26 मार्च 2019

पौराणिक घटनाओं का कालखंड

पौराणिक काल गणना के विषय में हम सब जानते हैं। इसमें १२००० दिव्य वर्षोंका एक चतुर्युग होता है जिसमे ४८०० दिव्य वर्ष का कृतयुग (सतयुग), ३६०० दिव्य वर्षका त्रेतायुग, २४०० दिव्य वर्षका द्वापरयुग और १२०० दिव्य वर्ष का कलियुग होता है। इसी गणना से ब्रह्माजी की आयु १०० वर्ष की होती है अर्थात् २ परार्ध (३११०४०००००००००० सौर वर्ष)। काल गणना और युगों की समय सीमा के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए निम्न लेखों को पढ़ें:
  1. कालचक्र और युगों का वर्णन
  2. हिन्दू काल गणना
  3. दशावतार
इस लेख में हम आपको मुख्य-मुख्य पौराणिक घटनाओं का कालखंड बताएँगे। 
  • वर्तमान पद्मगर्भ नामक ब्रह्माजी की उत्पत्ति ब्राह्म कल्प में हुई थी और पिछले कल्प जो कि पदम् नामका कल्प था में ब्रह्माजी ने स्वयं की ५० वर्ष पूर्ण की है। वर्तमान श्री श्वेतवाराहकल्पमें ब्रह्मा की आयु १५५५२१९८६७७३११७ सौर वर्ष हो चुकी है। 
  • श्री श्वेतवाराहकल्प १९८६७७३११६ सौर वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ था।
  • भगवान् श्रीहरि ने वाराह रूप धारणकर १९६०८५३११७ वर्ष पूर्व पृथ्वीको रसातलसे निकालकर अंतरिक्ष में स्थापित किया था । इसी वर्ष महाराज स्वयंभू मनु जो वैराज मनु के नाम से प्रसिद्ध हैं ने ब्रह्मवर्त में राज्य प्रारम्भ किया। उनकी राजधानी वरहिष्मति नगरी थी जो आजकी बिठूर है और वाराह कल्प का प्रथम मन्वन्तर प्रारम्भ किया।
  • उनके बाद स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत, चाक्षसु आदि ६ मन्वन्तर व्यतीत हो चुके हैं। 
  • तामस मन्वन्तर के आदि कृतयुग में १०३८९६५११७ वर्ष पूर्व भगवान् श्रीहरि ने नृसिंह रूप धारण करके हिरण्यकश्यपका वध किया था।
  • चाक्षसु मन्वन्तर के आदि कृतयुग में ४२७२५३११७ वर्ष पूर्व भगवान् श्रीहरि ने धर्म पुत्र नर-नारायण का अवतार लिया था।
  • चाक्षसु मन्वन्तर के आदिकृत युग में ही देवों और दैत्यों ने मिलकर ४२५५७९११७ वर्ष पूर्व समुद्र मन्थन किया और इसी वर्ष भगवान् ने कूर्मावतार लिया था।
  • चाक्षसु मन्वन्तर के अंतिम कलियुग में १२०५३३११७ वर्ष पूर्व जल प्लवन हुआ था और भगवान् श्रीहरि ने मत्स्यरूप धारण कर भावी मनु सूर्य पुत्र श्राद्धदेव की रक्षा की थी। इसी वर्ष सातवां मन्वन्तर वैवस्वत प्रारंभ हुआ था। मनु ने सरयू नदी के किनारे अयोध्या नगरी को बसाया था।
  • वैवस्वत मन्वन्तरके आदि त्रेतायुग में ११८८०५११७ वर्ष पूर्व भगवान् श्रीहरि ने अत्रि-अनुसूया के पुत्र रूप में भगवान् दत्तात्रेय का अवतार लिया था। इसी वर्ष मनु के ज्येष्ठ पुत्र महाराज इक्ष्वाकु का राज्य प्रारम्भ हुआ था।
  • वैवस्वत मनु के चतुर्थ सत्ययुग में १०७५७३११७ वर्ष पूर्व भगवान् श्रीहरि ने अदिति-कश्यप के पुत्र रूप में भगवान् वामन का अवतार लिया था।
  • वैवस्वत मनु के पन्द्रहवे त्रेतायुग में ५८३२५११७ वर्ष पूर्व अयोध्या में युवनाश्व पुत्र मांधाता चक्रवर्ती सम्राट हुए।
  • वैवस्वत मनु के सोलहवे सत्ययुग में ५४०३२११७ वर्ष पूर्व प्रतिष्ठान नगर के दुष्यन्त पुत्र भरत चक्रवर्ती सम्राट हुए थे।
  • वैवस्वत मनु के इक्कीसवे त्रेतायुग में ३२४०५११७ वर्ष पूर्व रेणुका जगदग्नि के पुत्र रूप में श्रीहरि ने परशुराम अवतार लिया।
  • वैवस्वत मनु के चौबीसवे त्रेतायुग में १८१६०१५९ वर्ष पूर्व में भगवान् श्रीहरि ने अयोध्या नरेश श्रीदशरथ-कौसल्या के पुत्र रूप में भगवान् मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का अवतार लिया।
  • १८१६०११८ वर्ष पूर्व श्रीरामने रावण का वध किया और श्रीरामराज्य प्रारम्भ हुआ था।
  • वैवस्वत मनु के अट्ठाइसवे द्वापरयुग में भगवान् श्रीहरि मथुरा में देवकी-वसुदेवजी के पुत्र श्रीकृष्णरूप में प्रकट हुए।
  • ५१५४ वर्ष पूर्व (३१३८ ई.पू.) महाभारतका महायुद्ध हुआ था। इसी वर्ष महाराज परीक्षित का जन्म हुआ था।
  • १८ फ़रवरी ३१०२ ई.पू. (५११८ वर्ष पूर्व) भगवान् श्रीकृष्ण इस धरा-धाम को छोड़कर गोलोक धाम चले गए। इसी दिन कलियुग प्रारम्भ हुआ था।
  • ३०७६ ई.पू. में युधिष्ठिर ने स्वर्गारोहण किया। इसी दिन सप्तर्षि शक् प्रारम्भ हुआ।
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ये लेख हमें डॉक्टर विदुषी शर्मा से प्राप्त हुआ है। ये दिल्ली की निवासी हैं और वर्तमान में इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय में ऐकडेमिक कॉउंसलर के पद पर नियुक्त हैं। साथ ही ये इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन, दिल्ली की महासचिव भी हैं। इनके कई लेख और रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमे २२ शोध, ५ पुस्तक अध्याय एवं १ ईबुक भी है। इन्होने करीब १७ अंतर्राष्ट्रीय एवं १८ राष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लिया है और १५ से अधिक पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। इसके अतिरिक्त ये कई पत्रिकाओं और संस्थाओं की सदस्य भी हैं और राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू, डॉक्टर किरण बेदी, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहरलाल खट्टर एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों के समक्ष अपने शोध प्रस्तुत कर चुकी हैं। धर्मसंसार में इनके सहयोग के लिए हम इनके आभारी हैं।

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