रविवार, जुलाई 28, 2019

क्या श्रीकृष्ण माँ काली के अवतार हैं? - २

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस प्रकार देवी पुराण में श्रीकृष्ण को माँ काली का और राधा को भगवान शंकर का अवतार माना गया है। इसका साक्ष्य है वृन्दावन में स्थित श्रीकृष्ण-काली मंदिर। आज के इस लेख में हम मुख्यतः दो बातों का जिक्र करेंगे - पहली एक घटना जिसमे माँ काली ने राधा रूपी भगवान शंकर के मान की रक्षा की। और दूसरी कि माँ काली और श्रीकृष्ण में क्या-क्या समानताएं हैं। तो चलिए आरम्भ करते हैं।

जब कृष्ण १६ वर्ष के हुए तब तक उनकी और बलराम की प्रसिद्धि सम्पूर्ण विश्व में फ़ैल चुकी थी। तब कंस के अंत का समय निकट जानकर उसके मंत्री अक्रूर ने कृष्ण-बलराम को ब्रज से मथुरा ले जाने की ठानी। कंस का अंत तो कृष्ण को ही करना था और यही नियति जानकर श्रीकृष्ण और बलराम ब्रज छोड़ कर मथुरा चले गए। वहाँ प्रथम उन्होंने कंस का वध किया, तत्पश्चात जरासंध के बार-बार के आक्रमण से बचने के लिए एक नयी नगरी द्वारिका बसा कर सभी यादवों सहित वे वहाँ बस गए।

राधा, जो देवी पुराण के अनुसार वास्तव में भगवान शंकर का अवतार थी, श्रीकृष्ण के जाने के बाद ब्रज में अकेली रह गयी। कृष्ण से मिलने की कोई सम्भावना ना देख कर उसके घर वालों ने उसका विवाह "अयन" नामक एक वीर गोप से करवा दिया। कहते हैं इस विवाह का सारा प्रबंध कृष्ण के दत्तक पिता नन्द ने ही करवाया था। राधा का विवाह तो अयन से हो गया किन्तु वो तो अपना तन-मन श्रीकृष्ण को सौंप चुकी थी। इसी कारण राधा सदा ही एकांत में श्रीकृष्ण का ही जाप करती रहती थी।

अयन स्वयं माँ काली का बहुत बड़ा भक्त था और राधा से अत्यंत प्रेम करता था। किन्तु राधा के इस व्यहवार से उसकी ननद को उसपर सदा संदेह रहता था। वो अयन को इस बारे में बताना तो चाहती थी किन्तु बिना साक्ष्य को अयन से क्या कहती? एक दिन उसने राधा को अपने कक्ष में कृष्ण का जाप करते हुए देख लिया। ये देखकर वो तुरंत अपने भाई अयन के पास पहुँची और उससे कहा कि तुम्हारी पत्नी किसी कृष्ण के नाम का जाप कर रही है। ये सुनकर अयन अत्यंत क्रोध में अपनी बहन के साथ घर वापस आया। 

जब वो अपने कक्ष में गया तो देखा कि राधा के मुँह से माँ काली का जाप निकल रहा है। अपनी पत्नी द्वारा अपनी आराध्या के नाम का जाप सुनकर अयन बड़ा प्रसन्न हुआ और अपनी बहन को खूब सुनाया। उसकी बहन को ये रहस्य समझ नहीं आया कि पहले तो राधा कृष्ण के नाम का जाप कर रही थी किन्तु उसके भाई के आते ही वो जाप माँ काली के नाम का कैसा हो गया? 

दरअसल अगर अयन राधा को कृष्ण के नाम का जाप करते देख लेता तो अनर्थ हो जाता। इसी कारण माँ काली ने उसकी लाज बचाने के लिए उसके शब्दों को बदल दिया। जब राधा को ये पता चला तो उसने माँ काली का बहुत धन्यवाद किया और वो भी माँ काली की भक्त बन गयी। तब से ही कृष्ण को "काली" के रूप में एक और नाम मिल गया और राधा के लिए कृष्ण और काली में कोई भेद नहीं रहा। तब से कृष्ण को माँ काली का ही स्वरुप समझा जाता है। आज भी अगर आप बंगाल जायेंगे तो भक्तों को "जय माँ श्यामा काली" और "जय माँ कृष्ण काली" का जयकारा लगाते देख सकते हैं। 

अब जानते हैं कि श्रीकृष्ण और माँ काली में क्या समानताएं हैं:
  • श्रीकृष्ण के दो बाएं हाथों में शंख और पद्म (कमल का फूल) है तो मां काली के दाहिनी ओर के दोनों हाथ भक्तों को अभय दान और वरदान दे रहे हैं। 
  • श्रीकृष्ण के दोनों दाएं हाथों में चक्र और गदा है तो मां काली के दोनों बाएं हाथों में नरमुंड और खड्ग है।
  • अर्थात दो हाथों में दुष्ट शक्तियों के संहार के साधन और दो हाथों में भक्तों की रक्षा और वरदान, यह संकेत श्रीकृष्ण और माँ काली दोनों के चित्र से मिलता है।
  • श्रीकृष्ण को योगेश्वर कहा गया है और माँ काली भी योगमुद्रा में रहती हैं।
  • श्रीकृष्ण के पास दिव्य दृष्टि है तो माँ काली के पास दिव्य तीसरा नेत्र है। 
  • माँ काली अनंत रूपा हैं और श्रीकृष्ण भी अर्जुन को गीता ज्ञान देते हुए अपने अनंत रूप के दर्शन करवाते हैं। अर्थात दोनों के रूप अनंत हैं। 
  • श्रीकृष्ण युद्ध में धर्म अधर्म का ध्यान ना करते हुए दुष्टों को दंड देते हैं। धर्मयुद्ध महाभारत जीतने के लिए वो छल का भी सहारा लेते हैं। माँ काली का क्रोध तो सब जानते ही हैं। क्रोध में उन्होंने उचित-अनुचित का विचार छोड़ सबका नाश आरम्भ कर दिया था। 
  • श्रीकृष्ण और माँ काली दोनों महादेव को समर्पित हैं। 
  • श्रीकृष्ण पुरुष हैं तो माँ काली प्रकृति। वास्तव में दोनों एक ही परमात्मा के दो स्वरुप हैं। जो कृष्ण है वह काली है और जो काली है वही कृष्ण है।
जय माँ काली। जय श्रीकृष्ण।।

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