बुधवार, जनवरी 20, 2021

मंदार पर्वत - वो स्थान जहाँ समुद्र मंथन हुआ था

विगत मकर संक्रांति को मुझे मंदार पर्वत जाने का अवसर मिला। मैं स्वयं भागलपुर (बिहार) का रहने वाला हूँ और बचपन से कई बार यहाँ जा चुका हूँ। ये वही पर्वत है जिससे प्राचीन काल में समुद्र मंथन किया गया था। ये वही मंदराचल पर्वत है जिसे समुद्र मंथन में मथनी के रूप में उपयोग में लाया गया था। इस स्थान का नाम "बौंसी" है जो "वासुकि" का अपभ्रंश है। नागराज वासुकि को ही मंदराचल पर्वत की रस्सी के रूप में उपयोग किया गया था। उन्ही के नाम पर इस स्थान का नाम पड़ा जो अब अपभ्रंश होकर बौंसी हो गया है।
बौंसी बिहार राज्य के भागलपुर कमिश्नरी में बांका जिला के अंतर्गत आता है। मेरे शहर भागलपुर से ये तकरीबन ५० किलोमीटर दूर है। बौंसी पहुँचने से पहले ही आपको १००० फुट ऊँचा ये पर्वत दिखने लगता है। बौंसी बस स्टैंड से ये तकरीबन ४ किलोमीटर दूर है। प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के दिन यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है जिससे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। जब आप पर्वत की ओर बढ़ते हैं तो सैकड़ों की संख्या में आपको लोग उसी ओर जाते दिख जाते हैं।

इस पर्वत के ऊपर जो मंदिर है वो जैन और हिन्दू दोनों धर्मों के लोगों के लिए पूज्य है। हिन्दू लोगों की आस्था के अनुसार ये भगवान श्रीहरि का मंदिर है तो जैन लोगों के अनुसार ये उनके गुरु दिगंबर "वासुपूज्य" महाराज का मंदिर है। पूरे मार्ग में आपको एक भी ऐसा हिन्दू नहीं मिलेगा जो ऊपर जाकर गुरु वासुपूज्य के चरणों में अपना सर ना नवाये। साथ ही आपको कोई जैन भी ऐसा नहीं मिलेगा जो मार्ग में आने वाले सैकड़ों मंदिरों को प्रणाम करता हुआ ना चले। दो धर्मों का ऐसा मेल आपको कदाचित ही कही और देखने को मिले।
जब आप पर्वत की तलहटी पर पहुँचते हैं तो आपको एक बड़ा सरोवर दिखता है। इसका नाम "पापहरणी" है और ऐसी मान्यता है कि इसमें स्नान करने से सभी पापों का नाश हो जाता है। उसी सरोवर के मध्य लक्ष्मी-नारायण का एक सुन्दर मंदिर है। इसके बाद से पर्वत की चढ़ाई आरम्भ होती है जो बहुत अधिक कठिन नहीं है। सरकार की ओर से यहाँ सीढ़ियां बनवा दी गयी है जिससे ऊपर चढ़ने में सुविधा होती है। थोड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद आपको दो कुंड देखने को मिलते हैं - "सीता कुंड" एवं "शंख कुंड"। ऐसा माना जाता है कि सीता कुंड में माता सीता ने स्नान किया था और शंख कुंड के अंदर एक अद्भुत शंख है और उसी से जल का प्रवाह होता है।
इस पर्वत पर आपको कई साधु संन्यासी दिख जाएंगे। उनमें से एक थोड़ा ऊपर जाने के बाद भगवान शिव के एक मंदिर के निकट मिलते हैं। कहा जाता है कि वे पिछले ४० वर्षों से मंदार पर ही डेरा जमाये बैठे हैं। उनके साथ उनके कई शिष्य भी हैं। इस पर्वत पर जगह-जगह गोपालन भी होता है और वही इन साधुओं का निर्वहन करता है। कई लोग विशेष रूप से इन साधु महात्मनों का आशीर्वाद लेने मंदार पर्वत पहुँचते हैं। मार्ग में आपको ऐसे ही असंख्य छोटे-बड़े मंदिर और देव प्रतिमाएं दिखती हैं जिनकी पूजा करते हुए यात्री ऊपर चढ़ते रहते हैं।
पर्वत की चोटी पर पहुँच कर आपको एक बड़ा जैन मंदिर दिखता है जो जैन यात्रियों का महत्वपूर्ण तीर्थ है। यहाँ पर दिगंबर वासुपूज्य महाराज के चरण उकेरे गए हैं जिनके दर्शनों के लिए जैन यात्री दूर-दूर से यहाँ आते हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी मंदिर के नीचे एक विशाल कुंड है जिसमें एक विशाल शंख छिपा हुआ है। हालाँकि यात्रियों को उसे देखने की आज्ञा नहीं है। ऊपर से नीचे का दृश्य भी बहुत मनभावन है। यहाँ शिखर से नीचे तक सरकार द्वारा "रोप-वे" लगाने का कार्य भी आरम्भ है ताकि यात्री सुगमता से चोटी पर पहुँच सकें।
ये पर्वत रहस्य और विचित्रताओं से भरा हुआ है। इस पर्वत पर आज भी नागराज वासुकि के रगड़ के चिह्न हैं जो समुद्र मंथन की किवदंती को सच साबित करते हैं। पर्वत से नीचे उतरते समय आपको पर्वत पर उकेरा एक विशाल चेहरा दिखता है। ये चेहरा मधु दैत्य का है। ऐसा माना जाता है कि जब श्रीहरि ने मधु और कैटभ का वध किया तो मधु का सर इसी पर्वत पर आकर गिरा। इसी के निकट एक छोटी गुफा है जो सर्वाधिक प्राचीन मानी जाती है। इस गुफा में भगवान नृसिंह का मंदिर है जो अपने आप में बहुत रहस्य्मय है। 

सब देखने के पश्चात भक्तगण सीता कुंड से होते हुए वापस पर्वत के नीचे उतर आते हैं और फिर इस अद्भुत यात्रा का अंत होता है। वापस बौंसी जाते हुए भी मार्ग में आपको कई छोटे-बड़े मंदिर मिलते हैं जिनमें से सबसे प्रसिद्ध भगवान विष्णु का मंदिर है। वापसी में भक्त इस मंदिर के दर्शन करने अवश्य रुकते हैं। ये पर्वत पौराणिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और इसी लिए हमारा सरकार से ये अनुरोध है कि इसका उचित संरक्षण करें। जय श्रीहरि।

2 टिप्‍पणियां:

  1. वैदिक पुण्यस्थल के वर्तमान स्थिति की जानकारी देकर आपने अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। ऐसे अनगिनत पुण्यक्षेत्र हैं, जिनकी वर्तमान स्थिति अज्ञात है। आपको मुक्तकण्ठ से धन्यवाद और आभार।

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    1. बहुत आभार सर। इस पर एक विस्तृत वीडियो बनाने वाला हूँ, लेख में सारी चीजें समाविष्ट नहीं की जा सकती, आशा है आपको विडिओ और पसंद आएगा।

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