रविवार, अप्रैल 12, 2015

३३ कोटि देवताओं का रहस्य

हिन्दू धर्म सागर की तरह विशाल है। इसकी विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दू धर्म में कुल देवी देवताओं की संख्या ३३ करोड़ बताई जाती है। सुनने में कुछ अजीब नहीं लगता? क्या ये संभव है कि किसी धर्म में कुल देवी देवताओं की संख्या ३३ करोड़ हो सकती है? किसी को भी आश्चर्य हो सकता है। लेकिन कहते हैं ना कि अधूरा ज्ञान हानिकारक हो सकता है। तो आईये हम इस बात का वास्तविक तथ्य जानते हैं।

शनिवार, जून 28, 2014

जब महादेव ने श्रीराम की परीक्षा ली

श्रीराम का वनवास ख़त्म हो चुका था। एक बार श्रीराम ब्राम्हणों को भोजन करा रहे थे तभी भगवान शिव ब्राम्हण वेश में वहाँ आये। श्रीराम ने लक्ष्मण और हनुमान सहित उनका स्वागत किया और उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया। भगवान शिव भोजन करने बैठे किन्तु उनकी क्षुधा को कौन बुझा सकता था? बात हीं बात में श्रीराम का सारा भण्डार खाली हो गया। लक्ष्मण और हनुमान ये देख कर चिंतित हो गए और आश्चर्य से भर गए। एक ब्राम्हण उनके द्वार से भूखे पेट लौट जाये ये तो बड़े अपमान की बात थी। उन्होंने श्रीराम से और भोजन बनवाने की आज्ञा मांगी।

शनिवार, मार्च 22, 2014

घटोत्कच

घटोत्कच भीम और राक्षस कन्या हिडिम्बा का पुत्र था। पांडवों के वंश का वो सबसे बड़ा पुत्र था और महाभारत के युध्द में उसने अहम भूमिका निभाई। हालाँकि कभी भी उसकी गिनती चंद्रवंशियों में नहीं की गयी (इसका कारण हिडिम्बा का राक्षसी कुल था) लेकिन उसे कभी भी अन्य पुत्रों से कम महत्वपूर्ण नहीं समझा गया। महाभारत के युद्ध में कर्ण से अर्जुन के प्राणों की रक्षा करने हेतु घटोत्कच ने अपने प्राणों की बलि दे दी।

सोमवार, अगस्त 12, 2013

प्रजापति दक्ष की पुत्रियाँ और उनके पति

पुराणों के अनुसार दक्ष परमपिता ब्रह्मा के पुत्र थे जो उनके दाहिने पैर के अंगूठे से उत्पन्न हुए थे। ये ब्रह्मा के उन प्रथम १६ पुत्रों में थे जो "प्रजापति" कहलाते थे। प्रजापति दक्ष की दो पत्नियाँ थी - स्वयंभू मनु की कन्या प्रसूति और वीरणी (पंचजनी)। प्रसूति से दक्ष की चौबीस कन्याएँ थीं और वीरणी से साठ कन्याएँ। उन सभी के लिए दक्ष प्रजापति ने श्रेष्ठ वर खोजे। आइये उनकी पुत्रियों और उनके पतियों के विषय में जानते हैं।

शनिवार, फ़रवरी 09, 2013

पञ्चसती (पञ्चकन्या)

हिन्दू धर्म में पञ्च सतियों का बड़ा महत्त्व है जिन्हे पञ्चकन्या भी कहा जाता है। ये पांचो सम्पूर्ण नारी जाति के सम्मान की साक्षी मानी जाती हैं। विशेष बात ये है कि इन पांचो स्त्रियों को अपने जीवन में अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और साथ ही साथ इनके पतिव्रत धर्म पर प्रश्न भी उठाए गए, किन्तु इन सब के पश्चात् भी वे हमेशा पवित्र और पतिव्रत धर्म की प्रतीक मानी गई। कहा जाता है कि नित्य सुबह इनके बारे में चिंतन करने से सारे पाप धुल जाते हैं। आइये इनके बारे में कुछ जानें।

१. अहिल्या:
ये महर्षि गौतम की पत्नी थी। देवराज इन्द्र इनकी सुन्दरता पर रीझ गए और उन्होंने अहल्या को प्राप्त करने की जिद ठान ली पर मन ही मन वे अहल्या के पतिव्रत से डरते भी थे। एक बार रात्रि में हीं उन्होंने गौतम ऋषि के आश्रम पर मुर्गे के स्वर में बांग देना शुरू कर दिया। गौतम ऋषि ने समझा कि सवेरा हो गया है और इसी भ्रम में वे स्नान करने निकल पड़े। अहल्या को अकेला पाकर इन्द्र ने गौतम ऋषि के रूप में आकर अहल्या से प्रणय याचना की और उनका शील भंग किया। गौतम ऋषि जब वापस आये तो अहल्या का मुख देख कर वे सब समझ गए। उन्होंने इन्द्र को नपुंसक होने का और अहल्या को शिला में परिणत होने का श्राप दे दिया। युगों बाद श्रीराम ने अपने चरणों के स्पर्श से अहल्या को श्राप मुक्त किया।