31 अक्तूबर 2018

अहोई अष्टमी

आप सभी को अहोई अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं। ये भारत का एक प्रमुख त्यौहार है जिसे विशेषकर उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस व्रत को पुत्रवती महिलायें अपने पुत्रों की लम्बी आयु के लिए रखती है। वे दिन भर निर्जल उपवास रखती हैं और शाम को तारे के दर्शन के बाद पूजा के साथ अपना उपवास तोड़ती है। होई एक चित्र होता है जिसे दीवार पर बनाया जाता है अथवा किसी कपडे पर काढ़ कर दीवार पर टाँग दिया जाता है। इसमें आठ खानों की एक पुतली बनाई जाती है जिसके इर्द-गिर्द साही और उसके सात बच्चों की आकृति होती है। इस व्रत को करवाचौथ के चार दिन बाद कार्तिक की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और इसी कारण इसे अहोई अष्टमी कहते हैं। अहोई माता की पूजा स्त्रियाँ अपने-अपने सामर्थ्य से करती है। कई संपन्न घरों में अहोई का चित्र चाँदी से भी बनाया जाता है।

30 अक्तूबर 2018

वाल्मीकि रामायण - एक दृष्टिकोण

तुलसी रामायण की जगह वाल्मिकी रामायण क्यों? वाल्मिकी रामायण में राम पर तंज हैं, प्रश्न है। सीता का वनगमन है। लव-कुश के तीखे प्रश्न बाण हैं। तुलसी रामायण जहां उत्तरकांड पर खत्म हो जाती है, वाल्मिकी रामायण में रावण और हनुमान की जन्म कथा, राजा नृग, राजा निमि, राजा ययाति और रामराज्य में कुत्ते के न्याय की उपकथाएं, सीतावनगमन, लवकुश जन्म, अश्वमेघ यज्ञ, लव-कुश का रामायण गान, सीता का भूमि प्रवेश, लक्ष्मण का परित्याग सबकुछ समाहित है। यदि राम को जानना है तो तुलसी बाबा नहीं महाकवि वाल्मिकी को समझना होगा। महाकवि वाल्मिकी ने मर्यादापुरुषोत्तम राम की व्याख्या की है तो सीता के चरित्र के साथ भी पूरा न्याय किया है। लव-कुश के जरिए सीता पर लांछन लगाने वालों का प्रतिकार किया है। वाल्मिकी रामायण पूर्ण है, संपूर्ण है। यह युगपुरुष कृष्ण से पहले का चरित्र है। राम मर्यादा पुरुष थे, कृष्ण युगपुरुष। इसलिए तुलसी बाबा से रामायण को पढ़ना शुरू करें लेकिन समझने के लिए महाकवि वाल्मिकी को अवश्य पढ़े। रामायण से मिली सीख:

28 अक्तूबर 2018

श्रीकृष्ण का पूर्वजन्म

जब कंस ने ये सुना कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसका वध करेगी तब उसने उसे मारने का निश्चय किया। बाद में इस शर्त पर कि देवकी और वसुदेव अपनी सभी संतानों को जन्म लेते ही उसके हवाले कर देगी, उसने दोनों के प्राण नहीं लिए किन्तु दोनों को कारागार में डाल दिया। एक-एक कर कंस ने दोनों के सात संतानों का वध कर दिया। अब आठवीं संतान के रूप में श्रीहरि विष्णु देवकी के गर्भ से जन्म लेने वाले थे। अपने अन्य पुत्रों के वध से दुखी देवकी और वसुदेव अत्यंत दीन अवस्था में भगवान विष्णु के तप में बैठे। उनके मन में केवल यही प्रश्न था कि आखिर किस पाप का दण्ड उन्हें मिल रहा है? साथ ही ये भी कि क्या उनका आठवाँ पुत्र भी उस दुष्ट कंस के हाथों मारा जाएगा?

