शुक्रवार, अप्रैल 17, 2020

मंदोदरी - २: सतीत्व

पिछले लेख में आपने मंदोदरी के पिछले जन्म की कथा पढ़ी और किस प्रकार उसका विवाह रावण के साथ हुआ। रावण से विवाह के बाद मंदोदरी लंका की महारानी बनी जो रावण ने अपने सौतेले भाई कुबेर से युद्ध में छीना था। मंदोदरी स्वयं विदुषी थी और कहा जाता है कि वो प्रायः राज-काज चलाने में रावण की सहायता करती थी। रावण को मंदोदरी से मेघनाद, प्रहस्त और अक्षयकुमार नामक तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुए।

रावण ने त्रिकूट पर्वत के ऊपर अपना भव्य विलास भवन बना रखा था जहाँ रावण के साथ बैठने की अनुमति केवल मंदोदरी को ही थी। ऐसी मान्यता है कि रावण के साथ मनोरंजनार्थ मंदोदरी ने ही सर्वप्रथम शतरंज के खेल का आरम्भ किया था। उसी खेल से चतुरंगिणी और अक्षौहिणी सेना के सन्दर्भ का आरम्भ हुआ। आज राजस्थान के जोधपुर जिले में "मंडोर" नामक एक स्थान है जिसका नाम मंदोदरी पर ही पड़ा है और मंदोदरी वहाँ की कुलदेवी मानी जाती है। उनकी मान्यता है कि इसी स्थान पर रावण और मंदोदरी का विवाह हुआ था।

उत्तर रामायण के अनुसार मंदोदरी के दो भाई भी थे - दुदुम्भी और मायावी, जिन्हे मय दानव का पुत्र माना जाता है। ये दोनों वही दैत्य थे जिनका वध वानर राज बाली ने किया था। रावण भी बाली से पराजित हो चुका था और दोनों की मैत्री थी। मंदोदरी के भाइयों के वध के बाद भी रावण और बाली की मित्रता बनी रही। इस बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ें। 

मंदोदरी को सदा से पता था कि रावण में कितनी बुराई है किन्तु फिर भी उसने सदा उससे प्रेम किया। किन्तु उसके बाद भी वो सदा रावण को सही मार्ग पर लाने का प्रयास करती रही। ऐसा वर्णन है कि मंदोदरी ने रावण को नवग्रहों को बंदी बनाने से रोका था। जब रावण वेदवती पर मुग्ध हुआ तब भी मंदोदरी ने उसे ऐसा करने से मना किया किन्तु रावण नहीं माना और उससे उसका अनिष्ट हुआ। रावण को मंदोदरी की नसीहत कभी पसंद नहीं आयी किन्तु तब भी उसके लिए रावण के मन में कभी सम्मान कम नहीं हुआ।

जब शूर्पणखा लक्ष्मण से अपमानित होकर लंका आई तब मंदोदरी ने उसे सांत्वना दी। किन्तु जब उसने रावण को सीता हरण का सुझाव दिया तब मंदोदरी ने उसका विरोध किया। जब रावण सीता का हरण कर लाया तब मंदोदरी ने ही रावण को सुझाव दिया कि उन्हें राजमहल के बजाय अशोक वाटिका में रखें। मंदोदरी सीता से बड़ी थी और सदा उन्होंने उनके प्रति सहानुभूति रखी। जब सीता अशोक वाटिका में थी तब मंदोदरी उन्हें अपने उत्तम वस्त्र ये कहते हुए भेजती हैं कि ये एक रानी की ओर से एक अन्य रानी के लिए उपहार है। हालाँकि माँ सीता वो वस्त्र ये कहते हुए नहीं लेती कि उनके पास माता अनुसूया के दिए दिव्य वस्त्र है। 

जब रावण सीता को किसी प्रकार का प्रलोभन ना दे पाया तो वो उनकी हत्या करने को उद्धत हुआ। तब मंदोदरी ने रावण का हाथ पकड़ लिया और समझा बुझा कर ऐसा करने से मना कर दिया। मंदोदरी ने ही मेघनाद और अपने अन्य पुत्रों को ये आज्ञा दी कि वो कभी सीता के सामने ना पड़े। भगवान शिव के वरदान के कारण वो सदा युवती बनी रहती थी। वो इतनी सुन्दर थी कि जब हनुमान सीता संधान के लिए लंका आये तब जब उन्होंने मंदोदरी को देखा तो उनका तेज देख कर उन्हें लगा कि यही माँ सीता है। वे मंदोदरी को प्रणाम करते हैं। किन्तु जब उन्होंने रावण को उनके साथ सोता देखा तब उन्हें विश्वास हुआ कि ये माता सीता नहीं है क्यूंकि वे ऐसा कभी नहीं कर सकती।

रावण के साथ मंदोदरी सीता से मिलने गयी किन्तु अकेले उन दोनों के मिलने का वर्णन नहीं है। ऐसा माना जाता है कि मंदोदरी ने ही त्रिजटा को ये आज्ञा दी कि वो सीताजी का उचित ध्यान रखे और उनके मनोबल को बढाती रहे। समय आने पर मंदोदरी रावण की अवज्ञा की और विभीषण का समर्थन किया कि सीता को श्रीराम को लौटा दिया जाये। दक्षिण भारत के अद्भुत रामायण के अनुसार रावण को सीता का पिता और मंदोदरी को सीता की माता बताया गया है। देवी भागवत पुराण के अनुसार जब रावण का विवाह मंदोदरी से हुआ तो आकाशवाणी हुई कि उनकी पहली संतान रावण के नाश का कारण बनेगी। तब जब सीता का जन्म हुआ तो रावण ने उसे त्याग दिया और उसे भूमि के नीचे दबा दिया जहाँ से जनक ने उन्हें प्राप्त किया।

मंदोदरी द्वारा रावण से बार-बार सीता को लौटने की बात करने पर रावण क्रुद्ध होकर उसे स्त्रियों के ८ अवगुणों के बारे में बताता है। ऐसी मान्यता है कि रावण की मृत्यु केवल एक दिव्य बाण से ही हो सकती थी जो स्वयं रावण के पास था। उसने उस बाण को सुरक्षित रखने के लिए मंदोदरी को दे दिया। बाद में विभीषण के कहने पर हनुमान ने एक ब्राह्मण के रूप में वो बाण मंदोदरी के पास से चुरा लिया जिससे अंततः श्रीराम ने रावण का वध किया। 

जब रावण का वध हुआ तब मंदोदरी के करूँ विलाप का वर्णन आता है। वो रावण के साथ सती होने वाली थी किन्तु श्रीराम के समझाने पर उसने वो विचार त्याग दिया। बाद में जब विभीषण का राज्याभिषेक हुआ तब श्रीराम के ही सुझाव देने पर उसने विभीषण से विवाह कर लिया। मंदोदरी का नाम पञ्चसतियों में आता है जिनके स्मरण मात्र से सभी पापों का नाश हो जाता है। हमारे धर्म ग्रंथों में जिन महान सतियों का वर्णन है उनमे मंदोदरी का नाम प्रमुखता लिया जाता है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर वर्णन ।
    आप सत्य सनातन धर्म के स्तंभ हैं नीलाभ जी।
    हार्दिक अभिनदंन।

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    1. बहुत आभार। मैं बस अपने धर्म को पुनरुत्थान की ओर ले जाने का प्रयास मात्र कर रहा हूँ।

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