2 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रृंखला

कई वर्षों से सोच रहा था कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों पर एक लेख लिखूं। इस बार श्रावण के इस पवित्र अवसर पर हरेक ज्योतिर्लिंग पर एक लेख प्रकाशित करूँगा। सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग का वर्णन तब आता है जब सृष्टि के आरम्भ में भगवान विष्णु एवं परमपिता ब्रह्मा के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाता है। तब उनके बीच अग्नि प्रज्वलित एक ज्योतिर्लिंग उपस्थित होता है। ना ब्रह्मा और ना ही विष्णु उस महान आदि ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत पता कर पाते हैं। अंततः उसका छोर ढूंढने के लिए ब्रह्मा हंस के रूप में ऊपर और विष्णु वाराह के रूप में नीचे जाते हैं किन्तु १००० वर्षों तक निरंतर चलने के बाद भी वे दोनों उस ज्योतिर्लिंग का कोई ओर छोर नहीं ढूंढ पाते। वापस आकर ब्रह्मा असत्य कह देते हैं कि उन्होंने छोर ढूंढ लिया है जिसके बाद सदाशिव उन्हें दर्शन देकर ब्रह्माजी को उनके असत्य के लिए धिक्कारते हैं और विष्णु को उनसे श्रेष्ठ घोषित करते हैं। पुराणों में कदाचित ये सबसे पहला प्रकरण है जहाँ ज्योतिर्लिंग या शिवलिंग का वर्णन आता है। पुराणों के अनुसार ही पृथ्वी पर जहाँ-जहाँ भगवान शिव प्रकट हुए वो स्थान ज्योतिर्लिंग कहलाया। ये मुख्य रूप से १२ हैं। पहले सोचा था कि बैद्यनाथ पर पहला लेख लिखूंगा किन्तु अब सोचता हूँ कि ज्योतिर्लिंगों के क्रम से ही लेख प्रकाशित किया जाये। तो परसों सोमनाथ पर पहला लेख लिखूँगा। ॐ नमः शिवाय।।
  1. सोमनाथ - सौराष्ट्र (गुजरात)
  2. मल्लिकार्जुन - श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश)
  3. महाकालेश्वर - उज्जैन (मध्य प्रदेश)
  4. ॐकारेश्वर - खण्डवा (मध्य प्रदेश)
  5. केदारनाथ - रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)
  6. भीमाशंकर - रायचूर (महाराष्ट्र)
  7. काशी विश्वनाथ - वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
  8. त्रयंबकेश्वर - नासिक (महाराष्ट्र)
  9. नागेश्वर - जामनगर (गुजरात)
  10. बैद्यनाथ - देवघर (झारखण्ड)
  11. रामेश्वर - रामेश्वरम (तमिलनाडु)
  12. घृष्णेश्वर - औरंगाबाद (महाराष्ट्र)