26 अक्तूबर 2018

करक चतुर्थी (करवा चौथ) व्रत विधि

कल (शनिवार, २७ अक्टूबर) को करक चतुर्थी का पर्व है जिसे आम भाषा में करवा चौथ कहा जाता है। सनातन धर्म में पति को परमेश्वर की संज्ञा दी गई है। करवा चौथ का व्रत अखंड सुहाग को देने वाला माना जाता है। करवा चौथ का व्रत पति पत्नी के पवित्र प्रेम के रूप में मनाया जाता है जो एक दूसरे के प्रति अपार प्रेम, त्याग एवं उत्सर्ग की चेतना लेकर आता है। इस दिन स्त्रियां सुहागन का रूप धारण कर, पूर्ण श्रृंगार करके, वस्त्र आभूषण धारण करके भगवान चंद्रमा से अपने अखंड सुहाग की प्रार्थना करती है। स्त्रियां ईश्वर के समक्ष दिनभर व्रत रखकर यह प्रण भी करती हैं कि वे मन, वचन और कर्म से पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेंगी।

23 अक्तूबर 2018

कर्म तथा ज्ञान का अंतर एवं परमात्मा दर्शन

हमारे शास्त्रों में दो भागों का वर्णन बतलाया गया है -एक का नाम प्रवृत्ति धर्म और दूसरे को निवृत्ति धर्म कहा गया है। प्रवृत्ति मार्ग को कर्म और निवृत्ति मार्ग को ज्ञान भी कहते है। कर्म (अविधा से मनुष्य बंधन में पड़ता है और ज्ञान से वह बंधनमुक्त हो जाता है। कर्म से मरने के बाद जन्म लेना पड़ता है और सोलह तत्वों से बने हुए शरीर की प्राप्ति होती है किन्तु ज्ञान से नित्य, अव्यक्त एवं अविनाशी परमात्मा प्राप्त होते है। कुछ अल्पज्ञानी मानव कर्म की प्रशंसा करते है, अत: वे भोगासक्त होकर बार -बार देह के बंधन में पड़ते रहते है परन्तु जो मनुष्य धर्म के तत्व को भलीभांति समझते है तथा जिन्हें उत्तम बुध्दि प्राप्त है, वे कर्म की उसी तरह प्रशंसा नहीं करते जैसे नदी का पानी पीने वाला मनुष्य कुएँ का आदर नहीं करता। कर्म के फलस्वरूप प्राप्त होते हैं सुख और दुःख, जन्म और मृत्यु किंतु ज्ञान से उस पद की प्राप्ति होती है जहाँ जाकर मनुष्य सदा के लिए शोक से मुक्त हो जाता है।

21 अक्तूबर 2018

माँ दुर्गा की कथा २: शुम्भ-निशुंभ, धूम्रलोचन एवं चण्ड-मुण्ड वध

पिछले लेख में आपने माँ दुर्गा की उत्पत्ति और महिषासुर के वध की कथा पढ़ी। महिषासुर की मृत्यु के पश्चात दो महापराक्रमी दैत्यों शुम्भ-निशुंभ, जो महर्षि कश्यप और दक्षपुत्री दनु के पुत्र और नमुचि दानव के भाई थे, उन्होंने देवों पर अत्याचार आरम्भ कर दिया। इंद्र ने उनके भाई नमुचि का वध कर दिया जिसके बाद उन्होंने इंद्र को सिंहासनच्युत कर स्वर्ग पर अधिकार जमा लिया। इससे त्रस्त होकर सभी देवता माँ दुर्गा के पास सहायता के लिए पहुँचे। तब उनपर हुए अत्याचार को देख कर देवी उन दोनों के वध को उद्धत हुई। उन्होंने शुम्भ-निशुंभ को युद्ध के लिए ललकारा। जब दोनों भाइयों ने एक स्त्री की ललकार सुनी तो उसका परिहास करते हुए उन्होंने अपने १०००० योद्धाओं को उन्हें बंदी बना कर लाने के लिए भेजा। जब वे सभी देवी के पास पहुँचे तो उनके वाहन सिंह ने अपने तेज दांत और नाखूनों से पूरी सेना का संहार कर दिया। जब शुम्भ-निशुंभ ने ये समाचार सुना तो बड़ा हैरान हुआ। उसने अपने सेनापतिओं चण्ड-मुण्ड को देवी दुर्गा के वध की आज्ञा दे कर भेजा।

