31 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला १२: श्री घृष्णेश्वर महादेव

श्री घृष्णेश्वर महादेव की पावन कथा के साथ आज द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रृंखला समाप्त हो रही है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से लगभग ३५ किलोमीटर दूर, एलोरा की गुफाओं से सिर्फ १ किलोमीटर की दूरी पर भगवान शिव का १२वां ज्योतिर्लिंग श्री घृष्णेश्वर महादेव स्थित है। यहाँ से आठ किलोमीटर दूर दौलताबाद के किले में भी श्री धारेश्वर शिवलिंग स्थित है। औरंगाबाद, जो मुग़ल सल्तनत के क्रूर बादशाह औरंगजेब की राजधानी थी, इस ज्योतिर्लिंग के संघर्ष की साक्षी है।

29 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला ११: श्री रामेश्वरम

दक्षिण भारत के तमिलनाडु में स्थित भगवान शिव के ११वें ज्योतर्लिंग श्री रामेश्वरम की महत्ता अपरम्पार है। उत्तर में जो स्थान श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का है वही दक्षिण में रामेश्वरम महादेव का। ये भारत के चार धामों में से एक माना जाता है। उनमे से तीन धाम बद्रीनाथ, द्वारिकापुरी एवं पुरी जगन्नाथ जहाँ भगवान विष्णु को समर्पित हैं, रामेश्वरम में हरि एवं हर का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा और भी बड़ी इस लिए हो जाती है क्यूंकि इसकी स्थापना स्वयं श्रीराम ने की थी। इसी ज्योतिर्लिंग के निकट एक और महान शिवलिंग है जिसे हनुमदीश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना रामेश्वरम के ठीक बाद रुद्रावतार हनुमान द्वारा की गयी थी। रामेश्वरम एवं हनुमदीशश्वर महादेव को यमज (जुड़वाँ) शिवलिंग भी कहा जाता है। हनुमदीश्वर महादेव के विषय में आप विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं।

26 अगस्त 2018

ओणम

सर्वप्रथम आप सभी को ओणम की हार्दिक शुभकामनाएँ। ओणम दक्षिण भारत, विशेषकर केरल का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो दशहरे की तरह १० दिनों तक मनाया जाता है। ये त्यौहार सम्राट महाबली के स्वागत के लिए मनाया जाता है। इस पर्व का सम्बन्ध भगवान विष्णु के पाँचवे अवतार श्री वामन एवं प्रह्लाद के पौत्र दैत्यराज बलि से है।

25 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला १०: बाबा बैद्यनाथ

"चिताभूमि पर स्थापित बैद्यनाथ ही वास्तविक ज्योतिर्लिंग है।" ये कथन शिवपुराण में लिखा है और इसका वर्णन मैं इसी कारण कर रहा हूँ कि महाराष्ट्र में स्थित परली बैद्यनाथ और हिमाचल में स्थित बैद्यनाथ को वहाँ के स्थानीय लोग असली ज्योतिर्लिंग मानते हैं किन्तु चिताभूमि (देवघर) में स्थिति बाबा बैद्यनाथ को ही वास्तविक ज्योतिर्लिंग के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस स्थान को चिताभूमि इसी कारण कहा जाता है क्यूंकि ये एक शक्तिपीठ भी माना जाता है जहाँ माता सती का ह्रदय गिरा था। इसी कारण इसे हृदयपीठ भी कहा जाता है।

23 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला ९: श्री नागेश्वर महादेव

गुजरात के द्वारकापुरी से करीब २५ किलोमीटर दूर भगवान शिव का नवां ज्योतिर्लिंग श्री नागेश्वर महादेव स्थित है जिसके दर्शन को दूर-दूर से लोग आते हैं। इसकी एक विशेषता ये भी है कि अन्य ज्योतिर्लिंगों की तरह इस ज्योतिर्लिंग का अभिषेक साधारण जल से नहीं किया जा सकता। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का अभिषेक केवल गंगाजल से किया जाता है जो कि मंदिर प्रशासन की ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इस मंदिर में महादेव की एक विशाल प्रतिमा है जो यहाँ का मुख्य आकर्षण है। ये इतनी विशाल है कि मंदिर की ओर जाते हुए ये कई किलोमीटर पहले से ही दिख जाती है।

