30 नवंबर 2018

धर्मः मम - १

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः !
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय !! - श्रीमद्भगवद्गीता !! १ !! १ !!

हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित युद्ध की इच्छा वाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः !
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्धुव्रा नीतिर्मतिर्मम !! - श्रीमद्भगवद्गीता !! १८ !! ७८ !!

28 नवंबर 2018

बिल्वपत्र (बेलपत्र)

एक बार देवर्षि नारद कैलाश पहुँचे, वहाँ उन्हें भगवान शंकर और माता पार्वती के दर्शन हुए। दोनों को प्रणाम करने के पश्चात देवर्षि ने महादेव से पूछा कि "हे प्रभु! पृथ्वी पर मनुष्य अत्यंत दुखी है और उनके दुखों का निवारण आपके द्वारा ही संभव है। अतः आप मुझे वो विधि बताइये जिससे मनुष्य आपको शीघ्र और सरलता से प्रसन्न कर सके। इसे जानकार मानव जाति का कल्याण होगा।" नारद का प्रश्न सुनकर महादेव बोले - "देवर्षि! मुझे प्रसन्न करने के लिए किसी पूजा विधि की आवश्यकता नहीं है। मैं तो अपने भक्त भक्तिभाव से ही प्रसन्न हो जाता हूँ। किन्तु आपने पूछा है तो मैं बताता हूँ। मुझे बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय है अतः जो मनुष्य भक्तिभाव से मुझे केवल जल और बिल्वपत्र अर्पण करता है, मैं उससे ही प्रसन्न हो जाता हूँ।" नारद उनकी बात सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और उनकी आज्ञा लेकर पृथ्वी की ओर चले। उनके जाने के पश्चात देवी पार्वती ने पूछा कि क्या कारण है कि उन्हें बिल्वपत्र इतना प्रिय है। तब भगवान शिव ने कहा "हे देवी! बिल्वपत्र स्वयं देवी लक्ष्मी का ही रूप है और उन्होंने इसी से मेरी पूजा की थी इसी कारण ये मुझे अत्यंत प्रिय है।" ये सुनकर देवी पार्वती ने वो कथा सुनाने का आग्रह किया कि क्यों देवी लक्ष्मी ने उनकी पूजा की थी।

25 नवंबर 2018

नागवंश और नागपूजा - आधुनिक दृष्टिकोण

नागवंश और नागपूजा का इतिहास भारत में बहुत ही पुराना है। नागों को महर्षि कश्यप और दक्षपुत्री क्रुदु की संतान माना गया है जिनके १००० पुत्र हुए जिनसे १००० नागवंशों की स्थापना हुई। इसके अतिरिक्त विज्ञान भी सर्पों की दुर्लभ प्रजातिओं को ढूँढने में जुटा है। एक जानकारी के मुताबिक उड़ने वाले सांपो की प्रजाति का पता चला है। दक्षिण अमेरिका में इस प्रकार की प्रजाति के सांप केफन अवशेष शोधकर्ताओं को प्राप्त हुए। टेरासोर की नई प्रजाति को "ऑलकारेन" नाम दिया गया। शोधकर्ताओं का प्रमुख उद्देश्य उड़ने वाले साँपों के खास समूह की उत्पति व् विकास के बारे में नई जानकारी के साथ उनके मस्तिक संरचना को समझना आदि रहा है।

23 नवंबर 2018

रक्त्जा और स्वेदजा - अर्जुन और कर्ण के कई जन्मों की प्रतिस्पर्धा

पिछले लेख में हमने महारथी कर्ण के पिछले जन्म "दंबोधव" के बारे में पढ़ा। इससे हमें ये जानने को मिलता है कि इन दोनों के बीच की प्रतिस्पर्धा कितनी पुरानी है। जिन्हे दंबोधव के बारे में पता नहीं था उसके लिए ये कथा सुनना वास्तव में आश्चर्यजनक है। किन्तु उससे भी अधिक आश्चर्यजनक कथा हमें पद्मपुराण में मिलती है जिसमे इन दोनों की प्रतिदंद्विता का विवरण है जो सीधे त्रिदेवों से सम्बंधित है। कथा उस समय की है जब परमपिता ब्रह्मा पंचमुखी थे। उनके चार मुख चारों वेदों का पाठ करते थे किन्तु उर्ध्वमुखी पाँचवा मुख सदैव महादेव की निंदा करता था। इससे रुष्ट होकर महादेव ने ब्रह्मदेव से युद्ध किया और उनका वो पाँचवा मुख काट दिया।

21 नवंबर 2018

दंबोधव - जिसके पाप का दण्ड महारथी कर्ण ने भोगा

महाभारत ऐसी छोटी-छोटी कथाओं का समूह भी है जो हमें आश्चर्यचकित कर देती है। जी सुंदरता के साथ वेदव्यास ने सहस्त्रों छोटी-छोटी घटनाओं को एक साथ पिरोया है वो निश्चय ही अद्वितीय है। ऐसी ही एक कथा दंबोधव दानव की है जो सीधे तौर पर कर्ण से जुडी है और अर्जुन एवं श्रीकृष्ण भी उसका हिस्सा हैं। ये कथा वास्तव में कर्ण के पूर्वजन्म की कथा है जिसके कारण उसे अगले जन्म में भी इतना दुःख भोगना पड़ा।