19 अक्तूबर 2018

माँ दुर्गा की कथा १: देवी की उत्पत्ति एवं महिषासुर वध

आज नवरात्रि का पर्व समाप्त हो रहा है। आज विजयादशमी के दिन ही देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। आज के दिन ही श्रीराम ने भी रावण का वध किया था। वैसे तो देवी दुर्गा को आदिशक्ति माँ पार्वती का ही एक रूप माना जाता है किन्तु उनका ये रूप इसीलिए विशेष है क्यूँकि देवी दुर्गा की उत्पत्ति मूलतः त्रिदेवों से हुई। इन्हे विजय की देवी माना जाता है जिनकी कृपा से देवताओं ने अत्याचारी असुर से मुक्ति पायी और अपना राज्य पुनः प्राप्त किया।

17 अक्तूबर 2018

जब देवी सती ने भगवान शिव को विवश किया - दस महाविद्याओं की उत्पत्ति

नवरात्रि का त्यौहार चल रहा है जो देवी पार्वती के नौ रूपों को समर्पित है। इनके अतिरिक्त माँ पार्वती का जो मुख्य रूप है वो देवी काली का है जिन्हे महाकाली भी कहते हैं। यद्यपि देवी काली माँ पार्वती का ही एक रूप मानी जाती है किन्तु बहुत कम लोगों को पता है कि देवी काली की उत्पत्ति वास्तव में भगवान शिव की प्रथम पत्नी माँ सती द्वारा हुई थी। इसके विषय में एक बहुत ही रोचक कथा हमें पुराणों में मिलती है। प्रजापति दक्ष परमपिता ब्रम्हा के प्रथम मानस पुत्रों में से एक थे जिनकी पुत्रिओं से ही इस संसार का विस्तार हुआ।

15 अक्तूबर 2018

नवरात्रि पूजा विधि

पूरे वर्ष में चार बार नवरात्रि का आगमन होता है। बुधवार से आरंभ होने वाले नवरात्र को शारदीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है । "नवरात्र" जगदंबा की नवरात्रि ९ रात्रियों से संबंधित है। ९ दिन तक माँ भगवती की के अलग रूप की पूजा होती है। भगवती के नाम एवं रूप अलग अलग हैं लेकिन इनका संबंध वास्तव में भगवती माता पार्वती से है। माता पार्वती ही अलग अलग समय में अपने भक्तों के कल्याण के लिए अलग-अलग रूप धारण कर संसार में प्रकट होकर लीला करती है श्री गणेश जी की माता पार्वती की पूजा करने से मनुष्य को समस्त मनोवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है किसी भी प्रकार की समस्या हो इन नवरात्रों में मां जगदंबा की आराधना करने से समस्त समस्याओं का निवारण हो जाता है। भगवती के नौ रूप इस प्रकार हैं:

12 अक्तूबर 2018

यमराज

महर्षि कश्यप एवं अदिति पुत्र सूर्यनारायण का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ। उनसे उन्हें वैवस्वत मनु, यम, अश्वनीकुमार, रेवंत नमक पुत्र एवं  यमी (यमुना) नामक पुत्री की प्राप्ति हुई। यमुना ने ही सर्वप्रथम यम को धागा बांध कर रक्षाबंधन का आरम्भ किया था। सूर्यदेव के तेज से भयभीत हो संज्ञा ने अपनी एक प्रतिलिपि छाया के रूप में वहाँ छोड़ अपने पिता विश्वकर्मा के पास आ गयी। छाया से भी सूर्यदेव को सावर्णि मनु एवं शनि नामक पुत्र एवं भद्रा (विष्टि) और ताप्ती नामक पुत्री की प्राप्ति हुई। जब सूर्यदेव को संज्ञा के छल के बारे में पता चला तो उन्होंने उसे श्राप दिया कि उसका पुत्र मृत्यु के सामान भयंकर होगा। उन्ही से यमराज की उत्पत्ति हुई।

10 अक्तूबर 2018

नवरात्रि

आज से भारत में नवरात्रि का आरम्भ हो गया है जो आने वाले दस दिनों तक चलेगा और विजयादशमी (दहशरा) पर समाप्त होगा। ये भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और इसमें देवी पार्वती (दुर्गा) के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इन सभी का पूजन बारी-बारी से किया जाता है और सभी का वाहन सिंह कहा जाता है। नवरात्रि के पहले तीन दिन माँ दुर्गा की पूजा के रूप में मनाया जाता है जहाँ उनके विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन बालिकाओं की, दूसरे दिन युवतियों की और तीसरे दिन परिपक्व महिलाओँ की पूजा करने का विधान है। पर्व के चौथे दिन देवी लक्ष्मी, पाँचवे दिन माँ सरस्वती और छठे दिन शांति देवी की पूजा की जाती है। सातवें दिन पुनः देवी सरस्वती की पूजा होती है और आठवें दिन माँ दुर्गा को बलिदान स्वरुप एक यज्ञ किया जाता है। नौवां दिन अंतिम पूजा का दिन होता है जिसे महानवमी भी कहते हैं। इस दिन नौ देवियों के प्रतीक स्वरुप नौ किशोरी कन्याओं की पूजा की जाती है। उनके चरण धोने के बाद उन्हें मिष्ठान एवं वस्त्र उपहार स्वरुप दिए जाते हैं। ये नौ देवियां हैं:

