25 अप्रैल 2019

सप्तर्षि शृंखला ३ - विभिन्न धर्मग्रंथों में वर्णिंत सप्तर्षि

पिछले लेख में आपने प्रत्येक मन्वन्तर में सप्तर्षियों का पद ग्रहण करने वाले महर्षियों के बारे में पढ़ा था। इसके अतिरिक्त विभिन्न धर्म ग्रंथों में भी सप्तर्षियों का अलग-अलग वर्णन है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि जैन धर्म में भी सप्तर्षियों की अवधारणा है। वहाँ इन्हे 'सप्त दिगंबर' कहा जाता है। तो आइये इनके बारे में जानते हैं।
  • जैमिनीय ब्राह्मण के अनुसार 
    1. अगस्त्य 
    2. अत्रि 
    3. भारद्वाज 
    4. गौतम 
    5. जमदग्नि 
    6. वशिष्ठ 
    7. विश्वामित्र
  • बृहदरण्यक उपनिषद के अनुसार
    1. गौतम 
    2. भारद्वाज 
    3. विश्वामित्र 
    4. जमदग्नि 
    5. वशिष्ठ 
    6. कश्यप 
    7. भृगु
  • गोपथ ब्राह्मण के अनुसार
    1. वशिष्ठ 
    2. विश्वामित्र 
    3. जमदग्नि 
    4. गौतम 
    5. भारद्वाज 
    6. अगस्त्य 
    7. भृगु
  • शतपथ ब्राह्मण के अनुसार
    1. अत्रि 
    2. भारद्वाज 
    3. गौतम 
    4. जमदग्नि 
    5. कश्यप 
    6. वशिष्ठ 
    7. विश्वामित्र 
  • कृष्ण यजुर्वेद के अनुसार
    1. अंगिरस 
    2. अत्रि 
    3. भृगु 
    4. गौतम 
    5. कश्यप 
    6. कुत्स 
    7. वशिष्ठ 
  • महाभारत के अनुसार
    1. मरीचि 
    2. अत्रि 
    3. पुलह 
    4. पुलत्स्य 
    5. क्रतु 
    6. वशिष्ठ 
    7. कश्यप 
  • वृहत संहिता के अनुसार
    1. मरीचि 
    2. वशिष्ठ 
    3. अंगिरस 
    4. अत्रि 
    5. पुलत्स्य 
    6. पुलह 
    7. क्रतु
  • जैन धर्म के अनुसार (जैन धर्म में इन्हे सप्त दिगंबर कहते हैं)
    1. सुरमन्यु 
    2. श्रीमन्यु 
    3. श्रीनिचय 
    4. सर्वसुन्दर 
    5. जयवाण 
    6. विनायलाला 
    7. जयमित्र
...शेष

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