19 नवंबर 2018

श्राद्ध पक्ष

श्राद्ध शब्द का अर्थ: श्रद्धा पूर्वक पितरों के लिए विधिपूर्वक जो कर्म किया जाता है उस कर्म को श्राद्ध कहते हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार देश काल में पात्र में विधि पूर्वक श्रद्धा से पितरों के उद्देश्य से जो कार्य किया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। देश का अर्थ स्थान है काल का अर्थ समय है पात्र का अर्थ वह ब्राह्मण है जिसे हम श्राद्ध की सामग्री दे रहे हैं इन तीनों को भली-भांति समझ लेना चाहिए।

17 नवंबर 2018

जब दुर्योधन ने कृष्ण को वो तीन गलतियाँ बताई जिसके कारण उसकी पराजय हुई

महाभारत सागर की तरह विशाल है। इसके अंदर कथाओं के ऐसे-ऐसे मोती छिपे हैं जिसे ढूँढना कठिन है। कुछ प्रसंग व्यास रचित महाभारत में है तो कुछ शताब्दियों से लोक कथाओं के रूप में सुनी और सुनाई जाती रही है। ऐसा ही एक प्रसंग हम आज आपके लिए ले कर आए हैं। ये घटना तब की है जब भीम ने दुर्योधन की जंघा तोड़ी और वो अपनी अंतिम साँसें ले रहा था। इतनी भीषण शत्रुता होने के बाद भी दुर्योधन की ऐसी मृत्यु देख कर सभी द्रवित हो गए और उसके आस-पास जमा हो गए। दुर्योधन ने अपनी चारो ओर शत्रुओं को देखा किन्तु अब बहुत देर हो चुकी थी। तभी उसने श्रीकृष्ण को अपनी तीन अँगुलियों से इशारा किया। कोई भी उसके इस संकेत को समझ नहीं पाया। तब श्रीकृष्ण ने पांडवों से कहा कि शायद दुर्योधन अपने अंतिम समय में उनसे कुछ कहना चाहता है।

15 नवंबर 2018

गौ माता का वैज्ञानिक महत्व

गौ की महिमा तो अपरम्पार है किन्तु फिर भी कुछ अनजान वैज्ञानिक तथ्य है जो जानने योग्य हैं। कहते है की गौमाता के खुर से उडी हुई धूलि को सिर पर धारण करता है वह मानों तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पा जाता है। पशुओं में बकरी, भेड़, ऊँटनी, भैंस इत्यादि का दूध भी काफी महत्व रखता है।

13 नवंबर 2018

छठ महापर्व

आप सबों को छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ। पूर्वी भारत, विशेषकर बिहार, झारखण्ड एवं उत्तर प्रदेश में तो इस पर्व का महत्त्व सर्वाधिक है ही, अब भारत के हर क्षेत्र में इस पर्व को मनाया जाता है। भारत के बाहर, विशेषकर नेपाल, इंडोनेशिया, मॉरीशस, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिनाद, अमेरिका, इंग्लैण्ड, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, नूज़ीलैण्ड, मलेशिया एवं जापान में भी इसे  वृहद् रूप से मनाया जाता है। ये पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है इसी कारण इसे "छठ" के नाम से जाना जाता है।

11 नवंबर 2018

चामुंडेश्वरी मंदिर - मैसूर

जब आप कर्नाटक के राजसी नगर मैसूर पहुँचते हैं तो मैसूर पैलेस के साथ-साथ जो स्थान आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है वो है १००० मीटर ऊपर चामुंडा पहाड़ी पर स्थित माँ चामुंडेश्वरी का मंदिर। मैसूर शहर से १३ किलोमीटर दूर ये मंदिर समुद्र तल से करीब १०६५ मीटर की उचाई पर है और इतनी उचाई पर मंदिर का निर्माण कर देना ही अपने आप में एक आश्चर्य है। ये मंदिर वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण तो है ही, साथ ही साथ इसका पौराणिक महत्त्व भी बहुत अधिक है। मूल रूप से ये मंदिर माँ दुर्गा के एक रूप माँ चामुंडा को समर्पित है और उन्ही पर इसका नामकरण भी है। इसके अतिरिक्त ये ५१ शक्तिपीठों और १८ महाशक्तिपीठों में से भी एक है। यहाँ माँ सती के केश गिरे थे और अन्य शक्तिपीठों की तरह भैरव इसकी सदैव रक्षा करते हैं। आज का वर्तमान मंदिर के मूल भाग का निर्माण १२वीं सदी में होयसल राजवंश के शासकों (कदाचित महाराज विष्णुवर्धन) के द्वारा करवाया गया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण १६वीं शताब्दी में विजयनगर शासकों द्वारा करवाया गया और १९वीं सदी में मैसूर के राजा द्वारा इसकी मरम्मत कराई गयी। ७ मंजिले इस मंदिर की कुल उचाई करीब ४० मीटर है जो द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। 

