29 जून 2018

वेदों में प्रतिदिन पृथ्वी से क्षमा माँगने को क्यों कहा गया है?

बहुत काल पहले विद्वानों की एक सभा में शास्त्रार्थ चल रहा था। उसी समय एक प्रश्न उठा कि सृष्टि में वो कौन है जिसकी सहनशीलता अपार है? तब कई विद्वानों ने अलग-अलग तर्क रखे। एक ने कहा कि जल सबसे सहनशील है क्यूंकि उसपर चाहे कितने प्रहार करो वो अंततः शांत हो जाता है। तब दूसरे ने वायु को सहनशील बताया जो जीव मात्र को जीने की शक्ति प्रदान करता है। तीसरे की दृष्टि में अग्नि सर्वाधिक सहनशील थी क्यूंकि वो संसार की समस्त अशुद्धिओं को नष्ट कर देती है। किसी ने आकाश को सहनशील बताया कि कितने आपदाओं से वो हमारी रक्षा करती है और जीवन के लिए जल भी प्रदान करती है। तब अंततः ऋषि होत्र ने कहा - "हे महानुभावों! आपने जिन तत्वों के बारे में कहा है वो निश्चय ही सहनशील है किन्तु मेरे विचार से पृथ्वी इन सब से अधिक सहनशील है।" सभी के पूछने पर उन्होंने इस प्रकार इसकी व्याख्या की:

27 जून 2018

भागलपुर का ५१ साल पुराना "जय हनुमान मंदिर"

जब आप भागलपुर (बिहार) के खंजरपुर नामक स्थान पहुँचते हैं तो आपको एस.बी.आई. क्षेत्रीय कार्यालय के बाद और एस.एम. कॉलेज से पहले, बिलकुल चौराहे पर एक त्रिकोणीय भूमि पर स्थित एक छोटा किन्तु पुराना और महत्वपूर्ण हनुमान मंदिर दिखता है। इस मंदिर का नाम ही "जय हनुमान मंदिर" है। इस मंदिर की स्थापना आज से ५१ वर्ष पूर्व १९६७ में की गयी थी। इससे पहले उस खाली स्थान पर शहर के रिक्शेवालों का जमावड़ा रहता था जो मंदिर बनने के बाद उसी जगह थोड़ा बाईं ओर चला गया है। पहले वहाँ केवल हनुमानजी की मूर्ति स्थापित की गयी लेकिन बाद में वाहनों की अधिक आवाजाही को देखते हुए एक छोटा सा मंदिर बना दिया गया। ये मंदिर स्वायत्त है और इसके अपने पुजारी हैं जिनपर इस मंदिर की जिम्मेदारी है। पहले ये मंदिर २४ घंटे खुला रहता था किन्तु अब रात्रि के समय इसे बंद कर दिया जाता है। हालाँकि उसके बाद भी आप बाहर से मूर्ति के दर्शन कर सकते हैं। ये मंदिर सुबह ५ बजे से रात्रि ९ बजे तक सबके लिए खुला रहता है और इस मंदिर में किसी भी जाति अथवा धर्म के लोग बेखटक प्रवेश कर सकते हैं। यहाँ दिन में दो बार सुबह और शाम नियमित आरती  होती है। महिला कॉलेज के निकट होने के कारण यहाँ दिन भर भीड़ लगी रहती है।

25 जून 2018

कालनेमि - एक ऐसा दैत्य जिसने कलियुग तक भगवान विष्णु का पीछा नहीं छोड़ा

सतयुग में दो महाशक्तिशाली दैत्य हुए - हिरण्यकशिपु एवं हिरण्याक्ष। ये इतने शक्तिशाली थे कि इनका वध करने को स्वयं भगवान विष्णु को अवतार लेना पड़ा। हिरण्याक्ष ने अपनी शक्ति से पृथ्वी को सागर में डुबो दिया। तब नारायण ने वाराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया। उसके दो पुत्र थे - अंधक एवं कालनेमि जो उसके ही समान शक्तिशली थे। जब तक उनके चाचा हिरण्यकशिपु जीवित रहे, उन्होंने उनके संरक्षण में जीवन बिताया किन्तु जब नारायण ने हिरण्यकशिपु को नृसिंह अवतार लेकर मारा तब दोनों भाई ने प्रतिशोध लेने की ठानी। अंधक अपनी महान शक्ति के मद में आकर देवी पार्वती से धृष्टता कर बैठा और महारुद्र के हाथों मारा गया। तब कालनेमि ने महादेव से प्रतिशोध लेने हेतु अपनी पुत्री वृंदा, जिसे ये अवतार प्राप्त था कि उसके होते उसके पति की मृत्यु नहीं हो सकती, उसका विवाह जालंधर नमक दैत्य से कर दिया जो महादेव का घोर शत्रु था। हालाँकि वृंदा का सतीत्व भी जालंधर को बचा नहीं सका और वो नारायण के छल के कारण भगवान शिव के हाथों मारा गया। इसके बारे में आप विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं। जब कालनेमि को विष्णु के छल और अपनी पुत्री और जमता के मृत्यु का समाचार मिला तो उसने नारायण से प्रतिशोध लेने की प्रतिज्ञा की।

21 जून 2018

सप्त/अष्ट मातृका

मातृका हिन्दू धर्म में माताओं का प्रसिद्ध समूह है जिनकी उत्पत्ति आदिशक्ति माँ पार्वती से हुई है। सप्तमातृकाओं में सात देविओं की गिनती की जाती है जिनकी पूजा वृहद् रूप से भारत, विशेषकर दक्षिण में की जाती है। नेपाल में विशेषकर अष्टमातृकाओं की पूजा की जाती है जो आठ देवियों का समूह है। इनमे से हर देवी किसी न किसी देवता/देवी की शक्ति को प्रदर्शित करती है। इनमे से पहली छः मातृका तो पूरे विश्व में एक मत से मान्य हैं किन्तु अंतिम दो के बारे में अलग-अलग जगह कुछ शंशय एवं विरोध है। यहाँ उनके बारे में संक्षिप्त जानकारी दी जा रही है।

14 जून 2018

उडुपी के राजा - महाभारत की एक ऐसी अनोखी कहानी जो आप शायद ही जानते हों

महाभारत एक सागर के समान है और इसके अंदर कथा रुपी कितने मोती छिपे हैं ये शायद कोई नहीं जनता। आज मैं आपको जो कथा सुनाने जा रहा हूँ वो कदाचित आपने कभी सुनी नहीं होगी पर ये कथा दक्षिण, विशेषकर तमिलनाडु में बड़ी प्रचलित है। महाभारत को हम सही मायने में विश्व का प्रथम विश्वयुद्ध कह सकते हैं क्यूंकि शायद ही कोई ऐसा राज्य था जिसने इस युद्ध में भाग नहीं लिया। आर्यावर्त के समस्त राजा या तो कौरव अथवा पांडव के पक्ष में खड़े दिख रहे थे। बलराम और रुक्मी ये दो ही व्यक्ति ऐसे थे जिन्होंने इस युद्ध में भाग नहीं लिया। कम से कम हम सभी तो यही जानते हैं। किन्तु एक और राज्य ऐसा था जो युद्ध क्षेत्र में होते हुए भी युद्ध से विरत था। वो था दक्षिण के "उडुपी" का राज्य। 

12 जून 2018

कालिया नाग मर्दन

श्रीकृष्ण अभी बालक ही थे किन्तु उनपर कंस के राक्षसों द्वारा कई आक्रमण हो चुके थे। अब तक तो पूरा ब्रज भी जान चुका था कि कृष्ण कोई साधारण बालक नहीं हैं। प्रतिदिन कृष्ण अपने मित्रों और बलराम के साथ गौ चराने जाते थे। जब तक गौएँ चरती थीं, बालक भिन्न-भिन्न प्रकार के खेल खेलते थे। अधिकतर उनका जमावड़ा यमुना नदी के तट पर ही होता था। एक बार खेलते-खेलते कृष्ण को बड़ी प्यास लगी। जैसे ही वो यमुना नदी का पानी पीने को बढे, उनके मित्रों ने उन्हें रोक दिया और बताया कि यमुना में कालिया नामक अतिविषधर नाग का निवास है जिसके कारण पुरे यमुना का पानी विषाक्त हो चुका था। यही कारण था कि यमुना के इतने पास होने पर भी ब्रजवासियों को बड़ी दूर से पानी लाना पड़ता था।

10 जून 2018

जब महाबली हनुमान ने पूरे पर्वत शिखर को उखाड़ दिया

लंका का युद्ध चल रहा था। लंकापति रावण के अधिकांश महारथी मारे जा चुके थे। अब लंका केवल रावण और उसके पुत्र मेघनाद के भरोसे थी। मेघनाद एक बार श्रीराम और लक्ष्मण को नागपाश से बाँध चुका था किन्तु गरुड़ ने दोनों को नागपाश से मुक्त कर दिया। जब रावण को ये सूचना मिली तो उसने एक बार फिर मेघनाद को युद्ध के लिए भेजा। मेघनाद ने घोर युद्ध किया। श्रीराम की ओर से लक्ष्मण उसका प्रतिकार करने आये। तो महारथियों का युद्ध देखने के लिए अन्य योद्धाओं ने अपने हाथ रोक लिए। दोनों के बीच बहुत देर तक युद्ध चलता रहा किन्तु कोई फैसला नहीं हो पाया।

7 जून 2018

जब कृष्ण ने पांडवों को बताया कलियुग की गति के बारे में

पांडवों को जुए में छल से हराया जा चुका था और शर्त के अनुसार उन्हें वन में जाना था। जाने से पहले श्रीकृष्ण उनसे मिलने आये। तब सहदेव ने उनसे पूछा - "हे कृष्ण! हमने तो आज तक कोई पाप नहीं किया फिर हमें ये कष्ट क्यों उठाने पड़ रहे हैं?" तब कृष्ण ने कहा - "प्रिय सहदेव! द्वापरयुग अपने अंतिम चरण पर है। ये सब जो हो रहा है वो आने वाले कलियुग का प्रभाव है।" इसपर युधिष्ठिर ने आश्चर्य से पूछा - "वासुदेव! कलियुग तो अभी आया भी नहीं है और उसका इतना भयंकर परिणाम? जब कलियुग प्रारम्भ हो जाएगा तो क्या होगा? कृपया हमें कलियुग में काल की गति कैसी रहेगी ये बताने की कृपा करें।" इसपर कृष्ण ने कहा "आप सभी भाई वन में जाइये और जो कुछ भी दिखे आकर मुझे बताइये। उसी आधार पर मैं आपको कलियुग की गति बता पाउँगा।" कृष्ण के ऐसा कहने पर पाँचों भाई वन में अलग-अलग दिशा में चल दिए। कुछ समय बाद जब सभी लौटे तो आश्चर्य से भरे हुए थे। कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा "अब आपलोग एक-एक करके बैठाइये कि आपने क्या-क्या देखा।" तब सभी भाइयों ने अपने आश्चर्यजनक अनुभव बताये:

4 जून 2018

जब महादेव ने हनुमान का घमंड तोडा - हनुमदीश्वर शिवलिंग की कथा

रामायण और महाभारत में ऐसी कई कहानियाँ हैं जिसमे महाबली हनुमान ने दूसरों का घमंड थोड़ा। विशेषकर महाभारत में श्रीकृष्ण ने हनुमान जी के द्वारा ही अर्जुन, बलराम, भीम, सुदर्शन चक्र, गरुड़ एवं सत्यभामा का घमंड थोड़ा था। इसमें कोई शंका नहीं कि महाबली हनुमान में अपर बल था। रामायण के बाद उनके बल का वर्णन करते हुए श्रीराम कहते हैं कि "यद्यपि रावण की सेना में स्वयं रावण, कुम्भकर्ण एवं मेघनाद जैसे अविजित वीर थे और हमारी सेना में भी स्वयं मैं, लक्ष्मण, जामवंत, सुग्रीव, विभीषण एवं अंगद जैसे योद्धा थे किन्तु इन सब में से कोई भी हनुमान के बल की समता नहीं कर सकता। इस पूरे विश्व में परमपिता ब्रह्मा, नारायण एवं भगवान रूद्र के अतिरिक्त कदाचित ही कोई और हनुमान को परास्त करने की शक्ति रखता है।" इतने बलवान होने के बाद भी हनुमान अत्यंत विनम्र और मृदुभाषी थे एवं अहंकार तो उन्हें छू भी नहीं गया था। इसपर भी रामायण में एक-आध ऐसी कथा आती है जब हनुमान को क्षणिक घमंड हो गया था। किन्तु जिनके स्वामी स्वयं श्रीराम हों उन्हें उबरने में समय नहीं लगता।