रविवार, जुलाई 26, 2020

रुद्राक्ष - २: रुद्राक्ष के प्रकार

पिछले लेख में आपने रुद्राक्ष के विषय में पढ़ा। इस लेख में हम रुद्राक्ष के प्रकार के विषय में जानेंगे। रुद्राक्ष के विभिन्न प्रकार को उनके मुख से जाना जाता है जैसे एक मुखी, दो मुखी इत्यादि। रुद्राक्ष १ से २१ मुखी तक हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त गणेश और गौरी-शंकर नाम के दो विशेष रुद्राक्ष भी पाए जाते हैं। प्रत्येक प्रकार के रुद्राक्ष का अपना प्रभाव और महत्त्व होता है। जिस माला में १ से २१ मुखी तक के रुद्राक्ष का समागम हो उसे हम इन्द्रमाला कहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में वास्तविक इंद्रमाला की कीमत लगभग तीन करोड़ रूपये तक हो सकती है।

बाजार में आपको १ से १४ मुखी तक के रुद्राक्ष मिल जाते हैं पर इससे अधिक मुख के रुद्राक्ष थोड़े दुर्लभ हैं। रुद्राक्ष के एक छिद्र से दूसरे छिद्र तक जितनी लंबवत रेखाएं जाती हैं उस रुद्राक्ष को उतने मुखी ही कहा जाता है। सभी रुद्राक्षों में पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे सरलता से उपलब्ध होता है। आइये इन रुद्राक्षों के विषय में जानते हैं:
  1. एक मुखी रुद्राक्ष: ये साक्षात् शिव का रूप होता है। ये एक सर्वोच्च परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त ये का भी प्रतिनिधि है। इसे पाना अत्यंत दुर्लभ होता है किन्तु अगर वास्तविक एक मुखी रुद्राक्ष मिल जाये तो समझना चाहिए कि साक्षात् महादेव की कृपादृष्टि हो गयी।  
  2. दो मुखी रुद्राक्ष: ये रुद्राक्ष भगवान शंकर के अर्धनारीश्वर रूप का प्रतिनिधित्व करता है। इसे पहनने से शिव और शिवा दोनों प्रसन्न होते हैं। 
  3. तीन मुखी रुद्राक्ष: ये रुद्राक्ष त्रिदेवों और त्रिदेवियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसे अग्नि स्वरुप भी माना गया है। इसके अतिरिक्त ये तीनों काल (भूत, वर्तमान और भविष्य) का भी प्रतिनिधित है। 
  4. चार मुखी रुद्राक्ष: ये भगवान ब्रह्मा के चतुर्मुख का प्रतिनिधित्व करता है। इसे धारण करने से ब्रह्मदेव और माता सरस्वती की कृपा सदा बनी रहती है। ये परमपिता ब्रह्मा से उत्पन्न चार वर्णों और चार वेदों का भी प्रतिनिधि है। 
  5. पंचमुखी रुद्राक्ष: ये महादेव के पांच मुखों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त ये पंचमुखी हनुमान और पंचमहाभूतों को भी दर्शाता है। ये पांच ज्ञानेन्द्रियाँ, पंचदेवता और पंचकन्याओं का भी प्रतीक है। पृथ्वी पर पाने जाने वाले सभी रुद्राक्षों में पंचमुखी रुद्राक्ष ही सबसे अधिक पाया जाता है। अगर आपको पता नहीं कि आपको कौन सा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए तो आप बिना किसी संकोच के पंचमुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं। 
  6. छः मुखी रुद्राक्ष: ये कार्तिकेय के छः मुखों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त ये छः ऋतुओं का भी प्रतीक है। इसे शत्रुंजय रुद्राक्ष भी कहते हैं। 
  7. सप्त मुखी रुद्राक्ष: ये सात लोकों और सप्तर्षियों का प्रतिनिधित्व करता है। ये मानव के सात नाड़ीचक्र और सप्त पुरियों का भी प्रतिनिधि है। 
  8. अष्ट मुखी रुद्राक्ष: ये अष्ट मातृकाओं और अष्टभैरव का प्रतिनिधित्व करता है। ये अष्ट वसु एवं अष्ट सिद्धियों का भी प्रतीक है। इसे पहनने से श्रीगणेश की कृपा भी प्राप्त होती है। 
  9. नौ मुखी रुद्राक्ष: ये माता के नौ रूपों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त ये नवग्रहों, नवरत्नों और नौ निधियों का भी प्रतीक है। 
  10. दश मुखी रुद्राक्ष: ये रुद्राक्ष महाविष्णु एवं उनके दस अवतारों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त ये दस महाविद्या, दस दिशाओं और दस दिक्पालों का भी प्रतिनिधि है। ये रुद्राक्ष यमराज को भी अत्यंत प्रिय है।
  11. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष: ये ११ रुद्रों का प्रतिनिधित्व करता है। 
  12. बारह मुखी रुद्राक्ष: ये रुद्राक्ष १२ आदित्यों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त ये १२ राशियों का भी प्रतिनिधि है। भगवान विष्णु को भी ये रुद्राक्ष अत्यंत प्रिय है।  
  13. तेरह मुखी रुद्राक्ष: ये देवराज इंद्र का प्रतिनिधि है। ये १२ आदित्य और भगवान विष्णु का भी प्रतिनिधि है।
  14. चौदह मुखी रुद्राक्ष: ये रुद्रावतार हनुमान का प्रतिनिधि है। ये रुद्राक्ष अश्विनीकुमारों को भी अतिप्रिय है। 
  15. पंद्रह मुखी रुद्राक्ष: ये महादेव के पशुपतिनाथ का प्रतिनिधि है जिसे पहनने से समस्त पापों का नाश हो जाता है। 
  16. सोलह मुखी रुद्राक्ष: ये भगवान शिव और भगवान विष्णु के हरिहर रूप का प्रतिनिधित्व करता है। 
  17. सत्रह मुखी रुद्राक्ष: ये श्रीकृष्ण और देवशिल्पी विश्वकर्मा का प्रतिनिधि है। इसके अतिरिक्त ये अष्ट सिद्धि एवं नव निधि का प्रतिनिधि भी है। 
  18. अट्ठारह मुखी रुद्राक्ष: ये धरती माँ और भैरव का प्रतिनिधित्व करता है। ये अट्ठारह महापुराओं का भी प्रतिनिधि है। 
  19. उन्नीस मुखी रुद्राक्ष: ये भगवान शिव के १९ अवतारों का प्रतिनिधि है। 
  20. बीस मुखी रुद्राक्ष: ये भगवान ब्रह्मा और श्रीहरि के सम्मलित रूपों का प्रतिनिधित्व करता है। 
  21. इक्कीस मुखी रुद्राक्ष: ये धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी का प्रतिनिधित्व करता है। इसे धारण करने से धन की कमी कभी नहीं होती है।
  22. गणेश रुद्राक्ष: ये साक्षात् गणेश रूप ही है। इसे पहनने से विघ्नहर्ता की कृपा सदैव प्राप्त होती है। 
  23. गौरी शंकर रुद्राक्ष: ये जुड़वां रुद्राक्ष होता है जिसमे दो रुद्राक्ष एक दूसरे से जुड़े होते हैं। ये भी शिव और शिवा के अर्धनारीश्वर रूप का प्रतीक है।

2 टिप्‍पणियां:

कृपया टिपण्णी में कोई स्पैम लिंक ना डालें एवं भाषा की मर्यादा बनाये रखें।