9 नवंबर 2018

क्यों कायस्थ २४ घंटे के लिए नही करते कलम का उपयोग

आप सभी को चित्रगुप्त पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं। चित्रगुप्त जयन्ती कायस्थ समाज के लिए तो सर्वश्रेष्ठ त्यौहार है ही लेकिन इसके अतिरिक्त अन्य समुदाय के लोग इस बड़ी श्रद्धा से मनाते है। बचपन में हमारे लिए इस दिन का सबसे बड़ा आकर्षण ये होता था कि इस दिन हमें पढाई-लिखाई से छुट्टी मिल जाती थी। ऐसी मान्यता है कि कोई भी कायस्थ चित्रगुप्त पूजा के दिन २४ घंटों के लिए कलम-दवात को हाथ नहीं लगा सकता। उस काल को "परेवा काल" कहते हैं। पूरी दुनिया में कायस्थ दीवाली की पूजा के बाद कलम रख देते हैं और फिर यमद्वितीया के बाद कलम-दवात की पूजा के बाद ही उसे उठाते हैं।

7 नवंबर 2018

कैसे करें दीपावली पूजन

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ। दीपावली पर श्री गणेश एवं माता लक्ष्मी की पूजा करने से मनुष्य को समस्त मनोवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है। पूरे वर्ष घर में लक्ष्मी का वास रहता है और घर मे लक्ष्मी आने से समस्त समस्याओं का निवारण भी हो जाता है। दीपावली की रात्रि में भगवती लक्ष्मी का स्मरण करते हुए अपने गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र का निरंतर जप करने से वह मंत्र सिद्ध हो जाता है। जो दीपावली की रात्रि में जागरण करते हुए लक्ष्मी जी का ध्यान करते हुए जाग कर रात्रि व्यतीत करता है उसके घर में पूरे वर्ष लक्ष्मी का वास रहता है। विशेष रुप से घर की स्त्रियों का सम्मान करने वाले व्यक्ति के घर से लक्ष्मी कभी रुठ कर नहीं जाती इसलिए गृहलक्ष्मी का सम्मान भी अवश्य करना चाहिए। दीपावली की रात्रि में मांस मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

5 नवंबर 2018

धनतेरस

आप सबको धनतेरस की हार्दिक शुभकामनायें। आज का दिन देवताओं के वैद्य माने जाने वाले श्री धन्वन्तरि को समर्पित है। इसी दिन ये समुद्र मंथन से अपने हाथोँ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। कलश के साथ प्रकट होने के कारण ही आज के दिन धातु (सोना, चाँदी) एवं बर्तनों को खरीदने की परंपरा आरम्भ हुई। देव धन्वन्तरि को भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है जो उनके समुद्र मंथन में कच्छप रूप में मंदार पर्वत को अपने ऊपर सँभालने के श्रम के कारण हुआ था। नारायण की भांति ही धन्वन्तरि भी चतुर्भुज हैं और ऊपर के दो हाथों में श्रीहरि की भांति ही शंख और चक्र धारण करते हैं। अन्य दो हाथों में औषधि और अमृत कलश होता है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन जो कुछ भी हम खरीदते हैं वो १३ गुणा बढ़ जाता है। इसी कारण आज के दिन देश भर में लोग कुछ न कुछ खरीदते हैं। २०१६ में भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मानाने का निर्णय लिया। इसके विषय में कई कथा प्रचलित है:

4 नवंबर 2018

अशोक सुंदरी

भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्रों श्री कार्तिकेय एवं श्रीगणेश के विषय में तो हम सभी जानते हैं किन्तु उनकी कन्या "अशोकसुन्दरी" के विषय में सबको अधिक जानकारी नहीं है। हालांकि महादेव की और भी पुत्रियां मानी गयी हैं, विशेषकर जिन्हें नागकन्या माना गया - जया, विषहरी, शामिलबारी, देव और दोतलि। किन्तु अशोक सुंदरी को ही महादेव की की पुत्री बताया गया है इसीलिए वही गणेशजी एवं कार्तिकेय की बहन मानी जाती है। कई जगह पर इन्हे गणेश की छोटी बहन भी बताया गया है लेकिन अधिकतर स्थानों पर ये मान्यता है कि ये गणेश की बड़ी बहन थी। पद्मपुराण अनुसार अशोक सुंदरी देवकन्या हैं। 

2 नवंबर 2018

जब लक्ष्मण की रक्षा हेतु सीता ने उन्हें निगल लिया

रामायण समुद्र की तरह अथाह है। रामायण और रामचरितमानस के अतिरिक्त भी रामायण के कई क्षेत्रीय प्रारूप हैं जो जनमानस में बहुत प्रसिद्ध हैं। आज जो कथा हम आपको बताने जा रहे हैं वो भी कुछ ऐसी ही है। इसका विवरण हमें रामायण अथवा रामचरितमानस में तो नहीं मिलता किन्तु ये कुछ भारतीय लोककथाओं में चाव से सुनी और सुनाई जाती है।