है कि उसका शिखर दिखाई नहीं देता। कहते हैं इस विशाल वृक्ष में पातमपिता ब्रह्मा का स्थान है।