30 सितंबर 2019

महर्षि भृगु - २

पिछले लेख में आपने महर्षि भृगु के जन्म, वंश, पत्नियों और पुत्रों के विषय में पढ़ा। अब आगे... शिव पुराण एवं वायु पुराण में ऐसा वर्णन है कि जब दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव के अपमान हेतु महायज्ञ का आयोजन किया तो महर्षि भृगु उस यज्ञ में उपस्थित थे। जब सबने देखा कि दक्ष ने महादेव को आमंत्रित नहीं किया है तो महर्षि कश्यप के साथ भृगु ने भी दक्ष को चेतावनी दी कि महादेव के बिना ये यज्ञ सफल नहीं हो सकता। किन्तु अभिमान वश दक्ष ने उनकी बात अनसुनी कर दी। इसका परिणाम ये हुआ कि अपने पति का अपमान देख कर सती ने उसी यञकुंड में आत्मदाह कर लिया।

जब महारुद्र को इस बारे में पता चला तो उन्होंने वीरभद्र को उत्पन्न किया और उसे दक्ष को समाप्त करने को भेजा। जब दक्ष को इस बारे में पता चला तो उन्होंने महर्षि भृगु से सहायता माँगी। तब भृगु ने कहा - "हे प्रजापति! अब तो त्रिलोक में आपकी रक्षा और कोई नहीं कर सकता। किन्तु यदि आपको सेना से ही संतोष होता हो तो मैं आपको १ करोड़ योद्धाओं की सेना देता हूँ।" ये कहकर भृगु ने १००००००० भीषण योद्धा अपने मंत्रबल से उत्पन्न किये और उस यज्ञ से प्रस्थान कर गए। हालाँकि उनकी ये सहायता किसी काम ना आई क्यूंकि वीरभद्र ने उन सभी योद्धाओं का नाश कर दिया।

भगवतगीता में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि महर्षि भृगु देवताओं के सौभाग्य और उन्नति का प्रतिनिधित्व करते हैं। महर्षि भृगु द्वारा रचित "भृगु संहिता" हिन्दू धर्म के सर्वाधिक प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है। इस ग्रन्थ में उन्होंने ग्रहों और नक्षत्रों की गति की गणना कर उससे किसी के भविष्य फल को जानने का उपाय लिखा है। इस ग्रन्थ को लिखने में उन्होंने श्रीगणेश की सहायता भी ली थी। उनके बाद इस ज्ञान को उनसे उनके पुत्र शुक्राचार्य ने प्राप्त किया।

कहते हैं कि इस ग्रन्थ में महर्षि भृगु ने स्वयं ५००००० समकालीन व्यक्तियों के भविष्यफल को समाहित किया था। यही नहीं, अगर महर्षि भृगु की कला से गणना की जाये तो ये लगभग ४५०००००० (चार करोड़ पचास लाख) गणनाएं बता सकता है। दुर्भाग्य से इस ग्रन्थ का अधिकतर हिस्सा नष्ट हो गया और आज जो भृगु संहिता हमें उपलब्ध है वो उस महान ग्रन्थ का एक छोटा सा हिस्सा ही है।

महर्षि भृगु के जीवन की जो सबसे महत्वपूर्ण घटना थी वो त्रिदेवों की परीक्षा लेना था। एक बार विद्वानों में इस बात को लेकर मतभेद हो गया कि त्रिदेवों में श्रेष्ठ कौन है। इसके लिए त्रिदेवों की परीक्षा लेने का कठिन कार्य महर्षि भृगु को सौंपा गया। इसके बारे में विस्तृत लेख धर्मसंसार पर पहले ही प्रकाशित हो चुका है जिसे आप पढ़ सकते हैं। इसके अतिरिक्त महर्षि भृगु को सप्तर्षियों का भाग भी बताया गया है। 
  1. ब्रह्मदेव की परीक्षा
  2. महादेव की परीक्षा
  3. विष्णुदेव की परीक्षा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें