26 जुलाई 2019

क्या श्रीकृष्ण माँ काली के अवतार हैं? - १

अगर आपसे कोई पूछे कि श्रीकृष्ण किसके अवतार थे तो १००० में से ९९९ लोग बिना संकोच के कहेंगे कि श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे। हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी इस बात की स्पष्ट व्याख्या है कि भगवान श्रीकृष्ण के रूप में श्रीहरि ने अपना ८वां अवतार लिया। कहीं-कहीं उन्हें भगवान विष्णु का नवां अवतार भी कहा जाता है क्यूंकि गौतम बुद्ध को विष्णु अवतार के रूप में मान्यता मिलने में मतभेद है। दशावतार के बारे में आप विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं। लेकिन इसका एक दूसरा पहलु भी है।

जब आप उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली वृन्दावन जायेंगे तो यहाँ का एक विशेष आकर्षण "कृष्ण-काली" मंदिर है। इस मंदिर की विशेषता ये है कि यहाँ पर श्रीकृष्ण की पूजा माँ काली के रूप में होती है। अब आप पूछेंगे कि ये कैसे संभव है? इसका उत्तर ये है कि बहुत कम, लेकिन कुछ जगह श्रीकृष्ण को माँ काली का अवतार ही माना जाता है। विशेषकर "देवी पुराण" में इस बात का वर्णन है कि स्वयं माँ काली ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। इसके पीछे एक बड़ी रोचक कथा है।

एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती भ्रमण कर रहे थे। वातावरण ऐसा था कि महादेव के मन में काम की भावना उत्पन्न हुई। उनकी इच्छा जानकर माता पार्वती उनके समक्ष उपस्थित हुई। किन्तु तब महादेव ने अपनी एक बड़ी ही विचित्र इच्छा बताई। उन्होंने कहा कि उनकी ऐसी इच्छा है कि वे नारी रूप में और माता पार्वती पुरुष के रूप में रमण करें। जब माता पार्वती ने उनकी ऐसी इच्छा सुनी तो उन्होंने कहा कि भविष्य में वे अवश्य ही उनकी ये इच्छा पूर्ण करेंगी।

उस समय पृथ्वी पर दुष्टों का आतंक बहुत बढ़ गया था। जरासंध और कंस के अत्याचारों से पृथ्वी त्राहि-त्राहि कर रही थी। पृथ्वी मनुष्यों के भार को सहन करने में असमर्थ हो रही थी। जब देवताओं ने ये सूचना महादेव को दी तब देवी पार्वती ने उचित समय जानकर पृथ्वी पर अवतार लेने के विषय में सोचा। उन्होंने अपने अंश से महाकाली को उत्पन्न किया और उन्हें पृथ्वी पर अवतरित होने को कहा। साथ ही उन्हें महादेव को दिया गया अपना वचन भी याद था इसी कारण उन्होंने भगवान शंकर से भी नारी रूप में अवतरित होने का अनुरोध किया। इस प्रकार धर्म की रक्षा भी हो जाती और महादेव की इच्छा भी पूर्ण हो जाती।

तब महाकाली ने भगवान श्रीकृष्ण के रूप में देवकी के आठवें पुत्र के रूप में कंस के कारागार में जन्म लिया और भगवान शंकर ने वृषभानु की पुत्री राधा के रूप में ब्रज में जन्म लिया। हालाँकि हमारे पौराणिक ग्रंथों में इस बात का वर्णन है कि राधा श्रीकृष्ण से आयु में बहुत बड़ी थी। इसके साथ ही महादेव के अंश से श्रीकृष्ण की आठ मुख्य रानियों (कहीं-कहीं १०८ रानियों का भी वर्णन है) - रुक्मिणी, सत्यभामा, जांबवंती, सत्या, कालिंदी, लक्ष्मणा, मित्रवृन्दा एवं भद्रा ने जन्म लिया। यही नहीं, देवी पुराण के अनुसार देवी पार्वती को श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित होते देख कर उनकी मुख्य सखियों जया और विजया ने श्रीदामा और वसुदामा नामक गोपों के रूप में जन्म लिया जो श्रीकृष्ण के घनिष्ट मित्र थे।

देवी पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने बलराम और अर्जुन के रूप में अवतार लिया। अधिकांश स्थान पर बलराम को भगवान विष्णु का आठवां अवतार बताया जाता है। अर्जुन अपने भाइयों के साथ वनवास के समय महान कामाख्या शक्तिपीठ पहुँचे जहाँ पर माँ काली ने उन्हें आशीर्वाद दिया और श्रीकृष्ण के रूप में उनकी सहायता करने का वचन दिया। महाभारत युद्ध से पूर्व पांडवों ने सर्वप्रथम माँ भगवती की ही पूजा की जिससे उन्हें विजयश्री प्राप्त हुई। देवी पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण ने कंस का वध भी माँ काली के रूप में ही किया।

देवी पुराण के अनुसार जब श्रीकृष्ण के निर्वाण का समय हुआ तो वे समुद्र तट पर पहुँचे। उन्हें वहाँ आया देख कर वहाँ एक रत्नजड़ित रथ आया जिसे स्वयं शिलादपुत्र नंदी खींच रहे थे। उस रथ पर जब श्रीकृष्ण विराजित हुए तो देवताओं ने आकाश से पुष्पवर्षा की। फिर उस रथ को नंदी खींच कर वापस उन्हें अपने धाम कैलाश ले गया। श्रीकृष्ण और माँ काली में कई समानताएं भी हैं। साथ ही एक ऐसा वर्णन आता है कि एक बार माँ काली ने शंकर के अंश से जन्मी राधा के मान की रक्षा भी की थी। इसके बारे में इस लेख के दूसरे भाग में बताया जायेगा। जय श्रीकृष्ण। जय माँ काली।।

...शेष

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