सोमवार, सितंबर 05, 2011

अक्षौहिणी सेना

अक्षौहिणी प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था जिसका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है। किसी भी अक्षौहिणी सेना के चार विभाग होते थे:
  1. गज (हाँथी सवार)
  2. रथ (रथी)
  3. घोड़े (घुड़सवार)
  4. सैनिक (पैदल सिपाही)

प्राचीन भारत का नक्शा

मंगलवार, फ़रवरी 08, 2011

एकश्लोकी रामायण

।। आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनं
वैदेही हरणं, जटायु मरणं, सुग्रीव संभाषणं
बालि निर्दलं, समुन्द्र तरणं, लंकापुरी दाहनं
पश्चाद्रावण-कुम्भकरण हननं, एतद्धि रामायणं ।।

सोमवार, अगस्त 30, 2010

दशावतार

हिन्दू धर्म में अवतारों की बड़ी महत्ता है। वैसे तो कई देवताओं ने अवतार लिए किन्तु भगवान विष्णु के १० अवतारों का महत्त्व सबसे अधिक माना जाता है। भगवान शिव के भी कई अवतार हैं किन्तु उनके लिए ज्योतिर्लिंगों का ही उल्लेख होता है। प्रत्येक युग में जितने चरण होते हैं, श्रीहरि के उतने ही अवतार होते हैं। युगों का विस्तृत वर्णन आप यहाँ पढ़ सकते हैं।
  1. सतयुग: इस युग में कुल चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में भगवान विष्णु ने चार अमानवीय अवतार लिए। ये हैं - मत्स्य, कूर्म, वाराह एवं नृसिंह

शुक्रवार, जुलाई 30, 2010

हिन्दू धर्म में सप्त संख्या का महत्त्व

हिन्दू धर्म में सप्त संख्याओं का बड़ा महत्त्व है। ऐसी कई चीजें हैं जिससे सप्त संख्या सीधे तौर पर जुडी हुई है। आइए इसे देखते हैं: