16 अप्रैल 2018

वो छः श्राप जो रावण के विनाश का कारण बने

रावण के बारे में कौन नहीं जनता। उसकी वीरता सर्व-विख्यात थी। उसे सप्तसिंघुपति कहा जाता था क्यूंकि उसने सातों महाद्वीपों पर विजय पायी यही। उसे परमपिता ब्रम्हा का वरदान प्राप्त था और उसपर महारुद्र की विशेष कृपा थी। यही कारण था कि उससे युद्ध करने का कोई साहस नहीं करता था। यही नहीं, उसने समस्त देवताओं पर विजय पायी थी और नवग्रह उसके वश में थे। सभी गृह उसकी इच्छा से चलते थे इसीलिए वो अपनी मृत्यु का योग बदल सकता था। शनि को उसने अपने दरबार में अपने पैरों के नीचे रखता था। इतने प्रतापी और वीर असुर की मृत्यु अवश्य ही अत्यंत कठिन थी इसी कारण प्रकृति ने उसके लिए कोई और उपाय सोचा। रावण को अपने जीवन में कई ऐसे श्राप मिले जो आगे चलकर उसकी मृत्यु का कारण बनें, किन्तु ६ श्रापों का विशेष रूप से जिक्र है:
  1. इक्षवाकु कुल में एक श्रीराम के एक पूर्वज अनरण्य हुए। उस समय रावण युवा था और विश्व विजय के अभियान पर निकला था। उसी दौरान उसका सामना अनरण्य से हुआ। उन्होंने रावण को रोकने की बड़ी कोशिश की किन्तु अंततः रावण से पराजित हुए। रावण ने उनका वध कर दिया किन्तु मरते-मरते उन्होंने रावण को श्राप दिया कि उनके ही वंश में जन्मा एक व्यक्ति उसका वध करेगा। उनका श्राप सत्य हुआ और आगे चल कर श्रीराम ने रावण का वध किया। 
  2. एक बार रावण महादेव से मिलने कैलाश गया। उस समय महादेव समाधि में लीन थे इसीलिए नंदी ने रावण को आगे जाने से रोक दिया। इसपर उसने नंदी को देखकर उनके स्वरूप की हंसी उड़ाई और उन्हें वानर के समान मुख वाला कहा। तब नंदी ने रावण को श्राप दिया कि वानरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा। आगे चलकर सुग्रीव की वानर सेना ने श्रीराम की सहायता की जिससे रावण का सर्वनाश हुआ। 
  3. वैजयंतपुर के सम्राट दैत्यराज शंभर माया के पति थे। माया मय दानव की पुत्री और रावण की पत्नी मंदोदरी की बड़ी बहन थी। एक बार रावण वैजयंतपुर दैत्यराज शंभर के यहां गया। वहाँ वो माया के रूप पर मोहित हो गया और माया भी रावण के रूप पर मोहित हो गयी और दोनों के बीच सम्बन्ध बन गए। जब शंभर को इसकी सूचना मिली तो उसने रावण को को बंदी बना लिया। उसी समय शंभर पर राजा दशरथ ने आक्रमण कर दिया और उस युद्ध में शंभर की मृत्यु हो गई। जब माया सती होने लगी तो रावण ने उसे  रोकना चाहा पर माया ने उसे श्राप दिया कि तुमने वासनायुक्त मेरा सतित्व भंग करने का प्रयास किया इसलिए मेरे पति की मृत्यु हो गई। अत: तुम भी स्त्री की वासना के कारण मारे जाओगे।
  4. एक बार भ्रमण करते हुए रावण की दृष्टि वेदवती नाम की एक स्त्री पर पड़ी जो भगवान विष्णु को पति के रूप में पाने के लिए तप कर रही थी। रावण ने उससे प्रणय याचना की किन्तु वेदवती ने खुले तौर पर मना कर दिया। इसपर रावण ने उसके केश पकडे और घसीटे हुए बलपूर्वक अपने साथ ले जाने लगा। इसपर उस तपस्विनी ने उसी क्षण अपनी देह त्याग दी और रावण को श्राप दिया कि एक स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी। कहा जाता है वेदवती ही अगले जन्म में सीता के रूप में जन्मी थी जिस कारण रावण का सर्वनाश हुआ। 
  5. रावण ने इंद्र पर आक्रमण किया और स्वर्गलोक पहुँचा। वहाँ उसे रम्भा नमक अप्सरा दिखाई दी। अपनी वासना पूरी करने के लिए रावण ने उसे पकड़ लिया। तब उस अप्सरा ने कहा कि आप मुझे इस तरह से स्पर्श न करें क्यूँकि मैं आपके बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर के लिए आरक्षित हूं अतः मैं आपकी पुत्रवधू के समान हूं किन्तु रावण नहीं माना और उसने रंभा से दुराचार किया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को श्राप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसको स्पर्श करेगा तो रावण का मस्तक सौ टुकड़ों में बंट जाएंगे। यही कारण था कि सीता का अपहरण करने के बाद भी रावण ने उसे स्पर्श नहीं किया। 
  6. रावण की बहन सूर्पनखा ने रावण की इच्छा के विरूद्ध एक दैत्य विद्युत्जिह्व से विवाह कर लिया। वो कालकेय दैत्यों का सम्राट था। रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ और उस युद्ध में रावण ने विद्युत्जिह्व का वध कर दिया। जब सूर्पनखा उसके साथ सती होने तो रावण ने उसे रोक दिया और बलपूर्वक लंका ले आया। बाद में उसे समझा-बुझा कर खर-दूषण के साथ दंडकारण्य का राज्य दे दिया। तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा। कहा जाता है कि सूर्पनखा दंडकारण्य में जान-बूझ कर राम-लक्षमण से उलझी ताकि रावण का सर्वनाश हो सके।