21 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला ८: श्री त्रयंबकेश्वर महादेव

महाराष्ट्र के नाशिक शहर से करीब ३० किलोमीटर दूर भगवान शिव का अति पावन त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग को विशेष इस कारण माना जाता है क्यूंकि यही एक ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहाँ भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु एवं परमपिता ब्रह्मा भी विराजमान है। विशेषकर भगवान ब्रह्मदेव की गिने चुने अवतरणों में से एक ये भी है। इस ज्योतिर्लिंग के तीन मुख हैं जो त्रिदेवों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही साथ इनके प्रतीकात्मक तीन पिंड भी हैं जिनमे से एक ब्रह्मा, एक विष्णु एवं एक त्रयंबकेश्वर रुपी भगवान महारुद्र हैं।

17 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला ७: श्री काशी विश्वनाथ

जो सृष्टि के आरम्भ से पूर्व भी था और सृष्टि के विनाश के बाद भी रहेगा वही काशी है। कहते हैं कि काशी का लोप कभी नहीं होता क्यूंकि ये नगरी स्वयं महादेव के त्रिशूल पर स्थित है। स्कन्द पुराण में शिव यमराज से कहते हैं - "हे धर्मराज! तुम प्राणियों के कर्मों के अनुसार उसकी मृत्यु का प्रावधान करो किन्तु ५ कोस में फैली इस काशी नगरी से दूर ही रहना क्यूंकि ये मुझे अत्यंत प्रिय है।" इस नगरी को स्वयं देवी गंगा का वरदान है कि जो कोई भी इस नगरी में आकर गंगास्नान कर काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है वो निश्चय ही मोक्ष को प्राप्त करता है। जो व्यक्ति केवल काशी में अपने प्राण भी त्यागता है तो वो सीधे स्वर्गलोक को जाता है।

15 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला ६: श्री भीमाशंकर

महाराष्ट्र के पुणे जिले से करीब ११० किलोमीटर दूर रायचूर जिले के सह्याद्रि की मनोरम पहाड़ियों में भीमा नदी के तट पर भगवान शिव का छठा ज्योतिर्लिंग श्री भीमाशंकर महादेव स्थापित है। ये मंदिर समुद्र तल से लगभग ३२५० फ़ीट ऊंचाई पर स्थित है। इसमें स्थापित शिवलिंग आम शिवलिंग से बहुत वृहद् या मोटा है और इसी कारण इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का शिखर १८वीं सदी में नाना फरडावीस ने बनवाया था, जिसमे विशेष रूप से एक विशाल घंटा शामिल है। यही नहीं मराठा शासक छत्रपति शिवाजी ने इस मंदिर को कई तरह की सुविधाएँ दी।

13 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला ५: श्री केदारनाथ

कहा जाता है कि ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ वैसे ही सुशोभित होते हैं जैसे ग्रहों के बीच में सूर्यनारायण। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय के "केदार" नामक चोटी पर बसे ये स्थान इतना मनोरम है कि यही बस जाने को जी चाहता है। किन्तु ये स्थान मनोरम होने के साथ-साथ दुर्गम भी है। इस ज्योतिर्लिंग का महत्त्व इसी लिए भी अधिक है क्यूंकि ये ज्योतिर्लिंग होने के साथ-साथ चार धामों में से भी एक है। साथ ही साथ ये पञ्च-केदार में से भी एक है। बद्रीनाथ धाम के निकट इस धाम पर आपको हरि (बद्री) और हर (केदार) का अनोखा सानिध्य देखने को मिलता है। कहा गया है:

अकृत्वा दर्शनं वैश्वय केदारस्याघनाशिन:।
यो गच्छेद् बदरीं तस्य यात्रा निष्फलतां व्रजेत्।।

अर्थात जो भी व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन के बिना बदीनाथ के दर्शन को आता है उसे उस दर्शन का फल प्राप्त नहीं होता, अर्थात उसकी बद्रीनाथ यात्रा व्यर्थ हो जाती है।

