रविवार, जनवरी 14, 2018

मकर संक्रांति

सर्व-प्रथम आप सभी लोगों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें। आज पूरा देश और कई अन्य जगह विदेशों में भी मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। तो आइये आज हम मकर संक्रांति का महत्व जानते हैं और समझते हैं कि ये क्यों मनाया जाता है। मकर संक्रांति से जुडी कुछ पौराणिक कथाएं भी हैं और कई ऐसे पौराणिक प्रसंग हैं जो आज के ही दिन घटित हुए थे।

शुक्रवार, जनवरी 12, 2018

जब दुर्वासा ऋषि के श्राप से तीनों लोक श्रीहीन हो गए

महर्षि दुर्वासा महामुनि अत्रि एवं सती अनुसूया के कनिष्ठ पुत्र थे जो भगवान रूद्र के अंश से जन्मे थे। वे चन्द्र एवं दत्तात्रेय के भाई थे और पूरे विश्व में अपने क्रोध के कारण प्रसिद्ध थे। श्राप तो जैसे इनके जिह्वा के नोक पर रखा रहता था। पृथ्वी पर ना जाने कितने मनुष्य उनके क्रोध और श्राप का भाजन बनें किन्तु इन्होने स्वयं देवराज इंद्र को भी नहीं छोड़ा।

बुधवार, दिसंबर 20, 2017

पौराणिक काल के योद्धाओं का स्तर

हम सभी ने कई बार रामायण, महाभारत एवं अन्य पौराणिक कहानियों में योद्धाओं की पदवी के विषय में पढ़ा है। सबसे आम शब्द जो इन पुस्तकों में आता है वह है "महारथी" और ये शब्द इतना आम बना  दिया गया है कि किसी भी प्रसिद्ध योद्धा के लिए हम महारथी शब्द का प्रयोग कर लेते है जबकि सत्य ये है कि महारथी एक बहुत बड़ी श्रेणी होती थी और कुछ चुनिंदा योद्धा हीं महारथी के स्तर तक पहुच पाते थे। क्या आपको पता है कि इन श्रेणिओं को पाने के लिए भी कुछ योग्यता जरुरी होती थी? आज हम पौराणिक काल के योद्धाओं के स्तर के बारे में जानेंगे। यहाँ हम किसी साधारण सैनिक नहीं बल्कि उच्च कोटि के योद्धाओं की बात करेंगे।

सोमवार, अक्तूबर 16, 2017

इरावान

इरावान महाभारत का बहुचर्चित तो नहीं किन्तु एक मुख्य पात्र है। इरावान महारथी अर्जुन का पुत्र था जो एक नाग कन्या उलूपी से उत्पन्न हुआ था। द्रौपदी से विवाह के पूर्व देवर्षि नारद के सलाह के अनुसार पाँचों भाइयों ने अनुबंध किया कि द्रौपदी एक वर्ष तक किसी एक भाई की पत्नी बन कर रहेगी। उस एक वर्ष में अगर कोई भी अन्य भाई भूल कर भी बिना आज्ञा द्रौपदी के कक्ष में प्रवेश करेगा तो उसे १२ वर्ष का वनवास भोगना पड़ेगा। देवर्षि ने ये अनुबंध इस लिए करवाया था ताकि दौपदी को लेकर भाइयों के मध्य किसी प्रकार का मतभेद ना हो।

मंगलवार, मई 23, 2017

कायस्थ वंश

कायस्थों का स्त्रोत श्री चित्रगुप्तजी महाराज को माना जाता है। कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने चार वर्णो को बनाया (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र) तब यम जी ने उनसे मानवों का विवरण रखने में सहायता मांगी। फिर ब्रह्माजी ११००० वर्षों के लिये ध्यानसाधना मे लीन हो गये और जब उन्होने आँखे खोली तो देखा कि "आजानुभुज करवाल पुस्तक कर कलम मसिभाजनम" अर्थात एक पुरुष को अपने सामने कलम, दवात, पुस्तक तथा कमर मे तलवार बाँधे पाया।