7 अक्तूबर 2018

जब हनुमान कुम्भकर्ण से शर्त हार गए

लंका में युद्ध अपनी चरम सीमा पर था। श्रीराम की सेना आगे बढ़ती ही जा रही थी और रावण के अनेकानेक महारथी रण में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। अब तक रावण भी समझ गया था कि श्रीराम की सेना से जीतना उतना सरल कार्य नहीं है जितना वो समझ रहा था। तब उसने अपने छोटे भाई कुम्भकर्ण को जगाने का निर्णय लिया जो ब्रह्मदेव के वरदान के कारण ६ महीने तक सोता रहता था। जब कुम्भकर्ण नींद से जागा तो रावण ने उसे स्थिति से अवगत कराया। इसपर कुम्भकर्ण ने रावण को उसके कार्य के लिए खरी-खोटी तो अवश्य सुनाई किन्तु अपने भाई की सहायता से पीछे नहीं हटा।

4 अक्तूबर 2018

नंदी

प्राचीन काल में एक ऋषि थे "शिलाद"। उन्होंने ये निश्चय किया कि वे ब्रह्मचारी ही रहेंगे। जब उनके पित्तरों को ये पता कि शिलाद ने ब्रह्मचारी रहने का निश्चय किया है तो वे दुखी हो गए क्यूँकि जबतक शिलाद को पुत्र प्राप्ति ना हो, उनकी मुक्ति नहीं हो सकती थी। उन्होंने शिलाद मुनि के स्वप्न में ये बात उन्हें बताई। शिलाद विवाह करना नहीं चाहते थे किन्तु अपने पित्तरों के उद्धार के लिए पुत्र प्राप्ति की कामना से उन्होंने देवराज इंद्र की तपस्या की। इंद्र ने उनकी तपस्या से प्रसन्न हो कर कहा कि "हे ऋषि! मैं आपकी तपस्या से अत्यंत प्रसन्न हूँ किन्तु आपके मन में जो इच्छा है उसे मैं पूरा नहीं कर सकता। इसी कारण आप महादेव को प्रसन्न करें।"

1 अक्तूबर 2018

श्रीकृष्ण के अन्य सात भाइयों के नाम

श्रीकृष्ण के जन्म की कहानी हम सभी जानते हैं। जब कंस को ये पता चला कि उसकी चचेरी बहन देवकी का आठवाँ पुत्र उसका वध करेगा तो उसने देवकी को मारने का निश्चय किया। वसुदेव के आग्रह पर वो उन दोनों के प्राण इस शर्त पर छोड़ने को तैयार हुआ कि वे दोनों अपने नवजात शिशु को पैदा होते ही उसके सुपुर्द कर देंगे। दोनों ने उनकी ये शर्त ये सोच कर मान ली कि जब कंस उनके नजात शिशु का मुख देखेगा तो प्रेम के कारण उन्हें मार नहीं पाएगा। किन्तु कंस के ह्रदय में ममता थी ही नहीं। उसने एक-एक कर कंस ने देवकी की छः संतानों को जन्मते ही मृत्यु के घाट उतार दिया। सातवीं संतान को योगमाया ने देवकी की गर्भ से वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया इसी लिए वे संकर्षण कहलाये और बलराम के नाम से विश्व-विख्यात हुए। उनकी आठवीं संतान के रूप में स्वयं श्रीहरि विष्णु ने अवतार लिया। किन्तु क्या आपको कृष्ण एवं बलराम के अतिरिक्त उनके ६ अन्य पुत्रों के नाम ज्ञात हैं? अगर नहीं तो हम आपको देवकी के आठों संतानों के नाम बताते हैं।