सोमवार, फ़रवरी 24, 2020

वैद्यराज चरक - १: परिचय

चरक एक महान वैद्य थे जिन्हे विश्व का सबसे पहला वैद्य माना जाता है। यही नहीं, इन्हे आयुर्वेद का जनक भी माना जाता है। इनके जन्म को लेकर कुछ मतभेद है। कुछ लोग इनका जन्म ईसा से ३०० वर्ष पहले का मानते हैं जबकि अधिकतर लोग इनका जन्म महात्मा बुद्ध से भी पहले का मानते हैं। इसमें से दूसरा मत ही ज्यादा तर्कसंगत लगता है। कुछ लोग चरक और कनिष्क को एक मानते हैं किन्तु ऐसा नहीं है। कनिष्क बौद्ध थे किन्तु चरक साहित्य में बौद्ध मतों का कठोरता से खंडन किया गया है।

इन्होने चिकित्सा विज्ञान पर एक एक महान ग्रन्थ की रचना की है जिसे "चरक संहिता" के नाम से जाना जाता है। ये ग्रन्थ आयुर्वेद के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथों में से एक माना जाता है। चरक संहिता में कई श्लोक पाली भाषा में लिखे गए जो ये सिद्ध करते हैं कि चरक महात्मा बुद्ध के समकालीन या उनसे भी पहले जन्मे थे। ये भी एक कारण है कि इन्हे कनिष्क के अलग मना जाता है है क्यूंकि कनिष्क बौद्ध से बाद जन्मे थे और चरक पहले।

चरक का जन्म नागवंश में हुआ था और कई पौराणिक ग्रंथों में इन्हे स्वयं शेषनाग का अवतार माना जाता है। कुछ लोग द्वापरयुग में जन्मे महर्षि अग्निवेश को ही चरक मानते हैं। किन्तु ये बात भी तर्कसंगत प्रतीत नहीं होती क्यूंकि स्वयं चरक के अनुसार वे अग्निवेश से बड़े प्रभावित थे। यही नहीं, उनके ग्रन्थ चरक संहिता में भी कई बातें महर्षि अग्निवेश द्वारा रचित अग्निवेशतन्त्र से भी ली गयी हैं।

पौराणिक ग्रंथों में उनका जन्मस्थान पंचनद जनपद में इरावती और चन्द्रभाग नदी के बीच स्थित "कपिस्थल" बताया गया है जो आज जालंधर के नाम से जाना जाता है। पंचनद को आज पंजाब और इरावती को रावी और चन्द्रभाग को चेनाब नदी के नाम से जाना जाता है। 

बाल्यकाल से ही इन्होने भीषण रोग की विभीषिका देखी जिसने इन्हे इस बात के लिए प्रेरित किया कि मानव के कल्याण के लिए कार्य करें। बहुत कम आयु में ही इन्होने बहुत स्थानों का भ्रमण किया और घूम-घूम कर लोगों की सेवा की। इसी कारण इनका नाम ही "चरक" पड़ गया जिसका अर्थ होता है चलना।  बहुत ही कम आयु में चरक को शिक्षा के लिए तक्षशिला विश्वविद्यालय भेज दिया गया जहाँ ऋषि वैंशपायन इनके गुरु बने और उनकी सारी शिक्षा वहीँ से हुई।

जिस समय वे तक्षशिला में शिक्षा अध्यन कर रहे थे उसी समय से उन्होंने अपने ग्रन्थ पर कार्य करना आरम्भ कर दिया। उन दिनों ग्रन्थ या किसी उत्तम रचना को "शाखा" के नाम से जाना जाता था। सामान्य भाषा में कहें तो शाखाएं उन दोनों के विद्यालय कहे जा सकते हैं जहाँ कई विषयों का अध्ययन किया जाता था। चरक ने जो अपने ग्रन्थ "चरक संहिता" की रचना की कदाचित उसी कारण उसकी एक शाखा "चरक शाखा" के रूप में जानी जाती है।

इनके द्वारा रचित चरक संहिता को "सुश्रुत संहिता" के साथ आयुर्वेद की सर्वश्रेष्ठ रचना माना जाता है। यहाँ तक कि आज भी आयुर्वेद के छात्रों को चरक संहिता का अध्ययन करवाया जाता है और आयुर्वेद में जो चिकित्सा पद्धति है वो भी इनके इसी ग्रन्थ से प्रेरित है। इस लेख के अगले भाग में हम इनके इसी महान ग्रन्थ के बारे में विस्तार पूर्वक जानेंगे।

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