10 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला ४: श्री ॐकारेश्वर

मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में परम पावन नर्मदा नदी के बीच स्थित शिवपुरी द्वीप पर भगवान महादेव का चौथा ज्योतिर्लिगं श्री ॐकारेश्वर स्थित है। शिवद्वीप, जिसे मान्धाता द्वीप भी कहते हैं, उसकी आकृति भी आश्चर्यजनक रूप से ॐ के समान है। इस ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ नर्मदा नदी का भी बड़ा महत्त्व है। शास्त्र कहते हैं कि जो फल यमुना में १५ स्नान और गंगा में ७ स्नान करने पर मिलता है वो ॐकारेश्वर महादेव की कृपा से नर्मदा के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

8 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला ३: श्री महाकालेश्वर

आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम् ।
भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते ॥

अर्थात आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है।

इस एक ही श्लोक से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा पता चलती है। मध्यप्रदेश के प्राचीन शहर उज्जैन दो चीजों के लिए प्रसिद्ध है। एक महाकुम्भ एवं दूसरे श्री महाकालेश्वर महादेव। कहते हैं कि ये शिवलिंग स्वयंभू है जिसके ऊपर बाद में मंदिर बना दिया गया। सोमनाथ की भांति ये मंदिर भी ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ शक्तिपीठ भी माना जाता है जो यहाँ उनकी पत्नी महाकाली कहलाती है। सोमनाथ की ही भांति मुस्लिम शासकों ने महाकेश्वर मंदिर को भी नष्ट करने का पूरा प्रयास किया। सन १२३४ में मुग़ल शासक इल्तुतमिश ने इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया किन्तु हमेशा की तरह शिवलिंग को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। उसके बाद सभी राजाओं ने इस मंदिर की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा।

6 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला २: श्री मल्लिकार्जुन

हैदराबाद से करीब २०० किलोमीटर दूर आंध्र के कुर्नूल जिले के श्रीशैलम पहाड़ियों की प्राकृतिक सौंदर्य के बीच महादेव का द्वितीय ज्योतिर्लिंग श्रीमल्लिकार्जुन स्थित है। वैसे तो भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों का अत्यधिक महत्त्व है पर उसपर भी ये ज्योतिर्लिंग अद्वितीय एवं विशेष है। इसका कारण ये है कि यहाँ महादेव के साथ-साथ माता पार्वती भी विराजती है तथा मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ शक्तिपीठों में से भी एक है।

4 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रंखला १: श्री सोमनाथ

गुजरात के सौराष्ट्र में प्रभास तीर्थ पर बना सोमनाथ का मंदिर अपनी अदभुत कलाकृति के साथ-साथ भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग होने के कारण भी प्रसिद्ध है। ये शिवलिंग अत्यंत प्राचीन है क्यूंकि इसकी स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। इसके बारे में एक कथा है कि ब्रह्मपुत्र प्रजापति दक्ष ने चंद्र को अपनी २७ कन्याओं का दान किया। आरम्भ में सभी उनके साथ सुख पूर्वक रह रही थी किन्तु चंद्रदेव का अपनी पत्नी रोहिणी पर अधिक प्रेम था। वो उससे इतना प्रेम करते थे कि उनका ध्यान अन्य पत्निओं की तरफ नहीं जाता था।

2 अगस्त 2018

द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रृंखला

कई वर्षों से सोच रहा था कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों पर एक लेख लिखूं। इस बार श्रावण के इस पवित्र अवसर पर हरेक ज्योतिर्लिंग पर एक लेख प्रकाशित करूँगा। सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग का वर्णन तब आता है जब सृष्टि के आरम्भ में भगवान विष्णु एवं परमपिता ब्रह्मा के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाता है। तब उनके बीच अग्नि प्रज्वलित एक ज्योतिर्लिंग उपस्थित होता है। ना ब्रह्मा और ना ही विष्णु उस महान आदि ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत पता कर पाते हैं। अंततः उसका छोर ढूंढने के लिए ब्रह्मा हंस के रूप में ऊपर और विष्णु वाराह के रूप में नीचे जाते हैं किन्तु १००० वर्षों तक निरंतर चलने के बाद भी वे दोनों उस ज्योतिर्लिंग का कोई ओर छोर नहीं ढूंढ पाते। वापस आकर ब्रह्मा असत्य कह देते हैं कि उन्होंने छोर ढूंढ लिया है जिसके बाद सदाशिव उन्हें दर्शन देकर ब्रह्माजी को उनके असत्य के लिए धिक्कारते हैं और विष्णु को उनसे श्रेष्ठ घोषित करते हैं।